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T20 वर्ल्ड कप में रन कितने भी मारे हों, पर एक बॉल ने बल्लेबाजों के पसीने छुड़ाए, रिकॉर्ड डंडे उखाड़े

T20 World Cup 2026 में बॉलरों के एक हथियार ने बल्लेबाजों को खासा परेशान किया. पेस बॉलर्स का ये असलहा और कुछ नहीं ‘ऑफ कटर’ बॉल है. बल्लेबाजों ने इस टूर्नामेंट में काफी रन बनाए, लेकिन पेसर्स ने ऑफ-कटर नाम की एक साधारण सी गेंद से उन्हें डिसीव किया. इतना की इस बॉल से इस टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लिए गए. किस गेंदबाज ने कितने विकेट झटके?

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How off cutters became T20 World Cup 2026 secret weapon Bumrah Ngidi
टूर्नामेंट में कुल 795 ऑफ-कटर बॉल्स फेंकी गईं, जो पहले के रिकॉर्ड से कहीं ज्यादा है. (फोटो- AP)
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प्रशांत सिंह
10 मार्च 2026 (अपडेटेड: 10 मार्च 2026, 09:26 AM IST)
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क्रिकेट के T20 फॉर्मेट को अमूमन बल्लेबाजों के लिए मुफीद माना जाता है. या कह लें कि जिस तरह से पिछले कुछ सालों में व्हाइट बॉल फॉर्मेट बदला है, बॉलर्स के लिए गलती का स्कोप काफी कम हो गया है. फिर चाहे बल्लों की बढ़िया क्वालिटी हो. छोटी बाउंड्रीज हों. या ‘बैटिंग पैराडाइज’ कहे जाने वाले विकेट. लेकिन T20 World Cup 2026 में बॉलरों के एक हथियार ने बल्लेबाजों को खासा परेशान किया. पेस बॉलर्स का ये असलहा और कुछ नहीं ‘ऑफ कटर’ बॉल है. बल्लेबाजों ने इस टूर्नामेंट में काफी रन बनाए, लेकिन पेसर्स ने ऑफ-कटर नाम की एक साधारण सी गेंद से उन्हें डिसीव किया. इतना की इस बॉल से इस टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लिए गए.

68 विकेट सिर्फ ऑफ-कटर से आए

डेटा वेटा की बात करेंगे, लेकिन उससे पहले जाने लेते हैं कि ये ऑफ-कटर क्या है? ये एक ऐसी गेंद है जो कोई भी पेस बॉलर आसानी से सीख तो लेता है, लेकिन इसे डालना इतना आसान नहीं. गेंद को रिलीज करते वक्त उंगली से सीम को क्लॉकवाइज काटते हैं, जिससे गेंद पिच पर गिरने के बाद दाएं हाथ के बल्लेबाज की तरफ अंदर आती है. माने, बैटर अगर लेफ्टी है, तो ये बाहर जाएगी.

ये बॉल लेग-कटर या नकल-बॉल से आसान होती है. लेग-कटर और नकल-बॉल डालना अमूमन ज्यादा कठिन माना जाता है.

इस वर्ल्ड कप में तेज गेंदबाजों ने कुल 357 विकेट लिए. इनमें से 68 विकेट सिर्फ ऑफ-कटर से आए. यानी, लगभग 20 परसेंट विकेट इस वेरिएशन के नाम रहे. ये T20 वर्ल्ड कप के किसी एडिशन में ऑफ-कटर से लिए गए सबसे ज्यादा विकेट हैं.

सबसे ज्यादा ऑफ-कटर डाली गईं

टूर्नामेंट में कुल 795 ऑफ-कटर बॉल्स फेंकी गईं, जो पहले के रिकॉर्ड से कहीं ज्यादा हैं. 2016 के वर्ल्ड कप में 485 ऑफ-कटर डाली गई थीं. इतना ही नहीं, ये गेंद बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ ज्यादा घातक साबित हुई. ऑफ-कटर्स पर बाएं हाथ के बैटर्स का औसत सिर्फ 14.03 रहा. जबकि दाएं हाथ वालों का 21.14. मतलब बाएं हाथ के बल्लेबाज ज्यादा फंस रहे थे.

रिस्की भी रही

ऑफ-कटर वेरिएशन बॉलर्स के लिए रिस्की भी था. इस बॉल पर रन पड़ने का डर ज्यादा था. ऑफ-कटर बॉल का इकोनॉमी 9.39 का रहा, जो किसी भी टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा है. ये दिखाता है कि बॉलर्स को विकेट तो मिले, लेकिन उसके लिए उन्हें रन भी खाने पड़े. पर T20 क्रिकेट जिस तरह से खेला जा रहा है, आजकल बॉलर्स रन खाने से डरते नहीं.

