सिग्नल बनाने वाले ने बताया कि ये मैसेजिंग ऐप पैसे कैसे कमाता है!
पावर के गलत इस्तेमाल से बचाने में मदद करेगा सिग्नल: ब्रायन ऐक्टन.
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ब्रायन ऐक्टन ने साल 2017 में वॉट्सऐप छोड़ और 2018 में सिग्नल की नींव रखी.
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वॉट्सऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी आने के बाद से टेलीग्राम और सिग्नल पर नए यूजर की भरमार आ गई है. टेस्ला और स्पेस X के CEO एलन मस्क, पेटीएम फाउन्डर विजय शेखर शर्मा और जाने-माने ह्विसल ब्लोवर एडवर्ड स्नोडेन ने भी लोगों को सिग्नल इस्तेमाल करने के लिए कहा है. इतने सारे नए यूजर के आने के बाद सिग्नल का काम बढ़ गया है.
सिग्नल ऐप की नींव डालने वाले ब्रायन ऐक्टन ने ऐप की पॉपुलैरिटी, इसकी कमाई और आगे के प्लान के बारे में NDTV से बात की है. ब्रायन वॉट्सऐप के को-फाउन्डर भी हैं जिन्होंने 2014 में वॉट्सऐप को फ़ेसबुक के हाथ बेचा और फ़िर 2017 में फ़ेसबुक से मनमुटाव के चलते कंपनी छोड़ दी. इस कहानी को डीटेल में पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं
. पावर के गलत इस्तेमाल से बचाने में मदद करेगा सिग्नल अपने इंटरव्यू में ब्रायन ने इस चीज़ को हाइलाइट किया कि सिग्नल की USP या यूनीक सेलिंग पॉइंट इसकी प्राइवेसी सेटिंग है. फ़ेसबुक के कंट्रोल में जहां वॉट्सऐप अपने यूजर का काफी सारा डेटा लेता है, सिग्नल किसी भी तरह का डेटा यूजर से लिंक नहीं करता यहां तक कि मोबाइल नंबर भी नहीं. ये इस बात की भी संभावना देख रहे हैं कि अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल नंबर भी लेना न पड़े.

सिग्नल ऐप एंड्रॉयड और आईफोन दोनों पर मौजूद है.
वॉट्सऐप की तरह सिग्नल पर भी एंड-टु-एंड एन्क्रिप्शन की वजह से पर्सनल चैट को न खुद सिग्नल देख सकता है और न ही कानूनी संस्थाएं. ब्रायन कहते हैं कि कानून सिर्फ़ बचाव के लिए नहीं होता बल्कि उसका काम अपने नागरिक की सुरक्षा करना भी होता है. कानूनी प्रक्रिया को लागू करने के लिए एजेंसी को बताना चाहिए कि वो क्या देख रही हैं और क्यों देख रही हैं. सिग्नल की प्राइवेट चैट लोगों को पावर के गलत इस्तेमाल से बचाने में मददगार साबित होगी. सिग्नल की कमाई और फ्यूचर प्लान ब्रायन ने बताया कि सिग्नल के बढ़े हुए यूजर का लोड अभी ये उठा पा रहे हैं, फ़िर भी ये अपने सर्वर के साइज़ को बढ़ा रहे हैं ताकि और नए यूजर को सही से सर्विस दी जा सके. वॉट्सऐप के को-फाउन्डर होने के नाते ब्रायन ये काम सालों से करते आ रहे हैं इसलिए इनके लिए ये करना कुछ मुश्किल काम नहीं होगा.
सिग्नल एक नॉन-प्रॉफ़िट है और ये लोगों की डोनेशन से चलता है, जिसमें छोटे-बड़े हर तरह के डोनेशन शामिल हैं. सिग्नल की नींव 2018 में ब्रायन ऐक्टन के 50 मिलियन डॉलर के इनवेस्टमेंट से पड़ी थी. ब्रायन कहते हैं कि इन्होंने ऐप के लिए कई सारे बिज़नेस मॉडल पर विचार किया मगर नॉन-प्रॉफ़िट स्ट्रक्चर ही इन्हें सबसे सही लगा. ब्रायन विकिपिडिया का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि ये भी नॉन-प्रॉफ़िट मॉडल पर चलता है और सब के लिए फ़्री है.

Signal Foundation का लोगो.
