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जब वॉट्सऐप फाउंडर ने 6000 करोड़ रुपयों को लात मारकर सिग्नल ऐप की नींव रखी

Signal ऐप इस वक़्त इंटरनेट का फ़ेवरिट बच्चा है. वॉट्सऐप की नए प्राइवेसी पॉलिसी आने के बाद लोगों ने Signal ऐप पर ऐसा धावा बोला है कि ये इंडिया के साथ बाकी कई और देशों के ऐपल ऐप स्टोर में टॉप फ़्री ऐप बन गया है. हर कहीं सिग्नल ऐप के फीचर्स और प्राइवेसी लेबल की बात हो रही है. द लल्लनटॉप ने भी वॉट्सऐप, टेलीग्राम, फ़ेसबुक मैसेंजर, हाइक और सिग्नल की प्राइवेसी सेटिंग्स को कंपेयर किया है. पूरी स्टोरी यहां पढ़ सकते हैं. मगर सिग्नल बना कैसे, इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है.

इस कहानी में दो मुख्य किरदार हैं. एक हैं ब्रायन ऐक्टन जिन्होंने अपनी साथी के साथ मिलकर वॉट्सऐप बनाया. फ़ेसबुक को बेचा. और फ़िर फ़ेसबुक से मनमुटाव के चलते करोड़ों रुपए कंपनी के पास ही छोड़कर निकल लिए. दूसरे हैं मॉक्सी मार्लिनस्पाइक, वो बंदा जिसने मैसेजिंग ऐप में इस्तेमाल होने वाले मॉडर्न एंड-टु-एंड एन्क्रिप्शन सिस्टम को अपने एक साथी के साथ मिलकर बनाया, और सिग्नल ऐप की नींव डाली.

कहानी ब्रायन ऐक्टन की

ब्रायन ऐक्टन पहले Yahoo! में काम करते थे. कंपनी छोड़कर इन्होंने जॉन कूम के साथ मिलकर 2009 में वॉट्सऐप बनाया. यानी अब से 11 साल पहले. दोनों का एक ही गोल था- ऐड्वर्टाइज़ रहित एक मैसेजिंग ऐप बनाया जाए, जो यूजर की प्राइवेसी का ख्याल रखे. ब्रायन और इनके साथी ने 2014 में वॉट्सऐप को फ़ेसबुक के हाथों बेच दिया, मगर इस शर्त के साथ कि वॉट्सऐप भविष्य में भी ऐड नहीं दिखाएगा.

Brian Acton
ये हैं ब्रायन ऐक्टन. (फ़ोटो: India Today)

मगर फ़ेसबुक ठहरा एक ऐड्वर्टाइज़िंग जायंट. वॉट्सऐप फाउन्डर्स की हालत बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी वाली हो गई. और वो वक़्त आ गया, जब वॉट्सऐप नामक बकरी फ़ेसबुक की छुरी के नीचे आ गई. को-फाउन्डर और फ़ेसबुक के बीच ऐप को मॉनेटाइज़ करने को लेकर ही विवाद हो गया. मॉनेटाइज़ेशन मतलब कि ऐप से पैसे कैसे बनाए जाएंगे. सितंबर 2017 में ब्रायन ऐक्टन ने फ़ेसबुक को अलविदा कह दिया. साथ ही अपने 850 मिलियन डॉलर यानी लगभग 6,000 करोड़ रुपए भी छोड़ दिए.

कुछ महीनों के बाद फरवरी 2018 में ब्रायन ने 50 मिलियन डॉलर यानी करीब 350 करोड़ रुपए इन्वेस्ट करके मॉक्सी मार्लिनस्पाइक के साथ नॉन-प्रॉफ़िट सिग्नल फाउंडेशन बनाया. ब्रायन इस फाउंडेशन के इग्ज़ेक्यूटिव चेयरमैन भी हैं. इस फाउंडेशन का मकसद लोगों को प्राइवेट बातचीत के लिए सिक्योर और इन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप मुहैया कराना था. इसी फाउंडेशन के तहत प्राइवेसी सेंट्रिक सिग्नल ऐप बना.

ब्रायन ने 6,000 करोड़ रुपए क्यों छोड़ दिए?

अब एक नज़र ऐक्टन के छोड़े हुए 850 मिलियन डॉलर पर डाल लेते हैं. वॉट्सऐप के लिए फ़ेसबुक ने 19 बिलियन डॉलर की डील की थी, यानी लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपए. फ़ेसबुक ने 4 बिलियन डॉलर कैश में चुकाये, 12 बिलियन डॉलर के शेयर दिए और अलग से 3 बिलियन डॉलर रेस्ट्रिक्टेड स्टॉक के रूप में दिए. ब्रायन ने जो 850 मिलियन डॉलर छोड़े, वो इनके हिस्से के रेस्ट्रिक्टेड या अनवेस्टेड स्टॉक थे. ये वो स्टॉक होते हैं, जो आपके लिए ही होते हैं मगर उसके लिए कुछ शर्त होती है. वॉट्सऐप और फ़ेसबुक के अग्रीमेन्ट में ये शर्त वॉट्सऐप में ऐड डालने की थी.

