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बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के मैच मुंबई-कोलकाता में नहीं, BCCI ने टीम इंडिया की मुसीबत कर दी?

BCCI ने 2027 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए वेन्यू अनाउंस कर दिया है. इसमें कोलकाता और मुंबई दोनों को शामिल नहीं किया गया है. इससे, एक बार फिर होम एडवांटेज को लेकर डिबेट शुरू हो गया है. साथ ही टेस्ट क्रिकेट के कारण प्लेयर्स और बोर्ड की सोच में अंतर को लेकर भी खूब चर्चा हो रही है.

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27 मार्च 2026 (अपडेटेड: 27 मार्च 2026, 06:05 PM IST)
Border Gavaskar Trophy, BGT 2026-27, BCCI
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए अनाउंस किए गए वेन्यू में मुंबई और कोलकाता शामिल नहीं. (फोटो-PTI)
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बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 2027 के लिए BCCI के वेन्यू चॉइस ने डिबेट शुरू कर दी है. कोलकाता और मुंबई को एक बार फिर एक भी मैच नहीं मिले हैं. इसके कारण एक बार फिर ये बहस छिड़ गई है कि क्या इससे टीम इंडिया को होम एडवांटेज मिलेगा? साथ ही इसने टेस्ट क्रिकेट की पहचान पर पड़ने वाले असर और ट्रैडिशन की अनदेखी जैसे सवाल भी उठा दिए हैं.  

कोलकाता ने अंतिम बार ऑस्ट्रेलिया को 2001 में होस्ट किया था. हां, ये वही मुकाबला था, जिसमें वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ ने मैच पलट दिया था. उसके बाद से अब तक बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी का एक भी मकाबला ईडन गार्डेन्स ने होस्ट नहीं किया. वहीं, मुंबई की बात करें तो, अंतिम बार मुंबई में ऑस्ट्रेलिया के ख‍िलाफ 2004 में टेस्ट मैच खेला गया था. माइकल क्लार्क ने अपनी डेब्यू सीरीज में यहां पर 5 विकेट हॉल पूरा किया था. 22 साल से वानखेड़े में भी दोनों टीमें टेस्ट क्रिकेट में नहीं भ‍िड़ी हैं.

क्यों उठ रहा है ये सवाल?

आप सोचेंगे कि इस पर अब हम सवाल क्यों उठा रहे हैं? ऐसा इसलिए क्योंकि जब से BCCI ने 26 मार्च को शेड्यूल अनाउंस किया है, तब से इंटरनेट पर इसे लेकर खूब बहस चल रही है. कारण भी साफ है कि ये बात सिर्फ वेन्यू तक सीमित नहीं है. ये टीम इंडिया के टेस्ट क्रिकेट में भविष्य पर सवाल भी उठाता है?

खुद प्लेयर्स भी इसे लेकर बात कर चुके हैं. एक तरफ BCCI का विजन है. जो टेस्ट क्रिकेट को इन्क्लूजिव बनाने की सोच रखता है. वहीं, दूसरी तरफ विराट कोहली और आर अश्विन जैसे पूर्व क्रिकेटर्स हैं, जिन्होंने हाेम एडवांटेज घटने की चिंता जाहिर की है. विराट कोहली ने तो साफ कह दिया था कि टेस्ट सेंटर्स इंडिया में फिक्स होने चाहिए. अश्विन का भी यही मानना था.

21 जनवरी 2027 से शुरू होने वाली आगामी बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के मुकाबले नागपुर, चेन्नई, गुवाहाटी, रांची और अहमदाबाद में खेले जाने हैं. शेड्यूल पूरे मैप पर देखें तो लगभग पूरा भारत कवर करता है. लेकिन, इससे ट्रैडिशनल सेंटर्स बेंगलुरु, कोलकाता और मुंबई की महत्ता घटने का सवाल उठ रहा है. टेस्ट क्रिकेट प्रेमियों का मानना है कि कुछ सीरीज को कुछ खास वेन्यू ही डिफाइन करते हैं. जैसे मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में होने वाला बॉक्सिंग डे टेस्ट मैच. या फिर सिडनी का न्यू ईयर मैच. भारत में ये आइकॉनिक वेन्यूज वानखेड़े और ईडन गार्डेन्स हैं. यहां अगर मैच नहीं हुए मतलब सीरीज ही पूरी बदल गई.

6 साल में बदली है फर्स्ट चॉइस

2020 से अगर बात करें तो, अहमदाबाद ने अकेले 4 टेस्ट मैच होस्ट कर लिए हैं. वहीं, कोलकाता को‍ सिर्फ एक मुकाबला मिला है. कुल मिलाकर ये कहना गलत नहीं हेागा कि टेस्ट सेंटर मूव कर रहा है. कई लोग इससे कन्विंस्ड नहीं हैं कि ये ऑर्गेनिक है. आईसीसी चेयरमैन जय शाह अहमदाबाद से हैं. वहीं, बीसीसीआई के सेक्रेटरी देवजीत सैकिया असम से हैं. ये भी एक कारण है कि अहदाबाद और गुवाहाटी को मैच मिलने पर आपत्त‍ि जताई जा रही है.  

