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जब 'छेल्लो शो' के डायरेक्टर ने अमिताभ बच्चन की फिल्म की रील चोरी कर ली थी

'छेल्लो शो' का ट्रेलर रिलीज़ हुआ है. जो सिनेमा के नाम लिखा गया एक प्रेम पत्र लगता है.

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डायरेक्टर पान नलिन ने 'छेल्लो शो' को अपने बचपन पर आधारित किया है.

‘छेल्लो शो’. इंडिया की 93वें ऑस्कर अवॉर्ड के लिए ऑफिशियल एंट्री. दुनियाभर के नामी फिल्म फेस्टिवल्स में घूम रही थी. अब आम पब्लिक के लिए सिनेमाघरों पर खुलने जा रही है. 14 अक्टूबर को. हालांकि उससे पहले फिल्म का ट्रेलर आया है. शुरुआत होती है उसकी एक बच्चे से. समय नाम का बच्चा. पिता को सिनेमा से खास लगाव नहीं. फिर भी एक दिन अपने परिवार को सिनेमा दिखाने शहर ले जाते हैं. 

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समय को उसी अंधेरे कमरे में मिलती है अपनी रोशनी. दोस्ती हो जाती है एक प्रोजेक्शनिस्ट से. प्रोजेक्शनिस्ट यानी जो सिनेमाघर में प्रोजेक्टर का काम संभालते हैं. बस वो बच्चा कच्ची उम्र में मोहब्बत कर बैठता है. परदे पर पड़ने वाली रोशनी से. वो रोशनी जो अपने साथ सिर्फ रंग नहीं लेकर आती. बल्कि उन रंगों में लपेटे लाती है कहानियां. हंसाने वाली कहानियां. रुलाने वाली कहानियां. जीवन बदल कर धर देने वाली कहानियां. प्रेम में डूबा इंसान उसके पार अपनी कोई दुनिया नहीं देखना चाहता. दुनिया में किसी और को खफा करने से नहीं घबराता. समय भी लोगों को निराश करता है. पिता को नाराज़ करता है. पुलिस के डंडे की चोट के नीचे आते-आते रहता है. 

जो सिनेमा समय की ज़िंदगी बदलता है. एक दिन वो खुद बदल जाता है. जब पता चलता है कि सिंगल स्क्रीन हॉल बंद होने वाला है. सेल्युलॉइड की जगह डिजिटल लेने वाला होता है. फिल्म के डायरेक्टर पान नलिन ने समय के ज़रिए अनेक बच्चों का अनुभव कैप्चर करने की कोशिश की है. वो बच्चे जिन्होंने फिल्मों में वो ढूंढा कि वो उनके लिए सिर्फ एंटरटेनमेंट का साधन नहीं रही. नलिन खुद ऐसे बच्चों में से एक थे. ‘छेल्लो शो’ के मेकर्स को अब ऑस्कर नॉमिनेशन के लिए शुभकामनाएं मिल रही हैं. लेकिन एक डायरेक्टर ने पहले ही बता दिया था कि ये फिल्म ऑस्कर्स के लिए जाएगी. 

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नलिन ने डीडी इंडिया से बात करते हुए बताया कि आशुतोष गोवारिकर ने ‘छेल्लो शो’ देखी. उन्हें कॉल किया. कहा कि बधाई हो! तुम ऑस्कर के लिए जा रहे हो. मैं आगे के प्रोसेस के बारे में सब कुछ बता दूंगा. नलिन को इतना सुनकर हंसी आई. लगा कि शायद मज़ाक कर रहे हैं. लेकिन अब एहसास हुआ कि आशुतोष ने फिल्म में क्या देख लिया था. फिल्म के ट्रेलर में पुलिस नज़र आती है. समय और उसके दोस्तों पर सख्ती बरतते हुए. फिल्म के इस सीन का पान नलिन की लाइफ से सीधा कनेक्शन है. 

नलिन इसी इंटरव्यू में बताते हैं कि फिल्म की तरह उन्होंने भी बचपन में एक प्रोजेक्शनिस्ट से दोस्ती कर ली थी. वो उसे अपना खाना देते. वो बदले में फिल्म देखने देता. प्रोजेक्शन रूम में जाने के बाद नलिन ने पहली बार फिल्म की रील देखी. तब दिमाग में हिट किया कि इन्हें तो वो पहले कहीं देख चुके हैं. रेलवे प्लेटफॉर्म्स पर. टीन के डिब्बों में. नलिन ने यही बात अपने दोस्तों को बताई. बस फिर पूरी टोली ने मिलकर ट्रेन से रील गायब करना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे ये कारवां बढ़ता गया. इतना कि अमिताभ बच्चन की फिल्म लगने वाली थी. और उसका 20 मिनट का एक्शन सीन पूरा गायब था.

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मामला सीरियस हुआ. पुलिस शामिल हुई और रील्स को ढूंढा गया. नलिन ने अपने बचपन के ऐसे ही पन्नों पर फिल्म को आधारित किया है. फिल्म का ट्रेलर अपने साथ फन किस्म की वाइब लिए चलता है. फिल्म में समय का रोल किया है भविन राबाड़ी ने. उनके साथ भावेश श्रीमली, ऋचा मीना और दिपेन रावल फिल्म की कास्ट का हिस्सा हैं. नलिन के यूट्यूब चैनल पर ट्रेलर के डिस्क्रिप्शन बॉक्स में एक लाइन लिखी है,

When you have nothing, nothing stops you. 

यानी जब आपके पास कुछ नहीं होता, तब आपको कुछ भी नहीं रोक सकता. सपने के एहसास और उसके पूरा होने की ये कहानी 14 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी.     

वीडियो: RRR की जगह ऑस्कर के लिए छेल्लो शो को क्यों भेजा?

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