इस 850 मिलियन डॉलर का मामला कोर्ट पहुंच गया, क्योंकि फ़ेसबुक का कहना था कि ब्रायन के कंपनी छोड़ने तक फ़ेसबुक सिर्फ़ वॉट्सऐप में ऐड डालने की संभावना देख रहा था. बहरहाल ब्रायन ने ये पैसा फ़िर छोड़ ही दिया. शायद इसके पीछे एक आत्मग्लानि रही हो कि इन्होंने अपने ऐड-विरोधी और प्राइवेसी पर फोकस करने वाले प्रोडक्ट को फ़ेसबुक जैसे ऐड्वर्टाइज़िंग प्लैट्फॉर्म को बेचा. मगर जॉन कूम एक साल और फ़ेसबुक के साथ जुड़े रहे, और अपना अनवेस्टेड स्टॉक लेकर निकले.

कहानी मॉक्सी मार्लिनस्पाइक की

सिग्नल फाउंडेशन के को-फाउन्डर और सिग्नल ऐप के CEO मॉक्सी मार्लिनस्पाइक की कहानी भी दिलचस्प है. ये एक क्रिप्टोग्राफ़र हैं. क्रिप्टोग्राफ़ी उस विद्या को कहते हैं, जो सिक्योर बातचीत को मुमकिन करती है. मतलब कि एक ऐसा सिस्टम जो आपकी ऑनलाइन बातचीत को किसी और को पढ़ने न दे. मॉडर्न ऐप्स में एंड-टु-एंड एन्क्रिप्शन मॉक्सी मार्लिनस्पाइक और इनके साथी की ही देन है.

Moxie Marlinspike
ये हैं मॉक्सी मार्लिनस्पाइक. (फ़ोटो: Instagram/Moxie Marlinspike)

मार्लिनस्पाइक ने 2010 में विस्पर (whisper) सिस्टम नाम का सिक्योरिटी स्टार्टअप बनाया. ये इस कंपनी के CTO या चीफ़ टेक्निकल ऑफिसर भी थे. इसी स्टार्टअप के तहत इन्होंने एन्क्रिप्शन से लैस टेक्स्ट सिक्योर नाम का मैसेजिंग ऐप और रेडफोन नाम का कॉलिंग ऐप बनाया. 2011 में ट्विटर ने विस्पर को खरीद लिया. मार्लिनस्पाइक ट्विटर की सिक्योरिटी टीम के हेड बन गए. ट्विटर ने रेडफोन ऐप को बंद कर दिया, मगर फ़िर बाद में इसको फ़्री ओपन-सोर्स सॉफ़्टवेयर के रूप में टेक्स्ट सिक्योर के साथ रिलीज कर दिया.

मार्लिनस्पाइक ने 2013 में ट्विटर छोड़ दिया. ओपन विस्पर सिस्टम्स नाम का एक ओपन सोर्स प्रोजेक्ट बनाया. यहां इन्होंने टेक्स्ट सिक्योर और रेडफोन का डेवलपमेंट जारी रखा. फ़िर ट्रेवर पेरिन के साथ मिलकर सिग्नल प्रोटोकॉल बनाया. यही प्रोटोकॉल एंड-टु-एन्क्रिप्शन कहलाया.

Signal Foundation
Signal Foundation का लोगो.

2013 में मार्लिनस्पाइक ने एक कॉमन कान्टैक्ट के जरिए वॉट्सऐप को-फाउन्डर ब्रायन ऐक्टन से जुड़े, और सिग्नल प्रोटोकॉल के बारे में बात की. यहीं से दोनों एकदूसरे के संपर्क में आए. सिग्नल प्रोटोकॉल को सबसे पहले फरवरी 2014 में टेक्स्ट सिक्योर ऐप में फिट किया गया. फ़िर 2014 से लेकर 2016 के बीच ओपन विस्पर सिस्टम की छोटी सी टीम ने वॉट्सऐप, फ़ेसबुक और गूगल जैसी वड्डी-वड्डी कंपनियों के साथ काम करके सिग्नल प्रोटोकॉल को इनके प्रोडक्ट्स में फिट करवाया. यहीं से वॉट्सऐप का एंड-टु-एंड एन्क्रिप्शन चालू हुआ, जिसके बाद टेलीग्राम जैसे दूसरे ऐप्स ने भी इस सिस्टम को अपनाया.

वॉट्सऐप छोड़ने के बाद ब्रायन ऐक्टन मॉक्सी मार्लिनस्पाइक से मिले. ब्रायन की तरफ़ से मिले हुए 50 मिलियन डॉलर की मदद से 2013 में बना ओपन विस्पर सिस्टम 2018 में सिग्नल फाउंडेशन बन गया. सिग्नल फाउंडेशन ने टेक्स्ट सिक्योर ऐप और रेडफोन को एक में मिलाकर सिग्नल ऐप बनाया. सिग्नल फाउंडेशन एक नॉन-प्रॉफ़िट ऑर्गनाइज़ेशन है, यानी कि इसका मकसद पैसा छापना नहीं है. सिग्नल की तरह भविष्य में आने वाले इनके सारे प्रोडक्ट फ़्री और ओपन-सोर्स होंगे. ब्रायन ऐक्टन और मॉक्सी मार्लिनस्पाइक के अलावा सिग्नल फाउंडेशन के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर में रिसर्च साइन्टिस्ट मेरेडिथ व्हिट्टेकर हैं.


वीडियो: वॉट्सऐप ने अपनी प्राइवेसी पॉलिसी में ऐसा क्या कहा कि सब खफा हो गए?

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