1 फरवरी 2026 को संसद में बजट पेश होने से पहले भारत में तंबाकू पदार्थों की ‘अर्थव्यवस्था’ का हुलिया बदल गया. सोशल मीडिया पर तो ये भी चलने लगा कि जो सिगरेट अब तक 18 रुपये की मिलती थी, वो अब ‘70 से 72 रुपये’ की मिलेगी. आखिर ऐसा क्या हो गया कि जिस सिगरेट, तंबाकू का वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में नाम भी नहीं लिया, उसके दाम रबड़ वाली गेंद की तरह उछलकर आसमान में चला गया?
नया टैक्स लगने के बाद सिगरेट पियेंगे तो दिमाग 'फुंक' जाएगा!
1 फरवरी 2026 से सिगरेट पर नया टैक्स स्लैब लागू हो जाएगा. साल 2017 में जब से एक देश एक कर वाला जीएसटी लागू हुआ है, तबसे सिगरेट पर कर नहीं बढ़ाया गया था.
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आप राहत की सांस ले पाएं, इसके लिए पहले तो ये साफ कर दें कि सिगरेट की एक स्टिक के दाम 72 रुपये तक बढ़ने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. यह सिर्फ एक अनुमान है जो GST और एक्साइज ड्यूटी के जोड़ से तमाम ‘सोशल मीडिया गणितज्ञ’ अपने हिसाब से लगा रहे हैं. लेकिन ये बात सच है कि सिगरेट और तंबाकू के दाम बढ़ने तो वाले हैं और इतने ज्यादा बढ़ेंगे कि हर कश पर आपको महसूस होगा कि आपकी सांसों के साथ सिगरेट के धुओं के छल्ले ही नहीं उड़ रहे, बल्कि सैलरी भी धुएं की तरह उड़ी जा रही है.
ये सब उसी दिन तय हो गया था, जब दिसंबर 2025 में संसद में केंद्र सरकार ने सेंट्रल एक्साइज (अमेंडमेंट) बिल, 2025 और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025 पेश किया था. इसका मेन टारगेट सिगरेट और तंबाकू प्रोडक्ट्स थे. दोनों ही बिल्स को राज्यसभा और लोकसभा दोनों जगहों पर पास करा लिया गया था. इसके बाद से ही तय हो गया था कि तंबाकू उत्पादों, पान मसाला और सिगरेट के दाम बढ़ेंगे. हालांकि, ये कानून 1 फरवरी 2026 से लागू हुआ है, इसलिए आज ये फिर से चर्चा में है.
साल 2017 में जब से एक देश एक कर वाला GST लागू हुआ है, तब से सिगरेट पर कर नहीं बढ़ाया गया था. ‘सिन गुड्स’ माने जाने वाले नशीले उत्पादों पर 2017 से अब तक 28% GST और अलग से कंपंसेशन सेस लगता था. लेकिन 1 फरवरी 2026 से उसकी जगह अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी और हेल्थ सेस ने ले ली है. यानी 1 फरवरी से सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लगेगी और पान मसाला पर हेल्थ सेस लगेगा. ये सब सबसे ऊंची 40% की GST दर के ऊपर लगेगा.
यानी, प्रोडक्ट की कीमत+ 40% GST + एक्साइज ड्यूटी (+ पान मसाला के केस में हेल्थ सेस भी)
इतना ही नहीं, 1 फरवरी से तंबाकू उत्पादों जैसे- चबाने वाला तंबाकू, फिल्टर खैनी, जर्दा, सुगंधित तंबाकू और गुटखा के लिए MRP आधारित नया सिस्टम लागू होगा. यानी पैकेट पर लिखी खुदरा कीमत के आधार पर ही GST तय होगी. अब तक GST प्रोडक्ट की फैक्टी लागत पर लगती थी.
नए कर प्रावधानों के बाद पान मसाला पर हेल्थ और राष्ट्रीय सुरक्षा सेस उत्पादन क्षमता के आधार पर लगेगा, लेकिन कुल टैक्स (GST समेत) 88% ही रहेगा. वहीं, चबाने वाले तंबाकू और जर्दा पर 82% और गुटखा पर 91% एक्साइज ड्यूटी लगेगी.
अब आते हैं सिगरेट पर क्योंकि उसकी चर्चा ज्यादा है.
केंद्रीय एक्साइज कानून में बदलाव के बाद सिगरेट पर प्रति स्टिक एक्साइज ड्यूटी तय की गई है. यानी सिगरेट पर टैक्स उसकी लंबाई पर निर्भर करेगी. जैसे-
65 मिमी तक की बिना फिल्टर सिगरेट पर करीब 2.05 रुपये प्रति सिगरेट अतिरिक्त टैक्स लगेगा.
इसी लंबाई की फिल्टर सिगरेट पर करीब 2.10 रुपये प्रति सिगरेट टैक्स लगेगा.
65–70 मिमी की सिगरेट पर 3.60 से 4 रुपये प्रति सिगरेट टैक्स लगेगा.
70–75 मिमी की लंबी और प्रीमियम सिगरेट पर करीब 5.40 रुपये प्रति सिगरेट टैक्स लगेगा.
खास डिजाइन वाली सिगरेट पर सबसे ज्यादा 8.50 रुपये प्रति सिगरेट टैक्स लगेगा.
इस बदलाव के बाद सिगरेट पर कुल टैक्स का बोझ पहले के 50–55% से बढ़कर 60 से 70% तक पहुंच सकता है. यानी सिगरेट का प्राइस 25 से 30 रुपये तक जा सकता है.
कुछ लोगों का तो ये तक कहना है कि जो सिगरेट अभी करीब 18 रुपये की मिलती है, उसकी कीमत आने वाले समय में 70 से 72 रुपये तक जा सकती है. यानी सिगरेट के दामों में बढ़त 300 फीसदी तक जा सकती है.
हालांकि, सिगरेट के नए दामों के बारे में ये सिर्फ अनुमान हैं. 300 फीसदी की बढ़ोतरी तो अव्यवहारिक भी लगती है.
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