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वो ज़बरदस्त फिल्म जिसकी रिलीज़ से पहले ही मनोज बाजपेयी को बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिल चुका है

कई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवलों में धूम मचाने के बाद भारत पहुंच रही है ये साइकोलॉजिकल थ्रिलर.

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इस फिल्म को डायरेक्ट किया है दीपेश जैन ने. ये उनकी पहली फिल्म है.
मनोज बाजपेयी की फिल्म. नाम 'गली गुलियां'. कई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में 'इन द शैडोज़' के नाम से चलने के बाद अब आ रही है अपने देश. रिलीज़ होने के लिए. फिलहाल ट्रेलर आ गया है. पूरी फिल्म जनता के सामने लाने के लिए 7 सितंबर की तारीख तय की गई है. फिल्म का एक प्रीमियर मुंबई के मामी फिल्म फेस्टिवल में भी किया जा चुका है. इसमें मनोज बाजपेयी को बहुत पसंद किया जा रहा है. फिल्म में उनके परफॉर्मेंस के लिए इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न (Indian Film Festival of Melbourne) में बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड भी मिल चुका है.
असल घटना से प्रेरित ये साइकोलॉजिकल थ्रिलर जॉनर की फिल्म एक व्यक्ति की कहानी है. एक ऐसा आदमी जो कहीं फंस गया. उसका दिल-दिमाग-शरीर सब कुछ वहीं फंसा हुआ है. ये सब कुछ घट रहा है दिल्ली के दिल के एक कोने में बसे चांदनी चौक में. चांदनी चौक के एक खास इलाके में. नाम है गली गुलियां. फिल्म का नाम इसी इलाके के नाम पर रखा गया है. यहां की बसावट खास है. उलझन से भरी. घुस जाओ तो निकल नहीं पाओगे. जैसा खड्डूस यानी मनोज बाजपेयी के साथ हो रहा है.
मनोज बाजपेयी की एक और फिल्म बनकर तैयार है और फिल्म फेस्टिवल्स का सैर कर रही है. तबरेज नूरानी डायरेक्टेड 'लव सोनिया'.
मनोज बाजपेयी की एक और फिल्म बनकर तैयार है और फिल्म फेस्टिवल्स की सैर कर रही है. तबरेज नूरानी डायरेक्टेड 'लव सोनिया'.

शायद कुछ होने वाला है. जिसकी प्लानिंग या रेकी के लिए खड्डूस को एक कमरे में आसपास की निगरानी के लिए लगे सीसीटीवी कैमरे से आ रही फीड पर नज़र रखने के लिए रखा गया है. समय हो गया है. अब वो आदी हो गया है. उसी दुनिया का. अकेलेपन का. असलियत से उसका वास्ता छूट रहा है. वो समय से पीछे जाने लगा है. शायद अपने बचपन में. कैद हो गया है अपने भीतर. तभी उसे अपने बगल वाले घर से किसी बच्चे को पीटे जाने की आवाज़ आती है. वो बावला हो जाता है. उस बच्चे को बचाना चाहता है. दुनियाभर के सोने के बाद बाहर आता है और कुछ और कैमरे लगा देता है. पड़ोसी के घर के आसपास.
उसका बचपन का दोस्त है गणेशी. अब भी उसके साथ है. वो कभी-कभी मिलने आता है उससे. कई बार खाने-पीने की चीज़ें भी लेकर आता है. शायद वो भी इस प्लान का हिस्सा है. गणेशी का रोल रणवीर शौरी ने किया है. वो मना करता है पड़ोसी पर नज़र रखने से. खड्डूस को समझ नहीं आ रहा. वो साइको हो गया है.
आने वाले दिनों में रणवीर और मनोज की जोड़ी एक बार फिर साथ दिखेगी फिल्म 'सोनचिरिया' में. उसमें सुशांत सिंह राजपूत लीड रोल में दिखाई देंगे.
आने वाले दिनों में रणवीर और मनोज की जोड़ी एक बार फिर साथ दिखेगी फिल्म 'सोनचिड़िया' में. उसमें सुशांत सिंह राजपूत लीड रोल में दिखाई देंगे.

बच्चे को उसका बाप बेतहाशा पीट रहा है. शायद बच्चे को उसके पिता के बारे में कुछ ऐसा पता है, जिससे उसका परिवार टूट सकता है. दिक्कत ये है कि कैमरा लगाने के बाद भी बच्चे का कोई निशान नहीं मिल रहा. वो दिख ही नहीं रहा. लेकिन उस पिटते बच्चे की आवाज़ अब भी आ रही है. पेशे से कसाई इस बाप लियाकत का रोल किया है नीरज कबी ने.
नीरज आखिरी बार नेटफ्लिक्स सीरीज़ 'सैक्रेड गेम्स' में डीसीपी पारुलेकर के रोल में दिखे थे.
नीरज आखिरी बार नेटफ्लिक्स सीरीज़ 'सैक्रेड गेम्स' में डीसीपी पारुलेकर के रोल में दिखे थे.

खड्डूस को बच्चा नहीं दिख रहा. उसे लगता है बच्चे को ढूंढ़ने के लिए बाहर निकलना पड़ेगा. लेकिन वो निकलेगा कैसे वो तो अटका हुआ है. अपने अंदर. गली गुलियां में. वो निकलने की कोशिश करता है, लेकिन तब तक देर हो चुकी होती है. वो गली गुलियां का रास्ता भूल चुका होता है.
और ये सब जब घट रहा होता है तब आपकी नज़र बस दो चीज़ों पर होती है. मनोज बाजपेयी और उनके आसपास का माहौल. वो देखकर आपको ये महसूस हो जाएगा कि ये फिल्म कैसी होने वाली है. खड्डूस जैसा साइको किरदार करने वाले मनोज बताते हैं कि ये उनके जीवन का सबसे कठिन किरदार है. मनोज उन विरले कलाकारों में से हैं, जो ये बात आमतौर पर नहीं बोलते. इसलिए उनके परफॉर्मेंस से बहुत उम्मीद लगी है. इसके अलावा रणवीर शौरी का कैरेक्टर भी इंट्रेस्टिंग रहने वाला है.
इस फिल्म को डायरेक्ट किया है दीपेश जैन ने. ये दीपेश की पहली फिल्म है. बावजूद इसके उनके काम की तारीफ हो रही है. उनका बनाया सिनेमा दुनिया घूम रहा है. मतलब डेब्यू बढ़िया हुआ है. हमें इन चीज़ों और फिल्म के बारे में विस्तार से पता चलेगा 7 सितंबर को.


फिल्म का ट्रेलर यहां देखें:



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