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वर्ल्डकप जीतने के बाद ट्रेन के थर्ड AC से घर पहुंचा ये प्लेयर, कोई नहीं पहचान सका, पत्नी भी साथ में थीं

T20 वर्ल्ड कप का फाइनल मैच खत्म हुआ था, और फाइनल को देखते हुए अहमदाबाद से मुंबई जाने के लिए सभी फ्लाइट बुक थीं. रोड से जाने में बहुत समय लगता, इसलिए इस लेफ्ट हैंड बल्लेबाज ने ट्रेन का रास्ता चुना. बीच में टीसी भी आया, फिर सबके सामने कैसे पहचान छिपाई, अब सब बताया है.

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Shivam Dube’s mode of transport after the T20 World Cup final, an upper berth of train to Mumbai
कोच में चढ़ते ही वो सीधे ऊपर की बर्थ पर जाकर लेट गए. (फोटो- X)
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प्रशांत सिंह
11 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 08:28 AM IST)
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T20 World Cup 2026 का फाइनल मैच. भारत की बैटिंग के दौरान आखिरी ओवर में स्टेडियम में लाखों फैन्स ‘दुबे, दुबे’ के नारे लगा रहे थे. क्योंकि शिवम दुबे क्रीज पर थे. दुबे ने क्राउड को निराश भी नहीं किया. आखिरी ओवर में 3 चौके और 2 छक्के लगाए. और भारत को 250 के पार पहुंचाया. टीम के ऑलराउंडर शिवम दुबे ने मैच के बाद भी लोगों को अपने एक फैसले से चौंका दिया है. जब सभी प्लेयर्स फ्लाइट पकड़ कर अपने-अपने घर पहुंचे, तो दुबे ने ट्रेन के थर्ड AC कोच से जाने का फैसला किया.

बच्चों के लिए जाना था घर

टूर्नामेंट में कमाल की बैटिंग करने वाले शिवम दुबे ने मैदान के बाहर भी कमाल का फैसला लिया. फाइनल के बाद टीम का जश्न चला. लेकिन शिवम का मन अपने परिवार के साथ था. उनका चार साल का बेटा अयान और दो साल की बेटी मेहविश मुंबई में घर पर इंतजार कर रहे थे.

मैच खत्म हुआ था, और फाइनल को देखते हुए अहमदाबाद से मुंबई जाने के लिए सभी फ्लाइट बुक थीं. रोड से जाने में बहुत समय लगता, इसलिए शिवम ने ट्रेन लेने का फैसला किया. वो, उनकी पत्नी और एक दोस्त अहमदाबाद-मुंबई सयाजी एक्सप्रेस ट्रेन से मुंबई के लिए निकल पड़े.

इंडियन एक्सप्रेस को शिवम ने बताया कि उन्हें डर था कि लोग उन्हें पहचान लेंगे और भीड़ लग जाएगी. इसलिए उन्होंने एक प्लान बनाया. कैप, मास्क और फुल स्लीव टी-शर्ट पहनी. स्टेशन पर ज्यादा लोग न हों, इसीलिए ट्रेन के डिपार्चर से 5 मिनट पहले तक बाहर कार में इंतजार किया. जैसे ही ट्रेन के निकलने का टाइम आया, वो जल्दी से ट्रेन में चढ़ गए.

शिवम ने बताया,

“मैं, मेरी पत्नी और एक दोस्त ने ट्रेन से जाने का फैसला किया. थर्ड AC की टिकटें मिल रही थीं, इसलिए हमने वो बुक कर लीं. जिसको भी ये पता चला, वो काफी चिंतित हो गया. सभी को लग रहा था कि अगर स्टेशन पर या ट्रेन के अंदर कोई मुझे पहचान लेता तो क्या होता?”

लेकिन शिवम ने प्लान सेट कर लिया था. कोच में चढ़ते ही वो सीधे ऊपर की बर्थ पर जाकर लेट गए. ट्रेन में टिकट चेकिंग हुई. टीटी भी आया. उसने पूछा,

"कौन शिवम दुबे? वो क्रिकेटर?"

तभी शिवम की पत्नी अंजुम ने कहा,

"नहीं-नहीं, वो कहां से आएगा?"

इस तरह बात टल गई. और टीटी आगे बढ़ गया. पर बात सिर्फ यहां खत्म नहीं हुई. 8 घंटे की जर्नी थी. रात में शिवम को वॉशरूम जाने के लिए सीट से उतरना पड़ा. वो बताते हैं,

“रात में मैं बर्थ से नीचे उतरा, लेकिन वॉशरूम जाने-आने के रास्ते में किसी ने मुझे पहचाना नहीं. ट्रेन का सफर बहुत अच्छा और स्मूथ रहा, लेकिन मुझे डर था कि सुबह बोरीवली स्टेशन पर दिन में उतरते वक्त लोग मुझे पहचान लेंगे, और वहां मैं लोगों से बच नहीं सकता."

पुलिस से मदद लेनी पड़ी

आखिरकार शिवम दुबे को पुलिस की मदद लेनी पड़ी. उन्होंने बताया,

“पुलिस वालों को लगा कि मैं एयरपोर्ट से बाहर आऊंगा, लेकिन जब मैंने बताया कि ट्रेन से आ रहा हूं तो वो हैरान रह गए. फिर उन्होंने मुझे पुलिस एस्कॉर्ट दिया, जिससे बाहर निकलने में दिक्कत नहीं आई.”

ये कहानी तो ट्रेन जर्नी की थी. शिवम की इस वर्ल्ड कप की जर्नी भी काफी शानदारी रही. टूर्नामेंट में उन्होंने 235 रन बनाए. 39 के ऐवरेज और 169 के स्ट्राइक रेट से. इस दौरान उनके बल्ले से 17 छक्के और 15 चौके निकले. शिवम ने टीम का मिडिल ऑर्डर संभालने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

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