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कोई करीबी या दोस्त कोरोना संक्रमित हो जाए तो कैसे ख्याल रखें, डॉक्टर से जानिए

डॉक्टर की इन बातों को गांठ बांध लीजिए.

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बाएं से दाएं: कोरोना के सैंपल इकट्ठा करके ले जाता हेल्थ वर्कर (तस्वीर दिल्ली की है, प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल की गई है. क्रेडिट- PTI). मुंबई के धारावी में एक व्यक्ति का थर्मल स्क्रिनिंग करते हेल्थ वर्कर. (प्रतीकात्मक तस्वीर. क्रेडिट- PTI)

कोरोना वायरस के कन्फर्म मामले लगातार बढ़ रहे हैं. शुरुआत में जब सुनते थे कि 'ये पॉज़िटिव आ गया, वो पॉज़िटिव आ गया', तब लगता था कि अभी कोरोना हमसे बहुत दूर है. लेकिन दिन बीतने के साथ वो करीब आते जा रहा है. हममें से बहुतों के दोस्त, करीबी पहचान वाले या परिवार वाले संक्रमित हो चुके हैं. इस वक्त ज़रूरी है कि हम अपने आस-पास मौजूद कोरोना संक्रमितों की देखभाल करें. उनके पास तो जा नहीं सकते, लेकिन बहुत कुछ ऐसे काम हैं, जो हम कर सकते हैं.

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क्या तरीके हैं, ये जानने से पहले जानिए कि कोरोना संक्रमित क्या महसूस करते हैं. 'दी लल्लनटॉप' ने दो लोगों से बात की, जो पॉज़िटिव पाए गए थे, उन्हें होम आइसोलेशन में रखा गया था और अब वो ठीक हो गए हैं.

राहुल (बदला हुआ नाम) दिल्ली में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं. अभी-अभी संक्रमण ठीक हुआ है. वो बताते हैं,

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'घर के एक कमरे में मैं 17 दिन तक रहा. परिवार वाले उसमें आ नहीं सकते थे. खाने के लिए कुछ बर्तन मेरे पास थे. वो मैं दरवाज़े से बाहर रख देता था, उसमें वो खाना डाल देते थे. मैं अंदर ले लेता था. किसी तरह का कोई फिजिकल कॉन्टैक्ट नहीं था घरवालों के साथ.'


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कोरोना सैंपल्स को देखते हेल्थ वर्कर्स. (फोटो- PTI)

इसी तरह का एक्सपीरियंस प्रिया (बदला हुआ नाम) को भी हुआ. 17 दिन तक होम आइसोलेशन में रही थीं. वो कहती हैं,

'इस बात का डर लगता था कि कहीं घरवालों को न फैल जाए. करियर की चिंता अलग होती थी. वो दिन मुश्किल थे, लेकिन घरवालों ने साथ दिया. मैंने कोई न्यूज़ चैनल उस दौरान नहीं देखा, ताकि टेंशन न बढ़ जाए.'

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होम आइसोलेशन के अलावा, जो गंभीर मरीज़ हैं उन्हें अस्पतालों में आइसोलेटेड किया रहा है. उनसे घरवाले मिल नहीं सकते. संपर्क का एकमात्र तरीका फोन है. अब इन दो कंडीशन में संक्रमितों का ख्याल रखने के लिए हमें क्या करना चाहिए, इसके तरीके बताए हैं डॉक्टर प्रवीण त्रिपाठी ने. सायकाइट्रिस्ट हैं. उन्होंने कहा,

'कोरोना वायरस एक वायरल इन्फेक्शन ही है. कुछ को ये बहुत गंभीर तौर पर हो रहा है, तो कुछ में कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं. अच्छी बात ये है कि अभी भारत में इसका मोर्टेलिटी रेट (मृत्युदर) ज्यादा नहीं है. लोग ठीक हो रहे है. लेकिन फिर भी जब ये सुनाई आता है कि कोई कोरोना संक्रमित हो गया है, तो यही विचार आता है कि कुछ बहुत बड़ा हो गया है. हमें शांति से इसका सामाना करना होगा.'


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अमृतसर में एक दोस्त को मास्क पहनाता व्यक्ति. (फोटो- PTI)

कैसे ख्याल रखें संक्रमित व्यक्ति का? डॉक्टर ने कुछ सुझाव दिए हैं-

- संक्रमित व्यक्ति को वक्त-वक्त पर हौंसला देते रहें कि सब ठीक हो जाएगा. उसके सामने आप खुद न घबराएं. फोन पर बातें करते रहिए, यही कहिए कि सब ठीक ही होगा. उसे हमेशा पॉज़िटिव रखने की कोशिश कीजिए. उसे अहसास करवाइए कि वो अकेला नहीं है.


  • वायरस से बचने के लिए एहतियात बरतें, लेकिन डर वाला माहौल न बनाएं. अगर कोई संक्रमित व्यक्ति होम आइसोलेशन में है, तो आप सावधान रहें, लेकिन डरिए मत. इससे संक्रमित व्यक्ति ज्यादा परेशान होगा.
  • अगर आपका कोई करीबी संक्रमित है, तो उसे सलाह दीजिए कि वो ज्यादा खबरें न देखें. बीमारी के दौरान वो जितना ज्यादा निगेटिव न्यूज़ से दूर रहेगा, उतना उसके लिए अच्छा होगा. आप भी खबरें कम देखिए, केवल ज़रूरत की ही देखिए. नहीं तो हो सकता है कि आपके मन में खुद निगेटिव विचार आएं, और ये विचार संक्रमित व्यक्ति को भी प्रभावित कर सकते हैं.
  • अगर आपका कोई करीबी संक्रमित है, अस्पताल में भर्ती है, तो उसे फोन करिए, लेकिन कभी भी उसके सामने रोना मत. कई बार क्या होता है कि बीमार व्यक्ति के सामने आप इतनी ज्यादा चिंता जता देते हो, कि वो और भी ज्यादा परेशान हो जाता है. उसकी घबराहट और बढ़ जाती है. इसलिए अपनी दिक्कतें संक्रमित व्यक्ति के सामने मत रखिए.
  • संक्रमित व्यक्ति की उतनी ही केयर करिए, जितनी ज़रूरत हो. ज़रूरत से ज्यादा कोई भी चीज़ सही नहीं. अगर आप एक्स्ट्रा केयर दिखाएंगे, तो उसके मन में चिड़चिड़ाहट ही बढ़ेगी.
  • मदद के लिए मौजूद रहिए, सपोर्टिव रहिए, लेकिन ड्रामेटिक न होइए. चीज़ों को नॉर्मलाइज़ रखने की कोशिश करिए.
  •  संक्रमित व्यक्ति को फ्री रखिए, ज्यादा डिस्टर्ब न करिए. जब उसे ज़रूरत हो, तब मौजूद रहिए.

ये कुछ तरीके हैं, जिनके ज़रिए हम और आप अपने कोरोना संक्रमित दोस्त या करीबी का ख्याल रख सकते हैं.

देखिये भारत में कोरोना कहां-कहां और कितना फैल गया है.



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