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मोदी के पुतले को हम तब तक मोदी का नहीं मानेंगे. जब तक उसके सीने का माप 56 इंच न दिखाया जाए. लोग कहते हैं. मोदी का पुतला सूट पहने नजर आएगा. क्या हम भूल गए हैं वो मोदी हैं? वो नरेंद्र मोदी हैं. हम ऐसे किसी पुतले को उनका नहीं मानेंगे जिसने हाथ में सेल्फी लेने के लिए मोबाइल न पकड़ रखा होगा.

होंगे वो कोई और जिनके पुतले के बगल में लोग अजीब सी शक्लें बनाकर फोटो खिंचाते हैं. नरेंद्र मोदी के पुतले के बगल से भी कोई गुजरे तो 'मितरों' और 'अच्छे दिन आने वाले हैं' का स्वर गूंजना चाहिए.

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मोदी का पुतला तो ऐसा होना चाहिए कि दो-चार मन की बात वही कर जाए. किसी रैली में खड़ा कर दो तो बिना रुके आधे घंटे की स्पीच दे डाले. पुतला हो तो ऐसा हो जो साल में एकाध दर्ज़न देश ऐसे ही घूम आए.

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और अगर प्रधानमंत्री का पुतला ये सब न कर सके तो लंदन, सिंगापुर, हांगकांग और बैंकॉक वालों को कोई हक़ नहीं कि हमारे प्रधानमंत्री का पुतला वो रखें. पुतला इंडिया में ही रहने दिया जाए ताकि जब प्रधानमंत्री देश से बाहर हों तो हम उन्हें मिस न करें.














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