ब्रिटिश ऑस्कर कहे जाने वाले BAFTA (British Academy of Film and Television Arts) में मणिपुरी फिल्म Boong ने इतिहास रच दिया है. ये Best Children's and Family Film कैटेगरी में अवॉर्ड पाने वाली देश की पहली फिल्म बनी है. अवॉर्ड लेते हुए फिल्म की डायरेक्टर Lakshmipiriya Devi ने मंच से एक छोटी-सी स्पीच दी थी. खबर ये है कि BAFTA ने उस स्पीच को अपने सभी सोशल मीडिया हैंडल्स से डिलीट कर दिया था.
ब्रिटिश ऑस्कर BAFTA जीतने वाली मणिपुरी फिल्ममेकर की विनिंग स्पीच डिलीट कर दी गई!
भयंकर विरोध के बाद BAFTA ने यूट्यूब प्लेटफ़ॉर्म पर लक्ष्मीप्रिया की स्पीच को दोबारा अपलोड कर दिया है.


लक्ष्मीप्रिया ने अपने भाषण में मणिपुर के पॉलिटिकल डिस्टर्बेंस का ज़िक्र किया था. उस दौरान उन्होंने किसी पर दोष तो नहीं डाला, लेकिन लोगों से शांति बहाल करने की उम्मीद ज़रूर की थी. BAFTA के मंच पर उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत 'खुरुमजरी' के सम्बोधन से की थी. मणिपुरी में इसका मतलब नमस्ते होता है. वो कहती हैं,
"खुरुमजरी! यहां तक पहुंचना ऐसा लगा जैसे हम किसी पहाड़ की चोटी पर पहुंच गए हों. जबकि हमें तो पता भी नहीं था कि हम कब से उस पहाड़ पर चढ़ रहे थे."
मणिपुर का ज़िक्र करते हुए वो आगे कहती हैं,
“मैं बस इस मौके पर इतना कहना चाहती हूं कि हम मणिपुर में दोबारा शांति बहाल करने की प्रार्थना करते हैं. हम प्रार्थना करते हैं कि जो बच्चे अपने घरों से दूर रहने को मजबूर हैं, जिनमें फिल्म के चाइल्ड आर्टिस्ट भी शामिल हैं, वो फिर से अपनी खुशी, मासूमियत और सपनों को वापस पा सकें. हम प्रार्थना करते हैं कि तकरार इतनी बड़ी न हो जाए कि वो इंसान की सबसे बड़ी ताकत- माफ़ करने की क्षमता, को खत्म कर दे. इसलिए, BAFTA का धन्यवाद, जिन्होंने सिर्फ एक अवॉर्ड ही नहीं, बल्कि हमें अपनी उम्मीद रखने का मंच भी दिया है.”
एक मणिपुरी फिल्म का BAFTA में जीत हासिल करना देश के लिए बड़ा अचीवमेंट है. इसलिए उसके मंच से दिए गए लक्ष्मीप्रिया के भाषण को बदलाव की एक मशाल के तौर पर देखा जा रहा था. लोगों ने उनकी स्पीच को खूब शेयर किया था. मगर फिर BAFTA ने अचानक उसे अपने सभी ऑफिशियल हैंडल्स से डिलीट कर दिया. 'द लल्लनटॉप' ने अपनी 'बूंग' स्पेशल स्टोरी में भी उस वीडियो को अटैच किया था. मगर वो उस खबर से भी खुद-ब-खुद हट चुका है. इंटरनेट पर लोगों ने BAFTA के इस कदम की खूब आलोचना शुरू कर दी थी. सोशल एक्टिविस्ट बीनालक्ष्मी नेपराम ने लिखा,
"डियर BAFTA, क्या आपने मणिपुर की अवॉर्ड विनिंग फिल्म 'बूंग' की डायरेक्टर, जो एक आदिवासी महिला हैं, उनकी एक्सेप्टेंस स्पीच को अपने सोशल मीडिया अकाउंट X और इंस्टाग्राम से हटा दिया है? अगर ऐसा किया गया है, तो ये उनके साथ-साथ आदिवासी लोगों और महिलाओं की आवाज़ को दबाने जैसा है. आपको ऐसे कदम से बचना चाहिए और उनका भाषण तुरंत वापस लाना चाहिए. आगे बढ़ने का सही रास्ता हमारी आवाज़ों और कहानियों को मिटाना नहीं, बल्कि उन्हें खुद में शामिल करना है."

बीनालक्ष्मी के अलावा कई अन्य लोगों ने भी BAFTA के खिलाफ़ आवाज उठानी शुरू कर दी थी. कुछ लोग कह रहे कि ये एक टेक्निकल ग्लिच हो सकता है. कई का कहना है कि मणिपुर की समस्या का इंटरनेशनल मंच पर ज़िक्र करना, इस वीडियो को डिलीट करने की बड़ी वजह है. एक तबका तो इसे पॉलिटिकल प्रेशर में उठाया गया कदम बता रहे हैं. भयंकर विरोध के बाद 27 फरवरी की रात को BAFTA ने अपने यूट्यूब प्लेटफ़ॉर्म पर लक्ष्मीप्रिया की स्पीच को दोबारा अपलोड कर दिया है. मगर X व इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स से ये भाषण अब भी नदारद है. बता दें कि इस पूरे विवाद पर BAFTA ने कोई सफ़ाई नहीं दी है. न ही डायरेक्टर लक्ष्मीप्रिया और प्रोड्यूसर फरहान अख्तर की तरफ़ से ही कोई रिएक्शन आया है.
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