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इंडियन इकॉनमी बहुत तेजी से बढ़ने वाली थी, अब इस बड़ी एजेंसी ने रफ्तार क्यों घटा दी?

गोल्डमैन सैश ने कैलेंडर ईयर 2023 के लिए इंडियन इकॉनमी की ग्रोथ रेट घटाकर 5.9 फीसदी कर दी है. पहले ये अनुमान 6.9 फीसदी था.

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सांकेतिक तस्वीर.

अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैश (Goldman Sachs) ने 2023 में भारत की आर्थिक विकास दर (GDP) 5.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया है. इससे पहले ब्रोकरेज कंपनी ने कैलेंडर ईयर 2023 में जीडीपी ग्रोथ 6.9 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था. न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग में 13 नवंबर को छपी रिपोर्ट में गोल्डमैन के इकॉनमिस्ट एंड्रयू टिल्टॉन ने भारत के लिए विकास दर का यह अनुमान लगाया है. 

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गोल्डमैन सैश ने जीडीपी ग्रोथ के अनुमान का कम करते हुए अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था, जो बीते वित्त वर्ष में सबसे तेजी से बढ़ी अर्थव्यवस्था रही थी, उसकी रफ्तार सुस्त पड़ने के पीछे की वजह मंहगा कर्ज और कोरोना महामारी के साइडइफेक्ट्स हैं.

‘6 महीने धीमी रहेगी ग्रोथ रेट’

अमेरिकी निवेश बैंक ने रिपोर्ट में कहा कि पहले 6 महीनों में ग्रोथ की रफ्तार धीमी रहेगी, क्योंकि कोरोना के बाद सरकार की तरफ से जिस रफ्तार से प्रोत्साहन पैकेज दिए जा रहे थे, वो कम हो रहे हैं और मॉनेटरी पॉलिसी में सख्ती से घरेलू मांग पर असर पड़ा है. वहीं, अगले छह महीनों में ग्रोथ में दोबारा तेजी आएगी, क्योंकि वैश्विक स्तर पर आर्थिक ग्रोथ में रिकवरी होगी. 

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गोल्डमैन सैश को उम्मीद है कि मुख्य महंगाई की दर अगले साल घटकर 6.1 फीसदी पर पहुंच जाएगी. इस साल इसके 6.8 फीसदी पर रहने की उम्मीद है. महंगाई पिछले दस महीनों से रिजर्व बैंक निर्धारित 6 फीसदी के लक्ष्य के स्तर से ज्यादा रही है.

जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में भी महंगाई तय आंकड़े से ज्यादा रहने की उम्मीद है. कोरोना महामारी के बाद वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर उभरा था. लेकिन मौजूदा साल में बिगड़े अंतरराष्ट्रीय हालात मसलन रूस एवं यूक्रेन युद्ध, बढ़ती महंगाई और भारी राजकोषीय व व्यापार घाटा की वजह से फिर से 8.7 फीसदी की आर्थिक विकास दर को दोहाराना मुमकिन नजर नहीं आ रहा है. आपको बता दें कि भारत की आर्थिक विकास दर (जीडीपी) वित्त वर्ष 2021-22 में 8.7 फीसदी की दर से बढ़ी थी. 

वीडियो: कोरोना के बाद जीडीपी की रिकवरी दहाई का आंकड़ा छुएगी ?

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