ये कहते हैं कि सिग्नल के लिए ये आगे भी डोनेशन सिस्टम पर ही काम करेंगे. यूजर के बढ़ने के साथ इनकी कोशिश रहेगी कि इनके डोनर भी बढ़ते रहें, खास तौर पर बड़े डोनर. ब्रायन कहते हैं कि ये चाहते हैं कि लोग पैसे तभी दें जब उनको लगे कि इनका काम पैसे डोनेट करने लायक है. सिग्नल और इंडिया ब्रायन कहते हैं कि इंडिया में सिग्नल के यूजर बहुत तेज़ी से बढ़ रहे हैं. सिग्नल करीब 12 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है. ये आगे कहते हैं कि इनके पास ऐप को लेकर बहुत सारे सुझाव और नए फीचर की रिक्वेस्ट भी आ रही हैं. ब्रायन बताते हैं कि ये लगभग रोज ही अपने तमिलनाडु में रहने वाले मित्र से बात करते हैं. ये ब्रायन को प्रोडक्ट के आइडिया तो देते ही हैं साथ में ये भी बताते हैं कि यहां क्या चल रहा है. ब्रायन कहते हैं कि इससे इन्हें इंडियन मार्केट को समझने में मदद मिलती है.
ब्रायन बताते हैं कि ये इंडिया कई बार आए हैं. ये बैंगलोर, मुंबई और दिल्ली के अलावा और भी कई जगह गए हैं. आखिर में ब्राइन कहते हैं कि इंडिया में कई तरह के कल्चर हैं और ये दुनिया का अच्छे से प्रतिनिधित्व करता है. अगर आप इंडिया के लिए कोई प्रोडक्ट बना रहे हैं तो समझिए कि आप दुनिया के लिए प्रोडक्ट बना रहे हैं. वॉट्सऐप ने अपनी प्राइवेसी से जुड़े ऐडवर्टाइज़ चलाए हैं! वॉट्सऐप का डेटा फ़ेसबुक से साझा किये जाने को लेकर लोग कतई खफा चल रहे हैं. ऐसे में वॉट्सऐप ने अखबारों में पूरे-पूरे पेज के ऐड देकर लोगों को समझना शुरू कर दिया है कि आपकी चैट अभी भी सुरक्षित है. मतलब कि एंड-टु-एंड एन्क्रिप्शन की वजह से न वॉट्सऐप आपकी चैट पढ़ सकता है और न फ़ेसबुक. जो बदलाव हुए हैं प्राइवेसी में वॉट्सऐप बिज़नेस अकाउंट से बातचीत के लिए हैं.
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सिग्नल ऐप की नींव डालने वाले ब्रायन ऐक्टन ने ऐप की पॉपुलैरिटी, इसकी कमाई और आगे के प्लान के बारे में NDTV से बात की है. ब्रायन वॉट्सऐप के को-फाउन्डर भी हैं जिन्होंने 2014 में वॉट्सऐप को फ़ेसबुक के हाथ बेचा और फ़िर 2017 में फ़ेसबुक से मनमुटाव के चलते कंपनी छोड़ दी. इस कहानी को डीटेल में पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं
. पावर के गलत इस्तेमाल से बचाने में मदद करेगा सिग्नल अपने इंटरव्यू में ब्रायन ने इस चीज़ को हाइलाइट किया कि सिग्नल की USP या यूनीक सेलिंग पॉइंट इसकी प्राइवेसी सेटिंग है. फ़ेसबुक के कंट्रोल में जहां वॉट्सऐप अपने यूजर का काफी सारा डेटा लेता है, सिग्नल किसी भी तरह का डेटा यूजर से लिंक नहीं करता यहां तक कि मोबाइल नंबर भी नहीं. ये इस बात की भी संभावना देख रहे हैं कि अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल नंबर भी लेना न पड़े.

सिग्नल ऐप एंड्रॉयड और आईफोन दोनों पर मौजूद है.
वॉट्सऐप की तरह सिग्नल पर भी एंड-टु-एंड एन्क्रिप्शन की वजह से पर्सनल चैट को न खुद सिग्नल देख सकता है और न ही कानूनी संस्थाएं. ब्रायन कहते हैं कि कानून सिर्फ़ बचाव के लिए नहीं होता बल्कि उसका काम अपने नागरिक की सुरक्षा करना भी होता है. कानूनी प्रक्रिया को लागू करने के लिए एजेंसी को बताना चाहिए कि वो क्या देख रही हैं और क्यों देख रही हैं. सिग्नल की प्राइवेट चैट लोगों को पावर के गलत इस्तेमाल से बचाने में मददगार साबित होगी. सिग्नल की कमाई और फ्यूचर प्लान ब्रायन ने बताया कि सिग्नल के बढ़े हुए यूजर का लोड अभी ये उठा पा रहे हैं, फ़िर भी ये अपने सर्वर के साइज़ को बढ़ा रहे हैं ताकि और नए यूजर को सही से सर्विस दी जा सके. वॉट्सऐप के को-फाउन्डर होने के नाते ब्रायन ये काम सालों से करते आ रहे हैं इसलिए इनके लिए ये करना कुछ मुश्किल काम नहीं होगा.
