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डॉलर के मुकाबले रुपया हुआ कमजोर, अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा

वेस्ट एशिया में चल रही जंग और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय करेंसी पर भी पड़ा है. पहली बार भारतीय रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सबसे निचले स्तर पर आ गया है.

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अमेरिका-ईरान जंग शुरू होने के बाद से भारतीय रुपया करीब 2% तक टूट चुका है. (सांकेतिक फोटो: आजतक)

भारतीय रुपया पहली बार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सबसे निचले स्तर पर आ गया है (Rupee Low Against Dollar). शुक्रवार, 20 मार्च को रुपया 19 पैसे टूटकर 93 रुपये प्रति डॉलर के पार पहुंच गया. वेस्ट एशिया में चल रही जंग और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय करेंसी पर भी पड़ा है. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग शुरू होने के बाद से यह करीब 2% तक टूट चुका है. 

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 93.15 रुपये पर आ गया. इससे पहले 18 मार्च को रुपया 92.63 के रिकॉर्ड लो पर बंद हुआ था. निवेशकों ने वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव पर प्रतिक्रिया दी है. कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने लगीं. इस वजह से रुपये को ज्यादा नुकसान हुआ.

रुपया क्यों कमजोर हुआ?

इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है, जो भारत के लिए एक बड़ी चिंता है. भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इम्पोर्ट करता है. डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से भारत में महंगाई तेजी से बढ़ेगी. तेल की ज्यादा कीमतों से देश का इम्पोर्ट बिल बढ़ता है, डॉलर की डिमांड बढ़ती है और रुपये पर दबाव पड़ता है. 

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इसके साथ ही, दुनिया भर में 'रिस्क-ऑफ' (जोखिम से बचने का) माहौल बन गया है, जिससे इनवेस्टर्स अमेरिकी डॉलर की तरफ रुख कर रहे हैं. इससे डॉलर मजबूत हुआ है और रुपये पर दबाव पड़ा है. इस बीच, विदेशी फंड, बैंक और निवेशक भारतीय कंपनियों के शेयर बड़ी मात्रा में बेचकर पैसा बाहर ले जा रहे हैं. इससे दबाव और बढ़ गया है. जब ग्लोबल फंड्स पैसे निकालते हैं, तो वे रुपए को डॉलर में बदल देते हैं, जिससे करेंसी की गिरावट तेज हो जाती है.

अमेरिकी डॉलर की मजबूती की वजह से ग्लोबल इकॉनमी में निवेश (पैसा) की कमी हो रही है, जिससे भारत जैसे विकासशील देशों के शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक दबाव पड़ रहा है. 

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इस वक्त शेयर बाजार बहुत संवेदनशील स्थिति में है. निवेशकों की नजर तीन चीजों पर है. पहली, वेस्ट एशिया में तनाव बढ़ने से बाजार में गिरावट का डर है. दूसरी, अगर युद्ध के कारण कच्चा तेल महंगा हुआ तो भारत में महंगाई बढ़ सकती है. और तीसरी, डॉलर के मुकाबले रुपये को बहुत ज्यादा गिरने से बचाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) क्या कदम उठाता है. इन तीनों मोर्चों पर आने वाली खबरें ही आने वाले दिनों में तय करेंगी कि बाजार ऊपर जाएगा या नीचे.

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