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कर्ज में दबे मिडिल क्लास के लोग कैसा जीवन जी रहे? ये रिपोर्ट पढ़ दिल बैठ जाएगा

जब सैलरी किस्त भरने में खत्म हो जाती है, तो कई लोग पुराने कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज ले लेते हैं. इस तरह वे उधार के एक ऐसे चक्र में फंस जाते हैं जिससे निकलना मुश्किल होता है.

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85% लोग अपनी मासिक आय का 40% से ज्यादा हिस्सा सिर्फ EMI चुकाने में खर्च कर रहे हैं (फोटो क्रेडिट: PTI)

देश के लाखों परिवार कर्ज के जाल में फंसे हैं. कई लोग ऐसे हैं जिनके खाते में सैलरी आते ही EMI (लोन की किस्त) कट जाती है. कुछ पैसा क्रेडिट कार्ड का बिल भरने में चला जाता है. जिन लोन ऐप्स से इन लोगों ने कर्ज लिया है उनकी तरफ से रिमाइंडर मोबाइल पर आने लगते हैं. हालत ये हो जाती है कि महीना खत्म होने से पहले ही पूरी सैलरी साफ हो चुकी होती है. इस तरह से घर चलाने के लिए बहुत कम रकम बचती है. यह कहानी अंधाधुंध खर्च की नहीं है बल्कि ये बताती है कि आसान लोन किस तरह से कर्ज के जाल में जकड़ रहा है. पहले ज्यादातर लोग कर्ज आर्थिक तंगी और इमरजेंसी जरूरत पर कर्ज लेते थे. लेकिन फिलहाल इस तरह के लोन लोगों पर आर्थिक बोझ बन रहे हैं.

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इंडिया टुडे के पत्रकार कौस्तव दास की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ये कर्ज संकट लगातार बढ़ रहा है. पहले लोग कभी-कभार कर्ज लेते थे, लेकिन अब महीने की जरूरतें भी कर्ज से ही पूरी हो रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक 'एक्सपर्ट पैनल' (Expert Panel) के एक सर्वे में इस पूरे कर्ज संकट की तस्वीर पेश की गई है. एक्सपर्ट पैनल एक कर्ज समाधान कंपनी है. यह कंपनी उन लोगों की मदद करती है जो कर्ज के जाल में फंसे हैं.

40% सैलरी EMI भरने में साफ हो जाती है

इस सर्वे में कहा गया है कि 85% लोग अपनी मासिक आय का 40% से ज्यादा हिस्सा सिर्फ EMI चुकाने में खर्च कर रहे हैं. जून 2025 से दिसंबर 2025 के बीच किया गया यह सर्वे कर्ज के जाल में फंसे देशभर के 10,000 लोगों से मिली जानकारी पर आधारित है.  

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सर्वे के मुताबिक कई परिवारों में, भोजन, किराया, परिवहन, स्कूल फीस या चिकित्सा खर्चों को शामिल करने से पहले ही लगभग आधी तनख्वाह खर्च हो जाती है. खासकर 35 हजार से 65 हजार रुपये कमाने वाले मिडिल क्लास और लोअर मिडिल क्लास के लोग 28 से 52 हजार रुपये तक EMI भरने को मजबूर हैं. इस स्थिति में बजट बनाना अपनी पसंद का मसला नहीं, बल्कि किसी तरह गुजर-बसर का जरिया बन चुका है. 

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पुराने कर्ज को निपटाने के लिए नया कर्ज 

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जब सैलरी किस्त भरने में खत्म हो जाती है, तो कई लोग पुराने कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज ले लेते हैं. इस तरह वे उधार के एक ऐसे चक्र में फंस जाते हैं जिससे निकलना मुश्किल होता है. सर्वे के मुताबिक करीब 40% लोग खर्च चलाने के लिए क्रेडिट कार्ड बदलते रहते हैं. 22% लोग अपने दोस्त-रिश्तेदारों पर निर्भर हो जाते हैं. यह राहत कुछ महीनों के लिए मिलती है, लेकिन ब्याज का बोझ बढ़ता जाता है और कर्ज के जाल में फंसते जाते हैं.

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'पेट काटने' को मजबूर लोग?

EMI के फेर में फंसे इन परिवारों को कई चीजों का त्याग करने के लिए मजबूर होना पड़ता है. सर्वे में शामिल करीब 65% लोगों ने जरूरी खर्चों में कटौती की है जैसे कि बच्चों की पढ़ाई छुड़ाना, ट्यूशन की क्लास बंद करना, इलाज टालना, बीमा बंद करना और खाने-पीने में कमी करना आम हो गया है. हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि 16% लोगों को सैलरी एडवांस लेना पड़ता है. 15% को अपने गहने, शेयर, म्यूचुअल फंड प्रॉपर्टी तक बेचनी पड़ती है.

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समय पर EMI न भरने पर उत्पीड़न

जब लोग EMI समय पर नहीं चुका पाते हैं तो लोन रिकवरी एजेंट बदसलूकी करते हैं. सर्वे में बताया गया है कि 67% कर्जदाताओं को बार-बार अपमानजनक कॉल आए. कई लोगों को महीने में 50 से 100 से ज्यादा फोन कॉल मिले. ये फोन कॉल सुबह-सुबह या रात-बिरात कभी भी आते थे. आमतौर पर सुबह 6 बजे से 8 बजे के बीच और शाम 8 बजे से 10 बजे के बीच. वहीं धमकी भरे SMS और व्हाट्सऐप मैसेज भी खूब मिले. कुछ मामलों में तो लोन रिकवरी एजेंट घर या दफ्तर लोन वसूलने के लिए पहुंच गए. कुल मिलाकर हर तरह से बेइज्जती झेलनी पड़ी.

इसके चलते कर्ज लेने वाले आधे से ज्यादा लोगों ने चिंता, नींद न आना, डिप्रेशन, पारिवारिक तनाव और कामकाज पर बुरा असर पड़ने की बात कही है. कर्ज के जाल में फंसे कुछ लोगों ने आत्महत्या करने की सोचने जैसी बात भी बताई. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 'Buy Now Pay Later' इंस्टेंट लोन ऐप्स और बिना गारंटी वाले पर्सनल लोन तेजी से बढ़े हैं. इसके चलते लोग कर्ज के जाल में तेजी से फंस रहे हैं. 

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