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सुनील छेत्री को मंच पर धकियाने वाले 'राज्यपाल' के ये कारनामे और खराब हैं!

इन्होंने मरोड़ दिया था अपने ही 'अध्यक्ष' का हाथ.

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19 सितंबर 2022 (अपडेटेड: 19 सितंबर 2022, 04:49 PM IST)
Durand Cup Final, Sunil Chhetri, LA Ganeshan, Indian Football
Durand Cup Final के दौरान एक्शन में और बाद में मंच पर सुनील छेत्री (डुरंड कप और स्क्रीनग्रैब)
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सुनील छेत्री. फुटबॉल इतिहास के महानतम खिलाड़ियों में से एक. छेत्री बीते दो दशक से फुटबॉल खेल रहे हैं. और इन दो दशकों में उन्होंने तक़रीबन वह सबकुछ हासिल कर लिया है जो एक साउथ एशियन फुटबॉलर कर सकता है. वह पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा इंटरनेशनल गोल दागने वाले एक्टिव यानी अभी खेल रहे फुटबॉलर्स में सिर्फ क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनल मेसी से पीछे हैं.

छेत्री ने अपने लंबे करियर में डोमेस्टिक लेवल पर लगभग हर ट्रॉफी जीत रखी है. लगभग एक दशक से वह बेंगलुरु स्थित क्लब बेंगलुरु FC से खेल रहे हैं. इस टीम के साथ छेत्री ने तक़रीबन हर साल एक ट्रॉफी जीती है. छेत्री इंटरनेशनल लेवल पर भी तमाम ट्रॉफीज़ जीत चुके हैं. उनकी व्यक्तिगत ट्रॉफीज़ का कैबिनेट भी कमाल है. वह अभी तक कुल 10 बार प्लेयर ऑफ द ईयर चुने जा चुके हैं.

# Sunil Chhetri Durand Cup

सात बार उन्हें AIFF ने, तो तीन बार फुटबॉल प्लेयर्स असोसिएशन ऑफ इंडिया ने साल का बेस्ट फुटबॉलर चुना है. मतलब मामला कुछ ऐसा है कि छेत्री की अचीवमेंट्स पर बात करने बैठेंगे तो शायद सिली पॉइंट के दो-तीन एपिसोड ऐसे ही निकल जाएंगे. इसलिए आज का फोकस छेत्री के साथ हुए व्यवहार पर रखते हैं. इंडियन फुटबॉल के पर्याय बन चुके छेत्री ने बीती रात अपने करियर की पहली डूरंड कप ट्रॉफी जीती.

इस जीत के बाद उन्होंने ट्वीट किया,

'दो दशक का इंतजार लंबा होता है, लेकिन अगर इसका अर्थ बेंगलुरु के ब्लू में इसे हासिल करना है, तो यह हर सीजन के इंतजार का अच्छा फल है. डूरंड कप चैंपियंस. प्रोफेशनली फुटबॉल खेलने वाले एक आर्मी किड को ये कहने का मौका ना मिल पाना शर्मनाक होता. Come On, BFC!'

यानी जिस इंसान ने इस जीत के लिए पूरे बीस साल इंतजार किया. उस शख्स के हाथ में जब डूरंड कप की ट्रॉफी आई, तो उसके साथ ऐसा बर्ताव हुआ कि ये पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया. बर्ताव क्या हुआ, ये सोशल मीडिया पर मौजूद ज्यादातर लोग जानते हैं. जो नहीं जानते उन्हें बता दें कि डूरंड कप की ट्रॉफी रिसीव करने मंच पर गए सुनील छेत्री को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ला गणेशन ने बहुत बेहूदे तरीके से धक्का देकर किनारे किया.

अब सवाल ये कि इतने डेकोरेटेड फुटबॉलर को सरेआम धक्का देने वाले गणेशन कौन हैं? मणिपुर और पश्चिम बंगाल के मौजूदा राज्यपाल गणेशन इससे पहले कई दशक तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी से जुड़े थे. वह मध्य प्रदेश से राज्य सभा के सदस्य भी रह चुके हैं. गणेशन का विवादों से लंबा नाता रहा है. साल 2017 में उन्होंने तमिलनाडु के नेदुवसल गांव से तेल और गैस निकालने की केंद्र सरकार की योजना के खिलाफ़ प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों पर कमेंट करते हुए कहा था,

'देश की भलाई के लिए एक राज्य की क़ुर्बानी देने में कुछ गलत नहीं है.'

इतना ही नहीं. इन्होंने साल 2003 में तमिलनाडु बीजेपी के पहले दलित प्रेसिडेंट किरुबानिधि के साथ इंदौर में बदतमीजी भी की थी. बीजेपी की नेशनल काउंसिल मीटिंग के बाद गणेशन ने किरुबानिधि को जातिसूचक गालियां देते हुए उनकी बांह मोड़ दी थी. बाद में किरुबानिधि ने बताया था कि उनके द्वारा गणेशन के खिलाफ़ शिकायत के चलते गणेशन ने ऐसा किया. यह शिकायत कुछ फंड्स के गलत इस्तेमाल से जुड़ी थी. गणेशन को बीते साल मणिपुर का गवर्नर बनाया था. और फिर इस साल उन्हें पश्चिम बंगाल का एडिशनल चार्ज भी सौंपा गया.

वैसे ये पहली बार नहीं है जब ट्रॉफी लेते या देते वक्त मंच पर धक्कामुक्की हुई हो. पहले भी कई बार मंच पर नेताजन, खिलाड़ियों से ज्यादा फोकस लेने के चक्कर में रह चुके हैं. साथ ही प्लेयर्स के एंड से भी ऐसा हो चुका है. ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट टीम द्वारा शरद पवार को किनारे करने की बात हो, या इंग्लैंड द्वारा शशांक मनोहर को, स्पोर्ट्स में ऐसी घटनाएं होती रहती हैं.

लेकिन इन तमाम घटनाओं पर रिएक्शन सेम होना चाहिए. क्योंकि सार्वजनिक स्थल पर जितनी मर्यादा एक प्रतिष्ठित नेता को दिखानी चाहिए, उतनी ही मर्यादा प्लेयर्स को भी.

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