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राहुल-धवन का ये खेल अहम मौके पर इंडिया को डुबो देगा!

ऐसे कैसे वर्ल्ड कप टीम में जाएंगे ये खिलाड़ी?

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23 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 23 अगस्त 2022, 06:38 PM IST)
Shikhar Dhawan - Shubman Gill - KL Rahul
शिखर धवन, शुभमन गिल और केएल राहुल (फोटो - AP)
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भारत का ज़िम्बाब्वे दौरा खत्म हो चुका है. टीम इंडिया ने यहां वनडे सीरीज़ 3-0 से अपने नाम की. टूर से पहले शिखर धवन को टीम का कप्तान बनाया गया था. लेकिन टूर शुरू होने से ठीक पहले केएल राहुल वापस आए और कप्तान बन गए. लंबे वक्त के बाद मैदान पर लौटे राहुल कप्तान बने. उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने सीरीज़ में क्लीन स्वीप किया.

अब हम एशिया कप के लिए तैयार हैं. इस वनडे सीरीज़ के कुछ प्लेयर्स वहां भी होंगे. ऐसे में हमने सोचा कि क्यों ना 'सिली पॉइंट' में आज इसी सीरीज़ में हुई पॉजिटिव और नेगेटिव चीजों पर चर्चा कर ली जाए. तो चलिए अब शुरू करते हैं.

# Shubman Gill

इस टूर का सबसे बड़ा पॉजिटिव तो निश्चित तौर पर गिल ही रहे. शुभमन ने टूर में मिले मौकों का पूरा फायदा उठाया. वह इस सीरीज़ में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले प्लेयर रहे. शुभमन ने तीन पारियों में 122.50 की ऐवरेज और 120.68 के स्ट्राइक रेट से 245 रन बनाए. पहले मैच में ओपन करते हुए शुभमन ने 72 गेंदों पर 82 रन बनाए. जबकि दूसरे मैच में वह नंबर तीन पर खेले.

यहां शुभमन ने 34 गेंदों पर 33 की पारी खेली. इसके बाद आया तीसरा मैच. गिल एक बार फिर नंबर तीन पर खेले. गिल तीसरे मैच में जब बैटिंग करने आए तब टीम की बैटिंग काफी स्लो चल रही थी. टीम ने पंद्रह ओवर में सिर्फ 63 रन के टोटल पर राहुल का विकेट गंवाया. ऐसी सिचुएशन में आकर गिल ने ताबड़तोड़ बैटिंग की. सातवें विकेट के रूप में आउट होने से पहले उन्होंने सिर्फ 97 गेंदों पर 130 रन बना डाले. इस प्रदर्शन के दम पर उन्होंने निश्चित तौर पर बैकअप ओपनर या नंबर तीन पोजिशन के लिए अपना दावा मजबूत कर लिया है.

# Axar Patel

रविंद्र जडेजा की तरह अक्षर भी गुजरात से आते हैं. उन्हीं के जैसे अक्षर भी बाएं हाथ से स्पिन बोलिंग करते हैं. और उन्हीं की तरह लोवर ऑर्डर में आकर तेजी से रन बना सकते हैं. इतनी समानता के चलते ही शायद इन्हें जड्डू के रहते हुए बहुत मौके नहीं मिले. लेकिन इस सीरीज़ में अक्षर को मौका मिला और अक्षर ने इसका पूरा फायदा उठाया.

अक्षर इस सीरीज़ के बेस्ट बोलर रहे. उन्होंने तीन पारियों में कुल 24.3 ओवर्स बोलिंग की. इन ओवर्स में चार मेडन रहे. अक्षर ने इस दौरान 74 रन देकर कुल छह विकेट निकाले. यह विकेट 12.33 की ऐवरेज और 3.02 की इकॉनमी से आए. इकॉनमी और ऐवरेज दोनों में अक्षर टॉप पर रहे. और सबसे ज्यादा विकेट्स तो उन्होंने निकाले ही.

