The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Sports
  • sreesanth father left him temple after tumor surgery lallantop

श्रीसंत को मंदिर में दे आए थे पिता? पूर्व क्रिकेटर ने सुनाई बचपन की कहानी

श्रीसंत जब महज छह हफ्ते के थे तब उनकी तबीयत काफी खराब हो गई. डॉक्टर्स ने परिवार वालों को बताया कि श्रीसंत के पेट में ट्यूमर है. उनके बचने की उम्मीद बहुत कम थी.

Advertisement
pic
18 जून 2026 (अपडेटेड: 18 जून 2026, 09:48 PM IST)
sreesanth, sports news, cricket news
श्रीसंत के पिता ने उन्हें मंदिर में छोड़ दिया था. (Photo-Sreesanth)
Quick AI Highlights
Click here to view more

श्रीसंत के क्रिकेट करियर और विवादों से जुड़ी कई कहानियां आपने सुनी होगी. किस तरह श्रीसंत ने भारत को कई मैच जिताए. किस तरह वह पाकिस्तानियों से भिड़े और किस तरह वह क्रिकेट मैदान से तिहाड़ जेल पहुंच गए. लेकिन, श्रीसंत के बचपन से जुड़ी एक ऐसी कहानी है, जो बहुत कम लोग जानते हैं. श्रीसंत ने दी लल्लनटॉप के शो 'गेस्ट इन द न्यूजरूम' में बताया कि बचपन में उनके पिता उन्हें मंदिर में छोड़ आए थे. 

पिता ने मंदिर में छोड़ा

श्रीसंत जब महज छह हफ्ते के थे तब उनकी तबीयत काफी खराब हो गई. डॉक्टर्स ने परिवार वालों को बताया कि श्रीसंत के पेट में ट्यूमर है. उनके बचने की उम्मीद बहुत कम थी. श्रीसंत को सर्जरी की जरूरत थी. सर्जरी बहुत महंगी थी. बेटे को बचाने के लिए श्रीसंत के पिता ने घर बहुत कम पैसों में बेच दिए. 

इसके बाद भी श्रीसंत के बचने की उम्मीद नहीं थी. छह महीने तक वह अस्पताल में रहे. तब श्रीसंत के पिता ने मन्नत मांगी. उन्होंने भगवान शिव से बेटे की जिंदगी मांगी. साथ ही यह भी कहा कि अगर श्रीसंत ठीक हो गए तो वह उन्हें मंदिर में दे आएंगे.

ये भी पढ़ें- ग्लेन फिलिप्स की पहली टेस्ट सेंचुरी, क्या न्यूजीलैंड दूसरा टेस्ट बचा पाएगी? 

पिता ने पूरी की मन्नत

श्रीसंत कुछ समय बाद ठीक हो गए. डॉक्टर्स ने श्रीसंत को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया. पूरा परिवार बहुत खुश था. लेकिन, पिता को मन्नत याद थी. एक दिन श्रीसंत अपनी मां के साथ सो रहे थे. श्रीसंत के पिता ने बेटे को उठाया और पास के शिव मंदिर चले गए. वहां के पुजारी को अपना बेटा थमाया. मंदिर के पास फूल की माला बनाने वाली औरत ने श्रीसंत की जिम्मेदारी ली. उन्होंने कहा कि श्रीसंत को पालेंगी और वह मंदिर के काम करेंगे. श्रीसंत के पिता रोते हुए वापस घर आ गए.

श्रीसंत बन गए शिव दास

इसके बाद, श्रीसंत की नानी घर पर आईं. वह श्रीसंत को ढूंढने लगीं. जब वह कहीं नहीं मिले तो उन्होंने अपने बेटी और दामाद से पूछा. उन्हें सच्चाई पता चली तो वह बहुत नाराज हो गईं. वह मंदिर गईं और पुजारी से श्रीसंत को वापस मांगा. पुजारी इसके लिए तैयार तो हो गए, लेकिन शर्त भी रखी. शर्त थी कि मंदिर के घड़े में एक सिक्का डाला जाए. 

साथ ही श्रीसंत को अपनी पूरी जिंदगी शिव का स्मरण करना होगा. अपनी पूरी जिंदगी में 108 शिव मंदिर में जाना होगा. जब श्रीसंत को यह पता चला तो वह खुद शिव के दास बन गए. वह खुद को भक्त नहीं मानते. श्रीसंत अब तक 38 शिव मंदिर के दर्शन कर चुके हैं. वह चाहते हैं कि उनकी जिंदगी लंबी हो ताकी वह यह काम भी पूरा कर सकें. 

वीडियो: गेस्ट इन द न्यूजरूम: श्रीसंत ने सचिन-सौरव के मजेदार किस्से सुनाए, भज्जी-गंभीर विवाद पर खुलकर बोले

Advertisement

Advertisement

()