सिग्नल एक नॉन-प्रॉफ़िट है और ये लोगों की डोनेशन से चलता है, जिसमें छोटे-बड़े हर तरह के डोनेशन शामिल हैं. सिग्नल की नींव 2018 में ब्रायन ऐक्टन के 50 मिलियन डॉलर के इनवेस्टमेंट से पड़ी थी. ब्रायन कहते हैं कि इन्होंने ऐप के लिए कई सारे बिज़नेस मॉडल पर विचार किया मगर नॉन-प्रॉफ़िट स्ट्रक्चर ही इन्हें सबसे सही लगा. ब्रायन विकिपिडिया का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि ये भी नॉन-प्रॉफ़िट मॉडल पर चलता है और सब के लिए फ़्री है.

Signal Foundation का लोगो.
ये कहते हैं कि सिग्नल के लिए ये आगे भी डोनेशन सिस्टम पर ही काम करेंगे. यूजर के बढ़ने के साथ इनकी कोशिश रहेगी कि इनके डोनर भी बढ़ते रहें, खास तौर पर बड़े डोनर. ब्रायन कहते हैं कि ये चाहते हैं कि लोग पैसे तभी दें जब उनको लगे कि इनका काम पैसे डोनेट करने लायक है. सिग्नल और इंडिया ब्रायन कहते हैं कि इंडिया में सिग्नल के यूजर बहुत तेज़ी से बढ़ रहे हैं. सिग्नल करीब 12 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है. ये आगे कहते हैं कि इनके पास ऐप को लेकर बहुत सारे सुझाव और नए फीचर की रिक्वेस्ट भी आ रही हैं. ब्रायन बताते हैं कि ये लगभग रोज ही अपने तमिलनाडु में रहने वाले मित्र से बात करते हैं. ये ब्रायन को प्रोडक्ट के आइडिया तो देते ही हैं साथ में ये भी बताते हैं कि यहां क्या चल रहा है. ब्रायन कहते हैं कि इससे इन्हें इंडियन मार्केट को समझने में मदद मिलती है.
ब्रायन बताते हैं कि ये इंडिया कई बार आए हैं. ये बैंगलोर, मुंबई और दिल्ली के अलावा और भी कई जगह गए हैं. आखिर में ब्राइन कहते हैं कि इंडिया में कई तरह के कल्चर हैं और ये दुनिया का अच्छे से प्रतिनिधित्व करता है. अगर आप इंडिया के लिए कोई प्रोडक्ट बना रहे हैं तो समझिए कि आप दुनिया के लिए प्रोडक्ट बना रहे हैं. वॉट्सऐप ने अपनी प्राइवेसी से जुड़े ऐडवर्टाइज़ चलाए हैं! वॉट्सऐप का डेटा फ़ेसबुक से साझा किये जाने को लेकर लोग कतई खफा चल रहे हैं. ऐसे में वॉट्सऐप ने अखबारों में पूरे-पूरे पेज के ऐड देकर लोगों को समझना शुरू कर दिया है कि आपकी चैट अभी भी सुरक्षित है. मतलब कि एंड-टु-एंड एन्क्रिप्शन की वजह से न वॉट्सऐप आपकी चैट पढ़ सकता है और न फ़ेसबुक. जो बदलाव हुए हैं प्राइवेसी में वॉट्सऐप बिज़नेस अकाउंट से बातचीत के लिए हैं.
वॉट्सऐप ने ये भी कहा है कि ये आपके कान्टैक्ट्स को फ़ेसबुक के साथ साझा नहीं करता है और न ही इस बात का रेकॉर्ड रखता है कि आपने किस शख्स से कब बात की. मगर वॉट्सऐप ने ऐड में ये नहीं बताया कि वो कौन-कौन सी जानकारी फ़ेसबुक के साथ साझा करता है. वॉट्सऐप की नई पॉलिसी क्या कहती है उसे आप यहां क्लिक करकेWe want to address some rumors and be 100% clear we continue to protect your private messages with end-to-end encryption. pic.twitter.com/6qDnzQ98MP
— WhatsApp (@WhatsApp) January 12, 2021
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