सूर्यकुमार यादव ने ये सुधार न किए तो टीम इंडिया से भी बाहर हो जाएंगे!
सूर्या अब ज्यादा स्वीप और स्विच हिट जैसी वैरायटी की तरफ जा रहे हैं. जबकि कवर्स से मिड-ऑन तक के एरिया में खेलने की कोशिश काफी कम हो गई है.

एक वक्त था जब सूर्यकुमार यादव को देखकर लगता था कि क्रिकेट अनफेयर हो गया है. बॉलर्स सोचते थे, ‘ये बंदा गेंद को कहां-कहां मार देगा?’ 360 डिग्री बैटिंग. जो सिर्फ एबी डिविलियर्स में दिखती थी. हैलीकॉप्टर शॉट, रिवर्स स्वीप, स्विच हिट, फाइन लेग के ऊपर फ्लिक. सारे शॉट्स सूर्या का आर्सेनल में थे. हर शॉट में नया इनोवेशन. एवरेज भी कमाल. स्ट्राइक रेट भी धमाकेदार. वैभव-अभिषेक-प्रियांश से भी पहले वो भारत के असल वाले मॉर्डन T20 बैटर थे. दुनिया के एक्सपर्ट्स भी उनकी तारीफ करते नहीं थकते थे. लेकिन आज? वही सूर्या जिनके नाम से फील्ड सेट करना मुश्किल हो जाता था, अब स्ट्रगल कर रहे हैं. पर क्यों?
मुंबई इंडियंस (MI) के लिए मस्ट-विन मैच में सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के खिलाफ भी सूर्या का बल्ले नहीं चला. 5 गेंदों में 5 रन ही आए. ऐसे में सवाल ये नहीं है कि ‘सूर्या फॉर्म में नहीं हैं’. असली सवाल ये है कि, सूर्या की बैटिंग में क्या चेंज आया है?
कहां गया इनोवेशन?क्रिकेट एनालिसिस करने वाले लोग अक्सर कहते हैं कि, ‘SKY का इनोवेशन कम हो गया है’. लेकिन क्या ये बात सिर्फ कह देना ही इतना सरल है? नहीं. इनोवेशन सिर्फ अजीब-अजीब शॉट मारना नहीं होता है. लप्पा चलाना इनोवेशन में कभी नहीं गिना जाता. ना ही हर बॉल को स्लॉग करना. वहीं जिसके बारे में मोहम्मद आमिर ने अभिषेक शर्मा को ट्रोल किया था. लेकिन अभिषेक कभी स्लॉगर नहीं थे. न ही हैं. ये उनके कंसिस्टेंट स्कोर्स से पता चलता है.
असली इनोवेशन है हर गेंद के हिसाब से अलग-अलग शॉट्स अपने आर्सेनल में रखना. बॉल की मेरिट पर खेलना. जो अभिषेक और वैभव सूर्यवंशी जैसे यंग बैटर्स काफी जल्दी सीख गए हैं. ये वैसा ही होता है जैसे कोई स्टूडेंट किसी एक सवाल को 4-5 तरीके से हल कर ले. गेंदबाज हर गेंद पर एक अलग सवाल पूछता है. ये उसकी लाइन, लेंथ, स्पिन या पेस, और फील्ड पर डिपेंड करता है. अच्छा बैटर अपने पास इन बॉल्स के कई जवाब रखता है. सूर्या भी पहले इसी कैटेगरी में आते थे. उनका ‘सॉल्यूशन स्पेस’ काफी वाइड था.
मतलब एक ही गेंद पर सूर्या 3-4 अलग-अलग शॉट खेल सकते थे. कभी कवर ड्राइव, कभी स्वीप, कभी रैंप शॉट, कभी डीप मिडविकेट के ऊपर से मारना. बॉलर्स और कप्तान कन्फ्यूज हो जाते थे.
पर अब? अब उनका सॉल्यूशन स्पेस कम हो गया है. डेटा ये साफ बता रहा है. IPL 2024-25 तक और उसके बाद के आंकड़े ही देख लीजिए. स्पिन के खिलाफ स्वीप शॉट से जो 35% रन आ रहे थे, वो अब घटकर सिर्फ 22.6% रह गए हैं.
सूर्या का शॉट कंट्रोल परसेंटेज 80% से गिरकर 68% हो गया. 'V' एरिया में (मिड ऑन-मिड ऑफ) रनों का परसेंट 30% से घटकर 22% रह गया.
मतलब पहले सूर्या के पास क्लासिकल शॉट्स और इनोवेटिव शॉट्स का परफेक्ट कॉकटेल था. इनोवेटिव शॉट्स को वो सरप्राइज के तौर पर यूज करते थे. अब वो सरप्राइज वाला एलिमेंट गायब सा हो गया है.
पहली 15 गेंदों का हाल भी जान लीजिएये और भी इंटरेस्टिंग है. पहली 15 गेंदों में सूर्या अब ज्यादा स्वीप और स्विच हिट जैसी वैरायटी की तरफ जा रहे हैं. जबकि कवर्स से मिड-ऑन तक के एरिया में खेलने की कोशिश काफी कम हो गई है. कप्तान भी अब स्मार्ट हो गए हैं. वो जान गए हैं कि सूर्या का ‘गो-टू’ कौन सा है. वो फील्ड उसी हिसाब से सेट कर देते हैं. सूर्या यहीं फंसते हैं. इनोवेटिव शॉट्स के लिए फील्ड सेट होती है. और क्लासिकल शॉट्स उनके निकल नहीं रहे हैं. ये कुछ वैसा ही जैसे आप किसी मेंटलिस्ट की कोई ट्रिक पकड़ लें, और उसे पहले से ही भांप लें.
क्या सूर्या वापसी कर पाएंगे?क्यों नहीं? सूर्यकुमार यादव अभी भी दुनिया के सबसे टैलेंटेड T20 बैटर्स में से एक हैं. उनका हैंड-आई कोऑर्डिनेशन, बैलेंस और टाइमिंग अभी भी कमाल का है. इस IPL दिल्ली कैपिटल्स (DC) के खिलाफ 36 गेंदों में 51 रनों की एक पारी उनके बल्ले से आई है. समस्या टेक्निकल नहीं, मेंटल लगती है. उन्हें इसी पर काम करना होगा. स्पिन पर सिर्फ स्वीप पर निर्भर नहीं रहना है. कुछ और शॉट्स भी ट्राई कर सकते हैं. सूर्या को वापस अपने पुराने गेम पर जाना होगा. थोड़ा समय लेकर अपने इनोवेटिव शॉट निकालने होंगे.
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