400 किलो मछली, 3 शेफ! नॉर्वे की टीम FIFA वर्ल्ड कप के लिए क्या-क्या लाई?
टीम 300 किलो नॉर्वेजियन साल्मन और ट्राउट मछली लेकर आई है. 100 किलो हेलिबट मछली, 80 किलो नॉर्वेजियन ब्राउन चीज़, और 100 किलो जार्ल्सबर्ग चीज़ भी Norway से मंगाया गया है.

FIFA World Cup 2026 में 1998 के बाद नॉर्वे (Norway) की फुटबॉल टीम ने क्वालीफाई किया. टीम अपनी फुटबॉल के अलावा अपने खाने-पीने के खास इंतजाम के लिए भी चर्चा में है. शुरू में खबर आई कि टीम ने पूरे 1000 किलो खाना नॉर्वे से सोर्स कराया है. सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी डिबेट होने लगी. लोग हैरान थे कि क्या टीम को अमेरिका का खाना पसंद नहीं? लेकिन अब नॉर्वे टीम के हेड शेफ ने पूरी सच्चाई सामने रखी है.
नॉर्वे फुटबॉल टीम के हेड शेफ आरॉन एस्पेलैंड ने एक इंटरव्यू में बताया कि असल में टीम लगभग 580 किलो खाना ही नॉर्वे से लेकर आई है. फॉक्स स्पोर्ट्स की रिपोर्ट के अनुसार शेफ आरॉन ने डिटेल देते हुए बताया कि टीम 300 किलो नॉर्वेजियन साल्मन और ट्राउट मछली लेकर आई है. 100 किलो हेलिबट मछली, 80 किलो नॉर्वेजियन ब्राउन चीज़, और 100 किलो जार्ल्सबर्ग चीज़ भी नॉर्वे से मंगाया गया है.
माने, कुल 400 किलो मछली और 180 किलो चीज़ का जुगाड़ किया गया है. तीन शेफ भी टीम के साथ अमेरिका गए हैं, ताकि प्लेयर्स को उनके मुताबिक खाना परोसा जा सकते. शेफ ने साफ किया कि ऑरेंज नॉर्वे से नहीं लाए गए. प्लेयर्स को हर सुबह ताजा निचोड़ा हुआ ऑरेंज जूस मिलता है, लेकिन वो अमेरिका में ही लोकल ऑरेंज से बनाया जाता है. सोशल मीडिया पर जो खबर वायरल हुई थी कि नॉर्वे की टीम ऑरेंज भी लेकर आई है, वो सभी गलत थी.
क्यों ले गए अपना खाना?आरॉन एस्पेलैंड ने समझाया कि टॉप लेवल पर खेलने वाले एथलीट्स के लिए कंसिस्टेंसी बहुत जरूरी होती है. खिलाड़ी जिन प्रोडक्ट्स और टेस्ट के आदी होते हैं, उन्हें वही खाना बेहतर लगता है. इससे उनका पोषण (nutrition) सही रहता है और मानसिक रूप से भी वो घर जैसा महसूस करते हैं. उन्होंने आगे कहा,
“अमेरिका में खाना बनाने का हमारा अनुभव बहुत अच्छा रहा. यहां अच्छी क्वालिटी वाली लोकल सामान मिल रहा है. हम इन्हें नॉर्वे के कुछ खास प्रोडक्ट्स के साथ मिलाकर खिलाड़ियों को देते हैं.”
वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट्स में प्लेयर्स काफी प्रेशर और थकान महसूस करते हैं. अर्लिंग हालैंड जैसी स्टार प्लेयर्स के लिए सही खाना उनकी परफॉर्मेंस बेहतर बनाने में मदद करता है.
डाइट क्यों इतनी जरूरी?फुटबॉल प्लेयर्स रोजाना भारी ट्रेनिंग करते हैं. उनकी बॉडी को प्रोटीन, अच्छे फैट्स और सही कार्बोहाइड्रेट की जरूरत पड़ती है. नॉर्वे की मछली प्रोटीन से भरपूर होती है और चीज़ स्वाद और एनर्जी दोनों देता है. घर के स्वाद से खिलाड़ियों का मनोबल भी ऊंचा रहता है.
पहले की 1000 किलो वाली खबर से लोग सोच रहे थे कि नॉर्वे टीम अमेरिका के खाने पर भरोसा नहीं करती. लेकिन शेफ ने साफ किया कि ऐसा नहीं है. वो लोकल चीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं, बस कुछ नॉर्वेजियन स्पेशल आइटम्स साथ लाए हैं.
स्पोर्ट्स डाइटिशियन और डलास काउबॉय्स व टेक्सास रेंजर्स जैसी प्रोफेशनल टीमों के साथ काम कर चुकी एमी गुडसन कहती हैं कि इंटरनेशनल मैचों में अपने साथ खाना लाना काफी आम है. ये असल में कंट्रोल, कंसिस्टेंसी और परफॉर्मेंस के लिए होता है. वो बताती हैं,
“वर्ल्ड कप लेवल पर न्यूट्रिशन (पोषण) एक परफॉर्मेंस फैक्टर है. प्लेयर्स काफी इंटेंस ट्रेनिंग करते हैं. लगातार ट्रैवल करते हैं और छोटे-छोटे समय में कई मैच खेलते हैं. साथ में मौसम और टाइम जोन बदलने का भी सामना करना पड़ता है. जो वो खाते हैं, उसका सीधा असर उनके एनर्जी लेवल, हाइड्रेशन, रिकवरी, इम्यूनिटी और मैदान पर सही फैसला लेने की क्षमता पर पड़ता है.”
नॉर्वे जैसे ठंडे देश से आए प्लेयर्स के लिए अमेरिका की गर्मी और अलग खान-पान में कुछ परिचित चीजें साथ होना उन्हें सहज महसूस कराता है. तीन शेफ पूरे ध्यान से खिलाड़ियों के लिए मेन्यू तैयार कर रहे हैं. इससे ये पता चलता है कि खबर दिखाती आधुनिक फुटबॉल में सिर्फ मैदान पर नहीं, बल्कि मैदान के बाहर भी कितनी प्लानिंग होती है. खिलाड़ियों की फिटनेस और खुशी के लिए मैनेजमेंट हर संभव कोशिश करता है.
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