राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की तरफ से 12 सितंबर को औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़े जारी किये गए. आंकड़ों के अनुसार, जुलाई, 2022 में लगभग सभी क्षेत्रों की बढ़ोतरी धीमी रही. औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production) की बढ़ोतरी दर चार महीने के सबसे निचले स्तर 2.4 फीसदी पर पहुंच गई है. जबकि पिछले साल जुलाई में ये दर 12.7 फीसदी थी. अनुकूल आधार प्रभाव, धीमी निर्यात मांग और भारी मानसून को आई कमी का कारण बताया जा रहा है.
जुलाई में धीमी पड़ गई औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार, चार महीने में सबसे खराब प्रदर्शन
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की बढ़ोतरी चार महीने के सबसे निचले स्तर 2.4 फीसदी पर पहुंच गई है.


हालांकि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक अभी भी महामारी के पूर्व स्तर (जुलाई 2019 में) के मुकाबले 2.1 फीसदी अधिक है. लेकिन इसमें महीने-दर-महीने के आधार पर 2.7 फीसदी की गिरावट आई है.
इंडिया रेटिंग्स के अनुसार, मौसमी- समायोजित आधार पर, इंडस्ट्रीज के उत्पादन में महीने-दर-महीने 0.75 फीसदी की गिरावट आई, जबकि पिछले महीने ये 0.35 फीसदी थी. हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए PMI (Purchasing Manager’s Index) विपरीत रहा, जो जुलाई में 56.4 की रीडिंग के साथ विस्तार क्षेत्र में मज़बूती से बना रहा.
क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डी के जोशी ने कहा कि वैश्विक विकास दर में नरमी का असर घरेलू विनिर्माण पर पड़ने लगा है. उन्होंने कहा,
“कपड़ा, पेट्रोलियम उत्पाद, मशीनरी और उपकरण जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में जुलाई में आईआईपी में क्रमिक गिरावट देखी गई. अगले 12 महीनों में इसमें तेज़ी आ सकती है, क्योंकि स्ट्रिक्ट मॉनेटरी पॉलिसी और बढ़ी हुई महंगाई दर से प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ रहा है.”
जोशी ने कहा कि स्थानीय मांग ने भी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को समर्थन नहीं दिया है. टिकाऊ वस्तुओं की वृद्धि जुलाई में घटकर 2.4 फीसदी रह गई, जो पिछले महीने में 25.1 फीसदी थी. और गैर टिकाऊ उत्पादन, अगस्त में 2 फीसदी से सिकुड़ गया, जबकि इसमें पिछले महीने में 3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी. इन आकड़ों से ये पता लगता है की ग्रामीण खपत में लगातार कमज़ोरी आ रही है. वही पूंजीगत वस्तुओं (Capital goods) का उत्पादन भी 29.1 फीसदी से 5.8 फीसदी धीमा हो गया.
जुलाई में मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ पिछले महीने के 13 फीसदी से घटकर 3.2 फीसदी पर आ गई है. बिजली क्षेत्र में पिछले महीने के 12.7 फीसदी के मुकाबले 2.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. चुनिंदा क्षेत्रों में भारी वर्षा के कारण खनन जुलाई में 3.3 फीसदी घट गया. कोयले के उत्पादन में 11.4 फीसदी की वृद्धि होने के बावजूद माइनिंग में कमी देखी गई है.
(ये स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहीं शिवानी ने लिखी है.)
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