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आकाशदीप की कहानी, रांची टेस्ट के पहले घंटे में जिन्हें देख बुमराह को भूल गए लोग!

Akash Deep ने अपने डेब्यू टेस्ट में ही कमाल कर दिया. उन्होंने पहले छह ओवर्स में ही इंग्लैंड के टॉप-थ्री बल्लेबाजों को वापस भेज दिया. आकाश की कहानी बहुत खास है, उन्होंने टेनिस बॉल से शुरुआत कर यहां तक का सफर तय किया है.

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23 फ़रवरी 2024 (पब्लिश्ड: 11:51 AM IST)
Akash Deep
आकाश दीप ने कमाल कर दिया
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Akash Deep. बिहार से आने वाले एक और बंगाली पेसर. बंगाली इसलिए, क्योंकि मुकेश कुमार की तरह ये भी बंगाल के लिए फ़र्स्ट क्लास क्रिकेट खेलते हैं. आकाश ने रांची टेस्ट से अपना डेब्यू किया. और डेब्यू में ही कमाल कर दिया. आकाश ने टेस्ट क्रिकेट के अपने पहले स्पेल में ही अंग्रेजों की हालत खराब कर दी. उन्होंने पहले छह ओवर्स में तीन विकेट ले डाले.

चलिए, विस्तार से बताते हैं. इंग्लैंड ने टॉस जीता. पहले बैटिंग का फ़ैसला कर लिया, जिससे इस पिच पर चौथी पारी ना खेलनी पड़े. और उनका ये फ़ैसला शुरू में ठीक भी लगा. खासतौर से सातवें ओवर में तो लगा कि इनके हाथ लॉटरी ही लग गई. लेकिन इससे पहले, आकाश दीप दिखा चुके थे कि कम से कम वो तो अंग्रेजों को सुकून से नहीं रहने देंगे.

# Akash Deep Debut Spell

चौथे ओवर की पांचवीं गेंद. आकाश के सामने ज़ैक क्रॉली. खूबसूरत गेंद. पड़कर अंदर की ओर आई. गेंद में बाउंस भी कम था. क्रॉली ने इसे डिफ़ेंड करना चाहा लेकिन गेंद उनके डिफ़ेंस को पार करती हुई ऑफ़ स्टंप उड़ा गई. आकाश ने जश्न मनाना शुरू ही किया था, लेकिन तभी सायरन बज गया. यानी गेंद नो बॉल हो गई. आकाश का पहला विकेट आते-आते रह गया.

लेकिन आकाश ने इस ग़लती का असर अपनी बोलिंग पर नहीं पड़ने दिया. उन्होंने रांची की सुबह को इंग्लैंड की बदली वाली सुबह में बदल दिया. आकाश की गेंदें दोनों तरफ़ मूव कर रही थीं और इंग्लैंड के बल्लेबाजों को लगातार परेशान कर रही थीं. लेकिन तभी, सातवें ओवर में ज़ैक क्रॉली ने सिराज को धुन दिया. इस ओवर में 19 रन आ गए. लेकिन आकाश पर इसका भी असर नहीं पड़ा. अगले ओवर में दो, और अपने पहले चार में इन्होंने कुल 12 रन दिए.

पिटाई के बाद सिराज हटे. रविंद्र जडेजा आए और पहले ही ओवर में डकेट को लगभग आउट कर ही लिया था. लेकिन अंपायर्स कॉल पर डकेट बच गए. अब आया दसवां ओवर. दूसरी गेंद. गुड लेंथ पर ऑफ़ स्टंप के थोड़ा सा बाहर. डकेट बल्ला अड़ाए बिना रह ना पाए और गेंद ने हल्की मूवमेंट के साथ बल्ले का किनारा लिया. विकेट के पीछे खड़े ध्रुव जुरेल के लिए यह रेगुलेशन कैच था. आकाश दीप का पहला टेस्ट विकेट.

