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इनकम टैक्स के नियम आज से बदल गए, नौकरी करने वालों को सब समझना पड़ेगा

नए आयकर कानून में कंप्लायंसेज (अनुपालन) का बोझ कम किया गया है. आयकर अधिनियम, 2025 को इस तरह बनाया गया है कि टैक्स सिस्टम आसान और समझने लायक हो सके. इसका मकसद है कि लोगों को टैक्स भरने में कम झंझट हो, नियम साफ-साफ समझ आएं और अलग-अलग बिखरे नियमों को एक जगह सरल तरीके से रखा जाए.

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नए आयकर नियमों के तहत HRA में छूट पाने वाले शहरों की लिस्ट बढ़ा दी गई है (फोटो क्रेडिट : India Today)

1 अप्रैल 2026 से इनकम टैक्स नियमों में कई जरूरी बदलाव लागू हो रहे हैं. जैसे नया आयकर कानून लागू हो रहा है. आईटीआर की समय-सीमा बदल रही है. एक अप्रैल से इनकम टैक्स से जुड़े कौन से नियम कायदे बदल रहे हैं इन्हें विस्तार से जान लेते हैं.

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आयकर कानून आज से लागू 

आयकर अधिनियम 2025 पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेगा. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आपको अभी भी मौजूदा इनकम टैक्स एक्ट 1961 के हिसाब से ही आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करना होगा. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है.

 इकोनॉमिक टाइम्स की एक खबर बताती है कि नए आयकर कानून में कंप्लायंसेज (अनुपालन) का बोझ कम किया गया है. आयकर अधिनियम, 2025 को इस तरह बनाया गया है कि टैक्स सिस्टम आसान और समझने लायक हो सके. इसका मकसद है कि लोगों को टैक्स भरने में कम झंझट हो, नियम साफ-साफ समझ आएं और अलग-अलग बिखरे नियमों को एक जगह सरल तरीके से रखा जाए. फाइनेंशियल ईयर और एसेसमेंट ईयर जैसे शब्दों की जगह पर अब 'टैक्स ईयर' शब्द का प्रयोग किया जाएगा. इसका मकसद टैक्सपेयर्स के बीच किसी तरह के कंफ्यूजन को कम करना है.

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इनकम टैक्स रिटर्न की नई समय-सीमा

इस साल आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की समय सीमा में मामूली बदलाव किया गया है. ITR-1 या ITR-2 भरने वाले व्यक्तियों के लिए समय सीमा 31 जुलाई ही रहेगी, इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है. हालांकि, जिन्हें ऑडिट कराना जरूरी नहीं है उनके लिए आईटीआर-3 और आईटीआर-4 दाखिल करने की समय सीमा 31 अगस्त तक बढ़ा दी गई है.

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HRA क्लेम में बदलाव 

टैक्सपेयर्स को किराया चुकाते समय फॉर्म संख्या 124 (फॉर्म संख्या 12BB के अनुरूप) में अपने मकान मालिक के साथ अपने रिश्तों का खुलासा करना होगा, विशेषकर तब जब मकान मालिक रिश्तेदार हो. कर्मचारियों को अब किराए के भुगतान के सही प्रमाण के साथ अपने मकान मालिक का पैन नंबर देना होगा. कुछ मामलों में, एचआरए का दावा करते समय पैन नंबर और किराए की रकम सहित मकान मालिक की पूरी जानकारी देना जरूरी है.

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HRA छूट का दायरा बढ़ा 

नए आयकर नियमों के तहत, मकान किराया भत्ता (एचआरए) में छूट पाने वाले शहरों की लिस्ट बढ़ा दी गई है. अब तक, केवल मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता ही मूल वेतन पर 50% एचआरए छूट के लिए पात्र थे. अब हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु भी इसमें शामिल हो गए हैं. अगर आप इन 8 शहरों में से किसी में भी रहते हैं, तो आप अन्य जगहों की तुलना में अधिक टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं.

मील कार्ड पर टैक्स छूट

सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए अब एक बड़ी राहत आई है. अगर आपको ऑफिस से मील कूपन, मील वाउचर, मील कार्ड (जैसे Sodexo/Pluxee, Zaggle) या कैंटीन में सब्सिडी वाला खाना मिलता है, तो अब आप इस पर सालाना 1.05 लाख रुपये तक का टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं. 

यह छूट पुराने (Old Tax Regime) और नए (New Tax Regime) दोनों में मिलेगी. अब तक मील कूपन, वाउचर या कैंटीन में मिलने वाले खाने पर टैक्स छूट प्रति मील 50 रुपये तक ही सीमित थी. यानी अगर आपका ऑफिस आपको दिन में 2 बार खाना देता था और हर मील की कीमत 50 रुपये थी (कुल 100 रुपये), तो यही 100 रुपये तक की राशि ही टैक्स से छूट के दायरे में आती थी.

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बच्चों की पढ़ाई और छात्रावास भत्ता

1 अप्रैल से बच्चों की शिक्षा भत्ते (education allowance) को 100 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह प्रति बच्चा (2 बच्चों तक) कर दिया गया है. इसी तरह से छात्रावास भत्ते (hostel allowance) को 300 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये प्रति माह प्रति बच्चा कर दिया गया है . छात्रावास में रहने वाले दो बच्चों के माता-पिता के लिए, इससे अकेले ही सालाना छूट में 2.16 लाख रुपये की वृद्धि होगी, जबकि पहले यह केवल 7,200 रुपये थी.

विदेशी यात्राओं पर TCS से राहत

विदेशी यात्राओं पर लगने वाले स्रोत-आधारित कर (TCS) में कमी की गई है. इससे अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को राहत मिली है. पहले 10 लाख रुपये तक के टूर पैकेज पर 5% और उससे ज्यादा की रकम पर 20% TCS लगता था. अब कुल टूर लागत पर केवल 2% TCS लागू होगा. इसी तरह, विदेश में शिक्षा और इलाज के लिए भेजे गए पैसे पर भी TCS में कमी की गई है. 10 लाख रुपये से ज्यादा की राशि पर 5% से घटाकर केवल 2% कर दिया गया है. इससे विदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल का खर्च थोड़ा कम हो गया है.

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रिवाइज रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ी

टैक्सपेयर्स को अब रिवाइज रिटर्न भरने का ज्यादा वक्त मिलेगा. पहले अंतिम तिथि 31 दिसंबर (9 महीने) थी, अब नई तिथि 31 मार्च (12 महीने) है, यानी 3 महीने का अतिरिक्त समय. 31 दिसंबर के बाद दाखिल करने पर अतिरिक्त शुल्क लगेगा. हालांकि विलेटेड रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तिथि में कोई बदलाव नहीं हुआ है.

पैन नियमों में बदलाव

PAN से जुड़े नियमों में अब बड़ा बदलाव किया गया है. अब सिर्फ आधार के जरिए PAN बनवाना संभव नहीं होगा. इसके बजाय अलग-अलग श्रेणियों के अनुसार नए फॉर्म लागू किए गए हैं जैसे व्यक्तियों के लिए Form 93, व्यवसायों के लिए Form 94, विदेशी व्यक्तियों के लिए Form 95 और विदेशी कंपनियों के लिए Form 96. पहले इस्तेमाल होने वाला Form 49A अब Form 93 में बदल दिया गया है. साथ ही, बड़े लेन-देन में PAN देना अनिवार्य कर दिया गया है, जैसे 10 लाख रुपये या उससे अधिक का कैश जमा या 20 लाख रुपये या उससे अधिक की प्रॉपर्टी डील. 

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