मीडिया के बंधु ये जानना चाह रहे होंगे कि गेस्ट हाउस कांड के बाद भी सपा और बसपा गठबंधन कर चुनाव लड़ रहे हैं. मैं उनसे कहना चाहती हूं कि इस गठबंधन के एलान के समय मैं इसका जवाब दे चुकी हूं. फिर से वही दोहराकर मैं समय बर्बाद नहीं करना चाहती. देश हित में कठिन फैसले लेने पड़ते हैं.मायावती ने मुलायम सिंह यादव का भी कई बार जिक्र किया. उन्होंने कहा,
मुलायम सिंह यादव पिछड़ों के वास्तविक नेता हैं. पीएम नरेंद्र मोदी की तरह नकली नेता नहीं हैं. वह असली, जन्म से ही पिछड़े वर्गे के नेता हैं. जबकि मोदी के बारे में कहा जाता है कि सत्ता का दुरुपयोग कर अपनी जाति को पिछड़े वर्ग में शामिल कराया. अपने को पिछड़े वर्ग का बता कर सत्ता का लाभ उठाया. मुलायम सिंह को चुनकर जरूर भेजें. जिनकी विरासत के एकमात्र उत्तराधिकारी अखिलेश यादव पूरी ईमानदारी और निष्ठा से अपना कर्तव्य निभा रहे हैं.क्या है गेस्ट हाउस कांड 2 जून, 1995. ये तारीख यूपी के राजनीतिक इतिहास का एक काला दिन है. बात गेस्ट हाउस कांड की हो रही है. इस दिन मायावती लखनऊ में स्टेट गेस्ट हाउस में ठहरी हुई थीं. उन्होंने मुलायम सरकार से समर्थन वापस ले लिया था. नाराज़ सपा विधायक और कार्यकर्ताओं ने वहां हंगामा काट दिया. मायावती के साथ हाथापाई और बदसलूकी हुई. उनकी जान पर बन आई. उधर बीजेपी विधायकों को जब यह खबर लगी तो वह भी स्टेट गेस्ट हाउस पहुंच गए. पलड़ा बराबरी पर टिका तब मामला संभला.
मायावती के साथ हुए गेस्ट हाउस कांड पर शिवपाल ने कहा, मुझे जबरन फंसाया गया