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हार्ट अटैक पड़ा, अमनजोत को बताया नहीं..., वर्ल्डकप विजेता टीम की खिलाड़ी के घर ये सब चल रहा था

Womens World Cup 2025 Final: Amanjot Kaur को जो दादी खेल के मैदान में ले जाया करती थीं, उन्हें ही दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. लेकिन उनके परिवार ने यह बात उनसे छिपाए रखी. अब सब पता चला.

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3 नवंबर 2025 (अपडेटेड: 3 नवंबर 2025, 12:10 PM IST)
Womens World Cup 2025 Final amanjot kaur grandmother heart attack news
अमनजोत कौर ने साउथ अफ्रीकी ओपनर तजमिन ब्रिट्स को किया रन आउट. (फोटो-PTI)
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भारतीय महिला टीम की ऑलराउंडर अमनजोत कौर (Amanjot Kaur) ने फाइनल मुकाबले में बै‍ट-बॉल से नहीं, बल्कि अपनी फील्डिंग से दिल जीता. पहले उन्होंने साउथ अफ्रीका की ओपनर खिलाड़ी तजमिन ब्रिट्स को डायरेक्ट थ्रो पर रन आउट किया. फिर 42वें ओवर में धाकड़ बल्लेबाज और कप्तान लॉरा वुलफार्ट का कैच लपका. इन सबके बीच, अमनजोत कौर के परिवार में बहुत कुछ घटित हो रहा था. दादी को दिल को दौरा पड़ा, लेकिन उनके परिवार ने यह बात उनसे छिपाए रखी. वे नहीं चाहते थे कि वर्ल्ड कप खेलते वक्त उनकी बेटी का ध्यान भटके.

अमनजोत कौर के पिता भूपिंदर सिंह पेशे से बढ़ई और ठेकेदार हैं. इस हफ्ते उनकी 75 साल की मां भगवंती को दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. अपनी मां की खराब सेहत की खबर उन्होंने अपनी बेटी अमनजोत कौर से छिपाए रखी, ताकि वह परेशान न हो. 

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उन्होंने बताया कि जब अमनजोत ने पड़ोस के लड़कों के साथ क्रिकेट खेलना शुरू किया, तो दादी भगवंती पार्क में कुर्सी पर बैठकर उसका हौसला अफजाई करतीं. वह यह भी सुनिश्चित करतीं कि कोई उनकी पोती को परेशान न करे. उन्होंने बताया,

मेरी मां भगवंती, अमनजोत की ताकत रही हैं. इस हफ्ते उन्हें दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद हमने अमनजोत को इसके बारे में नहीं बताया और पिछले कुछ दिनों से इलाज के लिए वे अस्पताल में भर्ती हैं. जाहिर तौर पर, वर्ल्ड कप की जीत इस तनावपूर्ण समय में हमारे लिए एक मरहम की तरह रही है. 

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यूं तो शुरुआत में अमनजोत ने स्केटर और हॉकी खिलाड़ी के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी, लेकिन वे मोहाली के अपने इलाके में क्रिकेट भी खेलती थीं. चूंकि अमनजोत अपना ज्यादातर समय क्रिकेट खेलने में बिताती थीं, इसलिए 2016 में एक पड़ोसी ने पिता भूपिंदर को अपनी बेटी को प्रोफेशनल ट्रेनिंग दिलाने की राय दी. 

इसके बाद, भूपिंदर अपनी बेटी के लिए एक एकेडमी की तलाश में थे. यह तलाश खत्म हुई उनकी चंडीगढ़ की एक एकेडमी पर आकर. यह एकेडमी सेक्टर 32 के सरकारी स्कूल में थी. यहीं से कोच नागेश गुप्ता ने अमनजोत को अपने संरक्षण में ले लिया. 

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