शुभमन गिल बतौर कप्तान टेस्ट क्रिकेट में अलग रुतबा बना रहे!
टीम इंडिया के टेस्ट कप्तान Shubman Gill शानदार फॉर्म में हैं. IPL 2026 में उन्होंने 732 रन बनाए थे. अब इसी फॉर्म को जारी रखते हुए गिल ने अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच की पहली पारी में भी सेंचुरी लगा दी है.

लोकल ब्वॉय शुभमन गिल. अपने होम ग्राउंड से 100 किमी दूर मुल्लांपुर में डटे हुए हैं. अफगानिस्तान के खिलाफ करियर की 11वीं सेंचुरी लगा दी है. पहले दिन का खेल खत्म होने तक नाबाद 103 रन बनाए खड़े हैं. अभी एक सप्ताह भी नहीं हुआ, जब IPL में अपनी टीम को फाइनल में पहुंचाया था.
खैर वर्तमान में आते हैं. 6 जून को भारत अफगानिस्तान के बीच एक अदद टेस्ट मैच चल रहा है. बेशक ये मुकाबला WTC के लिहाज से मायने नहीं रखता. क्योंकि इसके अंक नहीं जुड़ेंगे. लेकिन, ताबड़तोड़ क्रिकेट वाली IPL से क्लासिकल टेस्ट में ट्रांजिशन का ये बेहतरीन ऑप्शन जरूर है.
एक सप्ताह पहले IPL प्लेऑफ इतिहास का सबसे तेज सेंचुरी लगाने वाला प्लेयर. अब अफगानिस्तान के खिलाफ अपने धैर्य और क्लास का परिचय दे रहा है. ऋषभ पंत के साथ 121 रन की साझेदारी हो गई है. अब दूसरे दिन खेल शुरू होगा तो नज़र दूसरे डबल सेंचुरी पर भी होगी.
आसान नहीं था कप्तान बनने से पहले का सफरलेकिन, गिल को शानदार टेस्ट प्लेयर बनने तक का ये सफर तय करने में काफी समय लग गया. पिछले साल तक तो जगह पर भी सवाल उठ रहे थे. लेकिन, फिर कुछ ऐसा हुआ पूरा करियर बदल गया. अब नाम उन प्लेयर्स में शुमार होता है, जो इतिहास रचते हैं. गिल ने 6 जून को बतौर कप्तान 1000 रन पूरे कर लिए हैं. मौका और दस्तूर दोनों गजब का चुना है.
मुल्लांपुर का पहला टेस्ट मैच. बतौर कप्तान सबसे तेज 1000 रन बनाने के मामले में गिल दिनों के लिहाज से पहले नंबर पर हैं. अभी बहुत समय नहीं बीता, जब वो टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया के कप्तान बने थे. आपको तो याद होगा ही कैसे IPL 2025 के दौरान अचानक टीम के दो दिग्गज प्लेयर्स ने रिटायरमेंट अनाउंस कर दी थी. कप्तान रोहित शर्मा और टीम इंडिया के रेड बॉल क्रिकेट के सबसे सफल कप्तान विराट कोहली. सवाल बड़ा था कि अब अगला कप्तान कौन होगा?
खुद गिल का रेड बॉल क्रिकेट में रिकॉर्ड अच्छा नहीं था. केएल राहुल पर पहले ही ओपनिंग का दबाव था. पंत उतने मैच्यॉर नज़र नहीं आते थे. वहीं, बुमराह का वर्कलोड मैनेजमेंट उन्हें कप्तान नहीं बनने दे रहा था. जडेजा का बतौर कप्तान CSK में सफर अच्छा नहीं रहा था. बहुत विचार-विमर्श चला. फाइनली गिल का नाम ही अप्रूव हुआ.
कप्तान बनने के बाद से आग उगल रहा बल्लापहला दौरा था इंग्लैंड का. सबने सोचा कप्तानी कहीं गिल के करियर पर हावी न हो जाए. वरना टीम में जगह भी मुश्किल हो जाएगी. लेकिन, कई बार दबाव आपको और निखार देता है. गिल के केस में ऐसा ही हुआ. गिल ने सबको हैरान करते हुए इंग्लैंड की मूडी पिच पर बल्ले से कमाल कर दिया.
मुश्किल से 35 के औसत वाला प्लेयर. बैक-टू-बैक सेंचुरीज लगा रहा था. यहां तक कि एक डबल सेंचुरी भी लगा दी. बर्मिंघम में हुए इस मुकाबले में गिल ने दूसरी इनिंग में भी डैडी हंड्रेड लगाई. एक प्लेयर जो कप्तान बनने से पहले, सीरीज में 400 रन नहीं बना पा रहा था. एक ही मैच में 430 रन बना चुका था.
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वैसे ये सिलसिला यहीं नहीं रुका. सीरीज खत्म हुई तो औसत 35 से 42 तक पहुंच गया. सीरीज में 700 से ज्यादा रन भी बनाए और बतौर कप्तान अपना वर्थ भी साबित कर दिया. सीरीज ड्रॉ रही. सब खुश थे कि इंग्लैंड जाकर युवाओं से लैस टीम ने कमाल कर दिया.
इसके बाद आई वेस्टइंडीज सीरीज. यहां भी गिल का बल्ला खूब बोला. एक सेंचुरी यहां भी आई. लेकिन, उसके बाद आया हार्टब्रेक. साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट की पहली पारी में ही गर्दन में चोट आ गई. नतीजा, 4 रन बनाकर लौटना पड़ा. टीम सीरीज हार गई. वो भी क्लीन स्वीप.
आगे की राह असल चुनौतीअब लगभग 7 महीने बाद टीम इंडिया वाइट्स में लौटी है. कप्तान शुभमन गिल ने पहली पारी में एक बार फिर सेंचुरी लगा दी है. अभी वो नाबाद 103 रन बना चुके हैं. नज़रें जरूर एक और डैडी हंड्रेड पर होगी. लेकिन, सबसे खास बात कि एक सवाल जो पिछले साल सबके जेहन में कौंध रहा था. अगला टेस्ट कप्तान कौन? उसका जवाब गिल ने बल्ले से बखूबी दे दिया है.
गिल के बतौर कप्तान बैटिंग आंकड़े चौंकाने वाले हैं. ये उनका बतौर कप्तान 9वां टेस्ट मैच ही हैं. लेकिन, इतने छोटे कप्तानी करियर में गिल 6 सेंचुरी जड़ चुके हैं. इस दौरान 1053 रन बल्ले से निकले हैं. एक हाफ सेंचुरी भी आई है. लेकिन, सबसे मजेदार तो औसत है, 87.75 का. ओवरऑल आंकड़े भी इसके कारण सुधर गए हैं. लगभग 35 के औसत वाला बैटर अब 44.63 का औसत अचीव कर चुका है.
हालांकि, काम अभी पूरा नहीं हुआ. टीम WTC साइकिल में लुढकी हुई है. 9 टेस्ट मैच बचे हैं. 2 श्रीलंका में और 2 न्यूजीलैंड में खेलने हैं. 5 यहीं घर पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ है. चुनौती बड़ी है. बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी वापस तो लाना ही है. WTC फाइनल की रेस में भी वापसी करनी है. ये काम सिर्फ कप्तान शुभमन के बस का नहीं है. इसके लिए धाकड़ बैटर गिल ही लगेंगे.
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