कर्नाटक में बीजेपी के दिग्गज नेता और पार्टी के महासचिव सीटी रवि हार गए हैं. रवि, राज्य की चिकमगलूर सीट से उम्मीदवार थे. वो 2004 से इस से लगातार चुनकर विधायक बनते आए हैं. लेकिन 4 बार के MLA इस बार अपनी सीट नहीं बचा पाए. रवि को कांग्रेस के एचडी थमइया ने करीब 6 हजार से ज्यादा वोटों से हराया. हालांकि खबर लिखे जाने तक चुनाव आयोग ने चिकमगलूर सीट के नतीजे घोषित नहीं किए हैं. अबतक आए नतीजों के मुताबिक थमइया को 67 हजार से ज्यादा वोट मिले. जबकि सीटी रवि 61 हजार का आंकड़ा नहीं पार कर पाए.
'टीपू सुल्तान को वोक्कलिगा योद्धाओं ने मारा' कहने वाले सीटी रवि का चुनाव में क्या हाल हुआ?
बीजेपी को ऐसी उम्मीद नहीं थी.


चिकमगलूर सीट पर जेडीएस का काफी बुरा हाल रहा. जेडीएस के बीएम तिम्मा शेट्टी 1500 वोट भी नहीं जुटा पाए. इस सीट पर कई निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा. हालांकि किसी भी निर्दलीय को 400 वोट भी नहीं मिल पाए. हालांकि 700 से ज्यादा लोगों ने नोटा का बटन दबाया.
कौन हैं सीटी रवि?सीटी रवि राज्य के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं. रवि, बीएल संतोष के खेमे के नेता माने जाते हैं. बीएल संतोष बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव हैं और पार्टी आलाकमान में उन्हें गिना जाता है. यही वजह है कि सीटी रवि राज्य में प्रभावशाली नेता माने जाते हैं.
रवि राज्य के वोक्कलिगा समाज से आते हैं. हालांकि वोक्कलिगा समाज में उनका इतना प्रभाव नहीं दिखता. बीजेपी लंबे समय से वोक्कलिगा समाज को अपने खेमे में शामिल करने की कोशिश में है. हालांकि अब तक ऐसी सफलताएं नहीं मिलती दिखी.
सीटी रवि उस दौरान चर्चा में आए थे जब मार्च में उन्होंने टीपू सुल्तान की मौत पर विवादित बयान दिया था. उन्होंने इस बात का समर्थन किया था कि दो वोक्कलिगा उरी गौड़ा और नान्जे गौड़ा ने टीपू सुल्तान को मारा था.
सीटी रवि तब भी चर्चा में आए जब उन्होंने कहा कि किसको टिकट मिलेगा इसका फैसला किसी के किचन में नहीं होगा. उन्होेंने ये भी कहा किसी को सिर्फ इस बात पर टिकट नहीं मिलेगा कि वो किसी का बेटा है. रवि येदियुरप्पा के विरोधी खेमे के नेताओं में गिने जाते हैं.
किसको कितनी सीटें मिलीं
खबर लिखे जाने तक आए अपडेट के मुताबिक कांग्रेस ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. कांग्रेस 114 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है. और फिलहाल 22 सीटों पर आगे चल रही है. इधर बीजेेपी को तगड़ा झटका लगा है. सत्ताधीश पार्टी की चुनाव में बुरी हार हुई. बीजेपी सिर्फ 65 से भी कम सीटें पर सिमटती दिख रही है. वहीं इस चुनाव में जेडीएस का और भी बुरा हाल है. देवगौड़ा की पार्टी को इस सिर्फ 20 सीटें मिलती दिख रही है.
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