2026-27 होम सीजन की बात करें तो, वेस्टइंडीज, श्रीलंका, जिंबाब्वे और ऑस्ट्रेलिया को भारत का दौरा करना है. इस दौरान कोलकाता और मुंबई को सिर्फ एक-एक ODI होस्ट करना है, वो भी जिंबाब्वे के ख‍िलाफ. ये इन दोनों क्रिकेट सेंटर्स के लिए डिमोशन की तरह है. खबरें हैं कि IPL 2026 के बाद ईडन गार्डेन्स में रेनोवेशन होना है. शायद यही कारण हो कि कोलकाता को कम मैच मिले हैं. लेकिन, ये अब तक कंफर्म नहीं है. दोनों बड़े वेन्यूज की अनदेखी से जहां लोग फ्रस्ट्रेटेड हैं. वहीं, गुवाहाटी को इसमें शामिल करना बहस का कारण बन रहा है.

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अश्विन ने भी उठाया था सवाल

नवंबर 2025 में इस वेन्यू पर साउथ अफ्रीका के ख‍िलाफ भारत ने टेस्ट मैच खेला था. इस मुकाबले में भारतीय टीम को 408 रन से हार का सामना करना पड़ा था. सिर्फ रिजल्ट्स ने सवाल नहीं उठाए. कंडीशंस को लेकर भी खूब बहस चली. जल्दी सूर्यास्त होने के कारण टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में पहली बार यहां लंच ब्रेक से पहले टी ब्रेक लिया गया. साथ ही पिच भी टीम इंडिया के लिए बहुत अनफैमिलियर ही नज़र आई. माने आप भले ही होम ग्राउंड पर खेल रहे हों. ये आपके लिए ओवरसीज कंडीशंस जैसी ही रहीं.

ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के लिए वेन्यूज का मतलब है वहां की मेमोरी. मैच से पहले ही माहौल और इतिहास काम करने लगते हैं. दौरा करने वाली टीमों को सिर्फ प्लेयर्स का सामना नहीं करना पड़ता, बल्कि वहां के इतिहास का भी सामना करना पड़ता है. इंड‍िया इस मॉडल से दूर हो रहा है. लगातार वेन्यूज रोटेट होने के कारण खुद के प्लेयर्स को ये वेन्यू नया लगता है. इससे होम एडवांटेज मिलने की संभावनाएं भी घट जाती हैं.

साउथ अफ्रीका के ख‍िलाफ गुवाहाटी टेस्ट से पहले आर अश्विन ने इस पर चिंता जाहिर की थी. उन्होंने कहा था,

गुवाहाटी में जब आप साउथ अफ्रीका का सामना करेंगे तो हो सकता है कि भारतीय टीम अच्छा खेले और प्रोटियाज को तंग करे. लेकिन, सिर्फ इंडियन मैप पर होने के कारण गुवाहाटी में मैच टीम इंडिया के लिए होम मैच नहीं हो जाता. मैं इसे टीम इंडिया के लिए एक अवे मैच मानता हूं. हमने ऐसे वेन्यूज पर ज्यादा टेस्ट मुकाबले नहीं खेले हैं. इसलिए नहीं पता कि यहां कि पिच कैसा खेलने वाली है.

BCCI की क्या है मंशा?

वहीं, इसके पीछे BCCI की मंशा की बात करें तो, वो है एक्सपैंशन. T20 लीग्स के दौर में अगर टेस्ट क्रिकेट को जिंदा रखना है तो इसे हर कॉर्नर में पहुंचाना होगा. इसे कुछ शहरों तक सीमित रखना सही नहीं होगा. हालांकि, उनकी मंशा कितनी सफल होती है वो तो दर्शकों की संख्या से स्पष्ट हो जाएगी. यानी दर्शक या 12th मैन ही निर्धारित करेंगे कि BCCI की ये मंशा कितनी सही है.

एक समय था जब चेन्नई में पोंगल टेस्ट की प्रथा थी. आज जब वेन्यूज लगातार रोटेशन में तय हो रहे हैं तो ऐसी प्रथा का चलना बहुत मुश्किल है. इससे सीरीज का बिल्डअप भी हल्का हो जाता है. टिकट विंडोज भी मैच से कुछ दिन पहले ही खुलते हैं. वहीं, इसके विपरीत एशेज सीरीज को लेकर नैरेटिव्स कई महीनों पहले बनने शुरू हो जाते हैं.

ऑस्ट्रेलिया अगले साल जनवरी में नागपुर पहुंचेगी. इससे पहले, BCCI एक दो राहे पर खड़ा है. उन्होंने सफलतापूर्वक इंडियन क्रिकेट का मैप तो बड़ा कर दिया है. लेकिन, सवाल यही है कि क्या ये करने में उन्होंने सीरीज की वैल्यू तो नहीं घटा दी? क्योंकि एक्सपेंशन से गेम तो ग्रो हो सकता है. लेकिन, निरंतरता की कमी इसे स्पेशल ही नहीं रहने देगी. और ये अनिश्चितता सीरीज पर अभी से छाने लगी है. अब ये देखने लायक होगा कि नए वेन्यूज दर्शकों को खींच पाते हैं या माहौल बनाने के लिए एक बार वापस इतिहास का रुख करना पड़ता है. 

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