Thalapathy Vijay की फिल्म Jana Nayagan पर Madras High Court ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. उन्होंने अब तक इस मूवी को सेंसर सर्टिफिकेट देने की इजाज़त नहीं दी है. हालिया सुनवाई में कोर्ट ने फिल्म प्रोड्यूस करने वाली KVN Productions से कई सवाल किए थे. उनके जवाब में मेकर्स ने Aditya Dhar की Dhurandhar 2 का उदाहरण दिया. मगर कोर्ट अपनी बात पर कायम रहा.
थलपति विजय की 'जन नायगन' फंसी तो मेकर्स 'धुरंधर 2' को घसीट लाए!
मेकर्स का कहना है कि फिल्म पर बहुत पैसा लगा है, ऐसे में इसकी रिलीज़ फंसने से उनका लगातार नुकसान हो रहा है.


'जन नायगन' पहले 09 जनवरी को रिलीज़ होने वाली थी. मगर सेंसर सर्टिफिकेट न मिलने की वजह से इसे पोस्टपोन कर दिया गया था. मेकर्स ने जानकारी दी कि उन्होंने इस मूवी पर 500 करोड़ रुपये लगाए हैं. फिल्म के टलने से उन्हें लगातार नुकसान हो रहा है. इस पर कोर्ट ने मेकर्स से सवाल किया कि जब मूवी को सर्टिफिकेट मिला ही नहीं था, तो उन्होंने इसकी रिलीज़ डेट अनाउंस क्यों कर दी.
ये सवाल सुनकर मेकर्स की तरफ़ से पक्ष रख रहे सीनियर एडवोकेट सतीश परासरन ने 'धुरंधर 2' का हवाला दिया. उन्होंने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में इस तरह का चलन बेहद आम है. वो कहते हैं,
"आमतौर पर सेंसर सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही फिल्म की रिलीज़ डेट अनाउंस करने की कोई तय परंपरा नहीं होती है. अगर बॉलीवुड का उदाहरण ही देखें, तो धुरंधर 2 की रिलीज़ डेट भी सेंसर सर्टिफिकेट से पहले ही अनाउंस कर दी गई थी."
मेकर्स ने स्पष्ट किया कि फिल्म की मार्केटिंग के लिए वो अक्सर उनकी रिलीज़ डेट सेंसर प्रोसेस के दौरान ही अनाउंस कर देते हैं. इससे उन्हें मूवीज़ को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की सहूलियत मिलती है. हालांकि कोर्ट ने इस तर्क को खास तूल नहीं दिया. जजों का साफ़ कहना है कि फिल्म में कितना पैसा लगा है या रिलीज़ की क्या प्लानिंग है, इसके आधार पर किसी तरह की राहत नहीं दी जा सकती है. ये कहकर उन्होंने 20 जनवरी की सुनवाई में अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है. इस तरह थलपति विजय की मूवी एक बार फिर टल गई है.
'जन नायगन' को 2026 की पहली बड़ी मूवी की तरह प्रमोट किया जा रहा था. मगर सेंसर बोर्ड ने इसे सर्टिफिकेट ही नहीं दिया था. वो भी तब, जब उनके कहने पर मेकर्स ने फिल्म में 27 कट्स लगा दिए थे. रोचक पहलू ये है कि बोर्ड पहले सर्वसम्मति से इस मूवी को U/A सर्टिफिकेट देने को तैयार हो गया था. मगर फिर उसके ही एक सदस्य ने इस पर आपत्ति जता दी. उनका कहना था कि फिल्म से हिन्दू-मुस्लिम के बीच अलगाव पैदा हो सकता है. साथ ही इसमें आर्मी को गलत ढंग से पेश किया गया है. इसके बाद ही सेंसर बोर्ड ने फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया था.
बोर्ड के फैसले के बाद मेकर्स मद्रास हाई कोर्ट पहुंच गए. वहां एक बार उनके पक्ष में फैसला आ भी गया था. मगर सेंसर बोर्ड की अपील के कारण उस पर दोबारा सुनवाई होने लगी. ऐसे में मेकर्स ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया. मगर उन्होंने भी इस केस में दखल देने से साफ़ मना कर दिया. इस कारण बात घूम-फिरकर दोबारा मद्रास हाई कोर्ट पहुंच गई. मगर वहां भी अब तक फैसला नहीं सुनाया गया है. इस वजह से थलपति विजय के करियर की आखिरी फिल्म की रिलीज़ को लेकर अनिश्चितता अब भी बरकरार है.
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