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थलापति विजय ने 'किनारे' मिला दिए? नई सरकार को लेकर DMK-AIADMK में बातचीत का दावा

यूं तो DMK और AIADMK दोनों की जड़ें एक ही रही हैं. लेकिन राज्य की सियासत में लगभग पिछले पचास सालों से एक दूसरे की प्रतिद्वंद्वी रही हैं. दोनों को राज्य की सियासत के दो ध्रुवों के तौर पर देखा जाता है. ऐसे में दोनों के बीच बातचीत की शुरुआत एक बेहद दुर्लभ राजनीतिक अवसर है.

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स्टालिन की डीएमके और पलानीसामी की एआईडीएमके के बीच बातचीत शुरू हुई है. (इंडिया टुडे)

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  • तमिलनाडु में DMK और AIADMK के बीच सरकार बनाने को लेकर बैकडोर बातचीत शुरू हो गई है, जबकि दोनों पार्टियां इस चुनाव में क्रमशः 59 और 47 सीटें जीत चुकी हैं।
  • AIADMK के संस्थापक MGR ने 1972 में DMK से अलग होकर पार्टी बनाई थी, जो तमिलनाडु की राजनीति में दोनों पार्टियों के बीच लंबे समय से प्रतिद्वंद्विता की वजह बनी।
  • DMK और AIADMK की बातचीत का परिणाम सरकार गठन पर असर डालेगा, क्योंकि दोनों मिलकर भी बहुमत के लिए आवश्यक 118 सीटों तक नहीं पहुंच पाते।

तमिलनाडु में सरकार बनाने की लड़ाई रोचक होती जा रही है. राज्य की सबसे बड़ी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम बहुमत जुटाने की जद्दोजहद में जुटी है. उनको कांग्रेस का समर्थन भी मिला है. इस बीच चिर प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाली DMK और AIADMK के बीच भी सरकार बनाने को लेकर बैकडोर बातचीत शुरू हो चुकी है.

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यूं तो DMK और AIADMK दोनों की जड़ें एक ही रही हैं. लेकिन राज्य की सियासत में लगभग पिछले पचास सालों से एक दूसरे की प्रतिद्वंद्वी रही हैं. दोनों को राज्य की सियासत के दो ध्रुवों के तौर पर देखा जाता है. ऐसे में दोनों के बीच बातचीत की शुरुआत एक बेहद दुर्लभ राजनीतिक अवसर है. 

इंडिया टुडे के मुताबिक, AIADMK से जुड़े सूत्रों ने इस बातचीत की पुष्टि की है. हालांकि अभी तक इस बातचीत के किसी भी नतीजे तक पहुंचने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. 

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अब बड़ा सवाल है कि क्या DMK राज्य की सियासत में बदलाव की एक नई इबारत लिखने को तैयार है. इस चुनाव में DMK को 59 और AIADMK को 47 सीटें मिली हैं. AIADMK और DMK अगर साथ आते हैं, फिर भी सरकार बनाने की डगर उनके लिए आसान नहीं होगी. दोनों को मिलाकर भी 106 विधायक होंगे. जबकि बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 सीट है.

DMK और AIADMK दोनों पार्टियां द्रविड़ आंदोलन की ही देन हैं. साल 1972 में एमजी रामचंद्रन (MGR) ने DMK से अलग होकर AIADMK का गठन किया था. तत्कालीन मुख्यमंत्री करुणानिधि और MGR के बीच सरकार और पार्टी में वर्चस्व को लेकर खींचतान चल रही थी. MGR ने करुणानिधि और दूसरे DMK नेताओं से उनकी संपत्ति की डिटेल पब्लिक करने की मांग की थी. इससे नाराज करुणानिधि ने MGR को पार्टी से बाहर कर दिया.  

पार्टी से निकलने के बाद MGR ने AIADMK का गठन किया. इसके बाद से तमिलनाडु की सियासत इन्हीं दो पार्टियों के इर्द गिर्द घूमती रही है. एक्टर विजय ने इस बार इन दोनों पार्टियों की मोनोपॉली तोड़ दी है. शायद इससे घबरा कर ही दोनों पार्टियां एक साथ आने के लिए बातचीत कर रही है. अब देखना है कि उनकी बातचीत परवान चढ़ पाती है या नहीं. और क्या दोनों मिलकर विजय को सरकार बनाने से रोक पाते हैं?

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वीडियो: तमिलनाडु में TVK किसके साथ सरकार बनाएगी?

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