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और इसके बाद आए ऑली पोप. इस सीरीज़ में एक बड़ा स्कोर कर चुके अंग्रेज. आकाश की गेंद पर आगे निकले, और गेंद पैड पर लगी. जोरदार अपील. लेकिन अंपायर ने आउट की जगह लेग बाई के रन दे दिए. रोहित ने रिव्यू लिया. लोगों को लगा था कि गेंद की हाइट समस्या बनेगी. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. कमाल का रिव्यू. गेंद जाकर लेग स्टंप पर लग रही थी. थर्ड अंपायर ने आउट दे दिया. पोप बिना खाता खोले वापस लौट गए.

लेकिन असली खेल अभी बाक़ी था. बारहवें ओवर की पांचवीं गेंद. उसी नो बॉल की फ़ोटोकॉपी. एकदम सेम टू सेम सबकुछ, लाइन, लेंथ से लेकर रिज़ल्ट तक. बस ये नो बॉल नहीं थी. क्रॉली 42 गेंदों पर 42 रन बनाकर वापस लौटे. एक एंड से लगातार छह ओवर फेंक आकाश ने अंग्रेजों के टॉप थ्री को वापस भेज दिया. उन्होंने इस स्पेल में लगातार सात ओवर फेंके, और हर ओवर कमाल का रहा.

वैसे तो आकाश की यहां तक की यात्रा भी कमाल रही है. लेकिन इस यात्रा में उन्होंने बहुत कुछ झेला. पीटीआई के साथ एक पुराने इंटरव्यू में आकाश ने बताया था,

‘बिहार BCCI से निलंबित था. ऐसे में बिहार में क्रिकेटर बनने का कोई जरिया नहीं था. ख़ासतौर पर सासाराम में तो यह गुनाह था. बहुत माता-पिता ऐसे भी थे जो अपने बच्चों से कहते थे कि आकाश से दूर रहो, उसकी संगत में बिगड़ जाओगे. लेकिन मैं उन्हें दोष नहीं देता.

मैं जहां से आता हूं, वहां क्रिकेट खेलकर कुछ हासिल होना भी नहीं था. ये बस समय की बर्बादी था. मेरे पिता कहा करते थे कि बिहार पुलिस या राज्य सरकार की ग्रुप डी भर्तियों की तैयारी कर लो, इससे कम से कम भविष्य तो सुरक्षित रहेगा. मेरे पिता खुद ही इन परीक्षाओं के फ़ॉर्म भर देते थे. लेकिन मैं परीक्षा हॉल से कॉपियां खाली ही छोड़कर आ जाता था.'

लेकिन अचानक सबकुछ बदल गया. छह महीने के भीतर ही आकाश दीप ने अपने पिता और बड़े भाई को खो दिया था. आकाश दीप के बड़े भाई की दो छोटी-छोटी बेटियां भी थीं. अब आकाश पर घर की जिम्मेदारी आ गई. वह बताते हैं,

‘छह महीने में पापा और भैया का देहांत हो गया. मेरे पास खोने के लिए कुछ भी नहीं था. लेकिन मुझे घर की ज़िम्मेदारी भी उठानी थी. फिर एक दोस्त की मदद से मुझे पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में एक क्लब से खेलने का मौका मिला. शुरुआत में मैं अपने क्लब के लिए लेदर बॉल क्रिकेट खेलता. लेकिन तब पैसे की काफ़ी किल्लत थी.

इसलिए मैं महीने में तीन-चार दिन घूम-घूमकर टेनिस बॉल क्रिकेट खेलता था. इसके लिए मुझे हर दिन के छह हजार रुपये मिल जाते थे. मैं महीने में 20 हज़ार तक कमा लिया करता था. इससे मेरा महीने का ख़र्च निकल जाता था. मेरे पास कभी कोई एक कोच नहीं था. सुराशीष लाहिरी (बंगाल के मौजूदा असिस्टेंट कोच), अरुण लाल सर, रानो सर (रानादेब बोस) ने मेरी मदद की है.’

पहले दिन लंच तक इंग्लैंड ने 112 रन पर पांच विकेट गंवा दिए थे. जॉनी बेयरस्टो और बेन स्टोक्स को अश्विन और जडेजा ने LBW किया.

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