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दिग्गज शूटर जसपाल राणा का निधन! 25 मेडल और 'मनु' को चैंपियन बनाने वाले कोच की कहानी

भारत के मशहूर शूटिंग कोच Jaspal Rana का निधन 12 जून को हो गया. म्यूनिख में हुए ISSF वर्ल्ड कप से लौटने के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी. 12 जून की सुबह साकेत के मैक्स अस्पताल में ही उनका निधन हो गया. पेर‍िस ओलंपिक में Manu Bhaker की सफलता के पीछे जसपाल राणा का ही हाथ था.

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12 जून 2026 (अपडेटेड: 12 जून 2026, 04:25 PM IST)
jaspal rana, national rifle association of india
मनु भाकर के साथ भारत के मशहूर शूटिंग कोच जसपाल राणा. (फोटो-X)
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भारत के दिग्गज शूटर और कोच जसपाल राणा का 12 जून को 49 साल की उम्र में निधन हो गया. राणा भारत के सबसे सफल शूटर्स में से एक रहे. 1990 से 2006 तक उन्होंने लगभग 25 मेडल्स जीते. शूटिंग को भारत में प्रसिद्ध करने में राणा का अहम योगदान था. शूटिंग कर‍ियर पूरा करने के बाद वो देश के सबसे सफल कोचेेज में से भी एक बने. 

पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत के लिए दो पदक जीतने वाली मनु भाकर की सफलता के पीछे भी जसपाल राणा का ही हाथ था. वो वर्तमान में देश के हाई परफॉर्मेंस पिस्टल शूटिंग कोच थे. म्यूनिख में ISSF वर्ल्ड कप से लौटने के दौरान ही अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी.   

नई दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें साकेत के मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. यहां उनका इलाज चल रहा था. 12 जून को अस्पताल में ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी. नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (NRAI) ने उनके निधन की पुष्टि की है.

शूटिंग में तीन दशक तक दिया योगदान

उनका निधन भारतीय शूटिंग के लिए एक बहुत बड़ा झटका है. उन्होंने एक चैंपियन एथलीट और कोच के तौर पर इस खेल को तीन दशकों से ज़्यादा समय दिया. भारत के सबसे कामयाब पिस्टल शूटर्स में से एक राणा 1990 के दशक में मशहूर हुए.

इस दौरान इंटरनेशनल कॉम्पिटिशंस में उन्होंने अपनी धाक जमाई. उन्होंने एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन चैंपियनशिप में कई मेडल जीते और देश के सबसे सफल शूटर्स में से एक बन गए.

शूटिंग को देश में लोकप्रिय बनाने में राणा ने बहुत अहम भूमिका निभाई. रेंज पर उनकी उपलब्धियों ने उन्हें खूब पहचान दिलाई. उनकी इन्हीं उपलब्ध‍ियों ने युवा शूटर्स की एक पीढ़ी को इस खेल को अपनाने के लिए प्रेरित किया.

जसपाल राणा का शूटिंग करियर

राणा ने इस दौरान एश‍ियन गेम्स में में कुल 8 मेडल जीते. इनमें 1994 के हिरोशिमा गेम्स में जीता गया ऐतिहासिक गोल्ड मेडल और 2006 के दोहा गेम्स में जीते गए तीन गोल्ड मेडल शामिल हैं. दोहा गेम्स में उन्होंने 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल इवेंट में वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी की थी.

वे कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भी भारत के सबसे सफल एथलीट रहे. उन्होंने 1994, 1998, 2002 और 2006 में कुल 15 मेडल जीते. इनमें 9 गोल्ड, 4 सिल्वर, 2 ब्रॉन्ज़ मेडल शामिल हैं.

इसके अलावा, उन्होंने 1994 में मिलान में हुई ISSF वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप में भी जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते हुए गोल्ड मेडल जीता था. महज 18 साल की उम्र में राणा ने 1994 में अर्जुन अवॉर्ड जीत लिया था.

भारतीय शूटिंग में उनके बेहतरीन योगदान के लिए 1997 में उन्हें पद्म श्री मिला. वहीं, कोचिंग में शानदार उपलब्धियों के लिए 2020 में उन्हें द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.

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राणा ने तैयार किए कई दिग्गज शूटर्स 

अपने कॉम्पिटिटिव करियर को अलविदा कहने के बाद, राणा कोचिंग में आ गए. इस करियर में भी जल्द ही वो भारतीय शूटिंग में सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक बन गए.

वो नेशनल कोचिंग सेटअप से जुड़े और 2012 में जूनियर पिस्टल प्रोग्राम की ज़िम्मेदारी संभाली. एक दशक में उन्होंने टैलेंट की एक मज़बूत पाइपलाइन तैयार करने में मदद की. उनके तैयार किए गए कई शूटर्स ने बाद में इंटरनेशनल लेवल पर अपनी पहचान बनाई.

उनकी देखरेख में तैयार हुए प्रमुख नामों में सौरभ चौधरी, अनीश भानवाला और चिंकी यादव शामिल थे. जूनियर प्रोग्राम में उनके योगदान को खूब सराहा गया क्योंकि भारत लगातार वर्ल्ड-क्लास पिस्टल शूटर्स तैयार करता रहा.

मनु भाकर की सफलता में योगदान

राणा अपनी बारीकी से प्लानिंग, टेक्निकल जानकारी और शूटर्स को हाई-प्रेशर वाली स्थितियों के लिए तैयार करने की काबिलियत के लिए जाने जाते थे. उनके ट्रेनिंग के तरीकों में कॉम्पिटिशन जैसे हालात बनाने पर ज़्यादा ज़ोर दिया जाता था. ताकि एथलीट्स बड़े इंटरनेशनल इवेंट्स की ज़रूरतों के हिसाब से खुद को ढाल सकें.

उनके कोचिंग करियर का एक अहम हिस्सा मनु भाकर के साथ उनका जुड़ाव था. राणा ने भाकर के करियर के एक अहम दौर में उनकी तैयारी में अहम भूमिका निभाई. भाकर ने 2024 के पेरिस ओलंपिक में इतिहास रचा और महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल और मिक्स्ड टीम 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में ब्रॉन्ज़ मेडल जीते.

NRAI ने 2025 में बनाया नेशनल कोच

खेल में उनके योगदान को देखते हुए, NRAI ने फरवरी 2025 में राणा को 25 मीटर पिस्टल इवेंट के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया. वो नेशनल शूटिंग प्रोग्राम से सक्रिय रूप से जुड़े रहे. अपने निधन तक वो भारत के प्रमुख पिस्टल शूटर्स के साथ काम करते रहे.

24-31 मई 2026 तक म्यूनिख में चले ISSF शूटिंग वर्ल्ड कप में वो भारतीय पिस्टल टीम के साथ ही थे. यहीं से लौटने के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी और भर्ती कराना पड़ा था. अब 12 जून की सुबह उनके निधन की खबर ने सबको हैरान कर दिया है. महज 49 साल की उम्र में देश का सबसे सफल शूटर और कोच अब अलविदा कह गया. 

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