इस सीरीज़ में टीम इंडिया के लिए यह दो बड़े पॉजिटिव्स रहे. अब बात नेगेटिव्स की करें तो सबसे ज्यादा निराशा कप्तान राहुल और शिखर से हुई. क्यों हुई? चलिए बताते हैं.

# KL Rahul

राहुल चोट से वापसी कर रहे थे. आखिरी बार वह IPL2022 के दौरान एक्शन में दिखे थे. लोगों को राहुल से बहुत उम्मीद थी. लेकिन उन्होंने इस सीरीज़ के दोनों मौकों पर निराश किया. राहुल ने इन दो पारियों में कुल 31 रन बनाए. इन रनों से ज्यादा चिंता का विषय रहा उनका स्ट्राइक रेट. राहुल दूसरे मैच में सिर्फ एक रन बनाकर आउट हुए. जबकि तीसरे मैच में उन्होंने 30 रन की पारी खेली.

राहुल के यह रन 46 गेंदों में आए. जिम्बाब्वे के अटैक को देखते हुए उनका 65 का स्ट्राइक रेट डिफेंड करना थोड़ा मुश्किल है. खासतौर से तब, जब उन्होंने अपनी पूरी बैटिंग पावरप्ले में की और दूसरे छोर से शिखर धवन भी स्लो ही खेल रहे थे.

# Shikhar Dhawan

क्रिकेट फ़ैन्स के बीच एक शब्द का ज़िक्र अक्सर आता है- Stat-paddler. यानी कोई ऐसा व्यक्ति जिसके स्टैट्स तो बहुत अच्छे हों, लेकिन किसी काम के ना हों. जो सिर्फ अपने रिकॉर्ड्स के लिए खेलता हो. और शायद लोगों को ये बात थोड़ी कड़वी लगे, लेकिन इस सीरीज़ में धवन ने यही किया है. स्टैटपैडलिंग. आप स्टैट्स देखेंगे तो धवन के नाम इस सीरीज़ में दूसरे सबसे ज्यादा रन हैं.

उन्होंने तीन पारियों में कुल 154 रन बनाए. इसमें एक पचासा भी शामिल रहा. इस सीरीज़ में धवन का हाइएस्ट स्कोर 81 नाबाद रहा. जबकि उनका ऐवरेज 77 का था. लेकिन ज़िम्बाब्वे के खिलाफ़ उनके 76.23 के स्ट्राइक रेट को कैसे जस्टिफाई करें? धवन की वनडे फॉर्म कमाल की है. वह लगातार रन बना रहे हैं. और इस फॉर्म के साथ उनका 2023 वनडे वर्ल्ड कप खेलना लगभग पक्का है. इसके बाद भी उन्होंने ज़िम्बाब्वे के अपेक्षाकृत दोयम दर्जे के अटैक के सामने जैसी बैटिंग की, उसकी कोई सफाई नहीं हो सकती.

इन सबके अलावा आवेश खान की बोलिंग, संजू सैमसन, ईशान किशन और दीपक हूडा का संघर्ष जैसी चीजें भी माइनस में ही गिनी जाएंगी. कहने को तो ईशान और सैमसन के पास एक-एक अच्छी इनिंग है. लेकिन ऐसे अटैक के सामने भी अगर आप हर मौके पर कमाल नहीं कर पा रहे, तो समस्या तो है. दीपक चाहर भी अपनी वापसी पर उतनी अच्छी बोलिंग नहीं कर पाए.

और फिर आखिरी मैच में जिस तरह हम गिरते-पड़ते जीते. वो भी चिंता का विषय है. क्योंकि इस मैच में दीपक चाहर और आवेश खान जैसे हमारे फ्रंटलाइन बोलर्स खेल रहे थे. चाहर एशिया कप की स्टैंडबाई जबकि आवेश मेन टीम में हैं. ऐसे बोलर्स अगर ज़िम्बाब्वे के सामने स्ट्रगल कर रहे हैं तो इन्हें बड़ी टीम्स के आगे तो और दिक्कत होगी. ऐसे में निश्चित तौर पर हमें इस सीरीज़ जीत को सेलिब्रेट करने के साथ, इनके नेगेटिव पॉइंट्स पर भी नज़र रखनी चाहिए.

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