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दो-दो वेस्ट हाई नो-बॉल, फिर भी अंपायरों ने कार्तिक त्यागी को बॉलिंग से क्यों नहीं हटाया?

अंपायरों ने पहली गेंद को dangerous माना, क्योंकि वो छाती के पास थी और हिम्मत को बचना पड़ा. लेकिन दूसरी गेंद को सिर्फ unfair माना, dangerous नहीं.

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27 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 04:50 PM IST)
Why Kartik Tyagi was allowed to continue the final over despite bowling two waist high no balls
IPL में अंपायरों को जजमेंट का पूरा अधिकार है. (फोटो- PTI)
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26 अप्रैल की रात लखनऊ के इकाना स्टेडियम में IPL 2026 का पहला थ्रिलर मैच देखने को मिला. लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) वर्सेज कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) मैच में इस सीजन का पहला सुपर ओवर हुआ. KKR के पेसर कार्तिक त्यागी ने ओवर में दो नो बॉल डालीं. इसके बाद भी अंपायर्स ने उन्हें बॉलिंग से नहीं हटाया. क्या ये नियमों का उल्लंघन है? अगर नहीं, तो नियम क्या कहते है? इस बारे में डिटेल में जानते हैं.

मैच के आखिरी ओवर में LSG को 17 रन चाहिए थे. गेंद कार्तिक त्यागी के हाथ में थी. पहली गेंद पर शमी को बाय रन मिला. फिर दूसरी गेंद कार्तिक ने फुल टॉस फेंकी. जो हिम्मत सिंह की छाती के ऊपर चली गई. हिम्मत ने खुद को बचाने के लिए बल्ला आगे कर दिया. अंपायर ने तुरंत नो-बॉल करार दी, और कार्तिक को वॉर्निंग भी दे दी. और फ्री हिट भी थी.

अब तीसरी गेंद (फ्री हिट वाली). फिर वही कहानी. एक और वेस्ट हाई फुल टॉस, कमर से ऊपर. अंपायर ने दोबारा नो-बॉल कॉल की. KKR ने रिव्यू भी लिया, लेकिन थर्ड अंपायर ने कन्फर्म कर दिया कि गेंद सच में ऊपर थी. स्टेडियम में लोगों ने सोचा कि त्यागी को तो अब बॉलिंग से हटा दिया जाएगा. दो-दो वेस्ट हाई नो-बॉल्स के बाद बॉलर को स्पेल खत्म हो जाता है, ऐसा तो हमने हमेशा सुना है.

लेकिन इस मैच में ऐसा नहीं हुआ. अंपायरों ने कुछ देर चर्चा की, फिर कार्तिक त्यागी को ओवर कराने दिया. मैदान पर कन्फ्यूजन का माहौल था, कमेंटेटर्स भी हैरान थे. आखिरकार त्यागी ने बाकी गेंदें डालीं और मैच टाई हो गया. फिर सुपर ओवर में KKR ने 2 विकेट से जीत हासिल कर ली. रिंकू सिंह प्लेयर ऑफ द मैच बने.

पर एक सवाल बना रहा, कार्तिक को क्यों नहीं रोका गया?

नियम में सब लिखा है

दरअसल, IPL 2026 के प्लेइंग कंडीशंस के क्लॉज 41.7.1 के अनुसार कोई भी गेंद जो पिच पर गिरे बिना बैटर की कमर (waist height) से ऊपर चली जाए, वो अनफेयर मानी जाएगी. अंपायर तुरंत नो-बॉल देंगे. चोट लगे या न लगे, कोई फर्क नहीं.

क्लॉज 41.7.2 और 41.7.3 में लिखा है कि अगर अंपायर को लगे कि ये गेंद खतरनाक (dangerous) है, मतलब बैटर को चोट लगने का खतरा है, तो वो पहले नो-बॉल सिग्नल देंगे. फिर बॉलर को फर्स्ट एंड फाइनल वार्निंग देंगे. ये वार्निंग पूरे मैच के लिए लागू होती है. अगर दूसरी खतरनाक गेंद आई, तो बॉलर को ओवर से बाहर कर दिया जाता है. यही हमने सुना है. पर KKR वर्सेज LSG गेम में ऐसा नहीं हुआ.

दूसरी बॉल में डेंजर नहीं था!

अंपायरों ने पहली गेंद को dangerous माना, क्योंकि वो छाती के पास थी और हिम्मत को बचना पड़ा. लेकिन दूसरी गेंद को सिर्फ unfair माना, dangerous नहीं. शायद स्पीड, डायरेक्शन या बैटर की पोजीशन को देखते हुए. इसलिए सिर्फ पहली वाली पर वार्निंग गई, दूसरी पर नहीं. नतीजा, कार्तिक ओवर पूरा कर सके.

IPL में अंपायरों को जजमेंट का पूरा अधिकार है. गेंद कितनी तेज थी, कितनी ऊंची, बैटर कहां खड़ा था, बार-बार ऐसी गेंदें आ रही हैं या नहीं. ये सब देखा जाता है. फैंस सोशल मीडिया पर भड़क गए. कोई बोला नियम गलत है. कोई बोला अंपायरों ने सही किया.

लेकिन unfair और dangerous बॉल में फर्क है. सिर्फ ऊंची गेंद होना काफी नहीं, उसे खतरनाक भी साबित करना पड़ता है.

मैच में LSG की टीम भी 155 के स्कोर तक पहुंच पाई थी. जिसके बाद सुपर ओवर हुआ. सुनील नरेन ने कमाल किया. सिर्फ 1 रन ही दिया. बाद में रिंकू सिंह ने चौका लगा KKR को मैच में जीत दिला दी.

वीडियो: कैमरन ग्रीन टीम के लिए महंगे साबित हो रहे, अब क्या करेगी KKR?

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