महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की हाई प्रोफ़ाइल सीट माहिम (Mahim Assembly Results) पर कड़े मुकाबले के बाद फ़ैसला आ गया है. यहां से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे के बेट अमित ठाकरे चुनाव मैदान में थे. हालांकि वे 33,062 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे. उनसे आगे हैं शिवसेना के सदा सर्वंकर, जिन्हें 48,897 लोगों ने वोट दिया है. वहीं सबसे आगे हैं शिवसेना (उद्धव) के महेश बलिराम सावंत, जिन्हें 50,213 वोट मिले हैं. यानी महेश ने चुनाव में जीत दर्ज की है.
Mahim Election Results: राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे को शिवसेना उम्मीदवार की जिद ले डूबी
Maharashtra Assembly Election में Mahim की सीट पर राज ठाकरे के बेटे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के उम्मीदवार Amit Thackeray मैदान में हैं. उनके ख़िलाफ़ शिव सेना (UBT) के उम्मीदवार Mahesh Sawant और शिव सेना(शिंदे गुट) के उम्मीदवार Sada Sarvankar हैं.


यानी माहिम में कांटे की टक्कर रही शिवसेनाओं के उम्मीदवारों के बीच. महेश सावंत ने 1316 वोटों से ये टक्कर जीत ली. वोटों की गिनती के दौरान महेश सावंत मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में पूजा करने पहुंचे थे. वहां से निकलते वक़्त महेश ने न्यूज़ एजेंसी PTI से बात की. इस दौरान उन्होंने कहा,
मैं आराम से चुनाव जीत जाऊंगा. मैं सदा सर्वंकर और अमित ठाकरे को कोई चुनौती नहीं मानता. मैं जानता हूं कि सदा सर्वंकर हमारी वजह से चुने गए, हम चुनाव के दौरान उनके लिए दिन-रात काम करते थे. वो बस कुर्सी पर बैठते थे.
माहिम मुंबई की ही एक सीट है. बता दें, अमित ठाकरे की पार्टी BJP के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन से जुड़ी हुई है. हालांकि, शिवसेना (शिंदे गुट) उम्मीदवार सदा सर्वंकर ने उनके ख़िलाफ़ पीछे हटने से इनकार कर दिया था. अब चुनाव परिणाम बता रहे हैं कि वे अपने साथ अमित ठाकरे की चुनावी नैया भी ले डूबे हैं. सदा सर्वंकर ने 2014 और 2019 में माहिम निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीता था.
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बताते चलें, अपने चचेरे भाई और उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे के विपरीत, अमित ठाकरे ज़्यादातर सुर्खियों से दूर रहे हैं. अमित के पिता राज ठाकरे ने कभी चुनाव नहीं लड़ा है. इसलिए राजनीति में उनकी एंट्री को परिवार की राजनीतिक विरासत को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा था.
2019 के विधानसभा चुनावों में राज ठाकरे ने वर्ली से कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था, क्योंकि उस समय शिवसेना नहीं टूटी थी और पार्टी ने आदित्य ठाकरे को मैदान में उतारा था. ऐसे में अमित ने कहा था कि उन्हें भी उम्मीद थी कि शिवसेना(UBT) से कोई चुनाव नहीं लड़ेगा. लेकिन शिवसेना (उद्धव) ने उम्मीदवार उतारा, जो जीत चुके हैं.
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