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‘रेसलर प्रोटेस्ट ने इंटरनेशनल एक्सपोजर घटाया’, एशियन गेम्स मेडल विनर ने क्या गुहार लगाई?

दीपक ने गोंडा में 92 किलो कैटेगरी में जीत हासिल की, लेकिन WFI की मौजूदा नीति के मुताबिक ये टूर्नामेंट एशियन गेम्स ट्रायल के लिए योग्य नहीं माना जा रहा है.

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12 मई 2026 (पब्लिश्ड: 07:26 PM IST)
Wrestler's protest cost athletes international exposure Asiad medallist Deepak Punia
26 साल के दीपक पूनिया एक समय भारत के 86 किलो कैटेगरी के सबसे भरोसेमंद पहलवान माने जाते थे. (फोटो- X)
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एशियन गेम्स के सिल्वर मेडलिस्ट दीपक पूनिया ने कहा है कि 2023 में हुए रेसलर प्रोटेस्ट और उसके बाद हुई अराजकता ने भारतीय कुश्ती को बहुत नुकसान पहुंचाया. उन्होंने बताया कि विदेशी प्रतियोगिताओं में कम मौके मिलने से रेसलर्स की तैयारी प्रभावित हुई और उनका प्रदर्शन गिरा.

दीपक पूनिया ने सोमवार, 11 मई को गोंडा में नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट जीता. इसके बाद उन्होंने कहा कि 2023 के बाद कई टूर्नामेंट रुक गए. पहले की तरह विदेश में नियमित मुकाबले नहीं हो पाए. उन्होंने PTI को बताया,

“हर दूसरे-तीसरे महीने इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स में जाने से अपनी कमजोरियां पता चलती हैं और सुधार करने का मौका होता है. लेकिन अगर पूरे साल में सिर्फ एक वर्ल्ड चैंपियनशिप या एशियन चैंपियनशिप मिले तो प्रदर्शन में बहुत फर्क पड़ता है.”

26 साल के दीपक पूनिया एक समय भारत के 86 किलो कैटेगरी के सबसे भरोसेमंद पहलवान माने जाते थे. टोक्यो ओलंपिक में वो ब्रॉन्ज मेडल से सिर्फ एक कदम दूर रह गए थे. लेकिन उसके बाद उनकी गति थम सी गई. 2025 वर्ल्ड चैंपियनशिप में वो 11वें स्थान पर रहे.

दीपक ने अपनी गलतियों को भी स्वीकार किया. उन्होंने कहा कि वर्ल्ड चैंपियनशिप से पहले उन्हें उस लेवल का पार्टनर नहीं मिला. पार्टनर की कमी और विदेशी एक्सपोजर न मिलने से तैयारी कमजोर रही.

प्रदर्शन की कहानी क्या थी?

बता दें कि साल 2023 में ओलंपिक मेडल विनर पहलवानों विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक आदि ने तत्कालीन Wrestling Federation of India (WFI) के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाया था. जनवरी 2023 में उन्होंने प्रदर्शन शुरू किया. बाद में जंतर-मंतर पर धरना दिया. इसके बाद खेल मंत्रालय ने WFI को सस्पेंड कर दिया. एड-हॉक कमेटी बनाई गई. घरेलू प्रतियोगिताएं, नेशनल कैंप, ट्रेनिंग और विदेशी टूर्नामेंट सब प्रभावित हुए. कानूनी मामला अभी भी पूरी तरह सुलझा नहीं है, लेकिन नई लीडरशिप के साथ फेडरेशन अब काम कर रही है.

दीपक पूनिया का कहना है कि इन दो सालों में युवा पहलवानों को भी अच्छे मौके नहीं मिले. नियमित अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की कमी से पूरा सिस्टम प्रभावित हुआ. उन्होंने विदेशी कोचिंग सिस्टम की तारीफ की, जहां टेक्निकल डिटेल्स, रिकवरी और टैक्टिकल सुधार पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है.

दीपक की गुहार

दीपक ने गोंडा में 92 किलो कैटेगरी में जीत हासिल की, लेकिन WFI की मौजूदा नीति के मुताबिक ये टूर्नामेंट एशियन गेम्स ट्रायल के लिए योग्य नहीं माना जा रहा है. 31 मई को होने वाले ट्रायल के लिए वो अभी भी एलिजिबल नहीं हैं. दीपक ने कहा,

“मैं यहां सिर्फ एशियन गेम्स का मौका कमाने आया हूं. मैं फेडरेशन से अनुरोध करूंगा कि मेरे केस पर विचार करें.”

उनका लक्ष्य साफ है, एशियन गेम्स में सिल्वर को गोल्ड में बदलना. भारतीय कुश्ती अब धीरे-धीरे स्थिरता की ओर लौट रही है. नई लीडरशिप और विदेशी कोचिंग सपोर्ट मिल रहा है. लेकिन दीपक पूनिया जैसे अनुभवी पहलवानों के बयान से साफ है कि 2023-24 का वो दौर सिर्फ प्रशासनिक संकट नहीं था, बल्कि खिलाड़ियों के करियर और विकास पर लंबा असर छोड़ गया. 

वीडियो: विनेश फोगाट ने कुश्ती में वापसी का किया ऐलान, इस ओलंपिक के लिए करेंगी तैयारी

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