ऑफ-कटर बॉल छोटे ग्राउंड और सपाट पिचों पर कम असरदार होती है. मसलन, चेपॉक या ईडन गार्डन्स जैसे मैदानों में ये कम कारगर साबित हुए. लेकिन अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में ऑफ-कटर ही असली असलहा थी. यहां बड़ी बाउंड्री और ब्लैक-सॉइल पिच थी, जहां ऑफ-कटर से बॉलर्स को 21 विकेट मिले. वो भी सिर्फ 8.25 के इकोनॉमी से.

लुंगी निगीदी ने किया खूब इस्तेमाल

दक्षिण अफ्रीका की टीम ने अहमदाबाद में अपने 8 में से 5 मैच खेले थे, और ग्रुप से सुपर-8 तक शानदार खेल दिखाया. सेमीफाइनल में टीम कोलकाता में हार गई, लेकिन उनके पेस अटैक ने कमाल किया. लुंगी निगीदी की बॉलिंग की सब ने तारीफ की. उन्होंने टूर्नामेंट में 63 ऑफ-कटर फेंकीं. कुल 12 में से 5 विकेट उन्हें इसी बॉल से मिले.

वहीं, भारत के पेसर जसप्रीत बुमराह ने 55 ऑफ-कटर फेंकीं. निगीदी ने 'डिपिंग ऑफ-कटर' का इस्तेमाल खूब किया. इसमें कलाई के साथ-साथ उंगलियों से ज्यादा रिवॉल्यूशन दिया जाता है. गेंद पिच पर गिरने से पहले डिप करती है और फिर अंदर आती है, जिससे बैटर्स गलती कर बैठते हैं.

निगीदी ने बताया था कि ये स्किल उन्होंने 2018 IPL में चेन्नई सुपर किंग्स में ड्वेन ब्रावो से सीखी थी. उन्होंने कहा,

"मैं अलग-अलग लेंथ यूज करता हूं. यॉर्कर, गुड लेंथ या बाउंसर. बल्लेबाज को अंदाजा नहीं लगता कि अगली बॉल कौन सी क्या आएगी."

बुमराह ने फाइनल में 18 ऑफ-कटर डालीं

बुमराह की ऑफ-कटर बॉल भी कुछ इसी तरह डिप करती है. उनके अनोखे एक्शन और कलाई की वजह से गेंद समझना बहुत मुश्किल होता है. T20 वर्ल्ड कप के फाइनल में भारत ने न्यूजीलैंड को हराया. बुमराह ने मैच में 4 विकेट लिए, और उनकी ज्यादातर बॉल ऑफ-कटर ही थीं.

फाइनल में बुमराह ने 24 गेंदों में से 18 ऑफ-कटर डालीं. मैच के बाद उन्होंने बताया,

"अहमदाबाद की पिच पर तेज गेंद फेंकने से बल्लेबाज आसानी से शॉट खेल लेते हैं. इसलिए मैंने स्मार्ट तरीके से बॉलिंग की."

लेकिन बुमराह की ऑफ-कटर ज्यादा खतरनाक होती है. वो ज्यादातर ओवर द विकेट से आकर वाइड एंगल से गेंद फेंकते हैं. उन्होेंने इस वर्ल्ड कप में 76.7% ऑफ-कटर वाइड जाकर ही फेंकी. जिससे बैटर को इसे पढ़ना और मुश्किल हो जाता है. टूर्नामेंट में बुमराह के 14 विकेट में से आधे सिर्फ ऑफ-कटर से ही आए.

बुमराह और निगीदी के अलावा अमेरिका के शैडली वैन शाल्कविक ने भी ऑफ-कटर का खूब यूज किया. उनकी मीडियम पेस बॉलिंग पर बल्लेबाज मिस्टाइम करते थे. ग्रुप स्टेज में 4 मैचों में उन्होंने 13 विकेट लिए. जिसमें भारत और पाकिस्तान के खिलाफ 25 रन देकर 4-4 विकेट का फिगर शामिल है.

शाल्कविक ने T20 वर्ल्ड कप में 18 ऑफ-कटर गेंद फेंकीं और इस वेरिएशन से 6 विकेट लिए. उन्होंने कहा,

"मैं गेंद को जितना संभव हो धीमा रखता हूं, क्योंकि भारतीय बल्लेबाज तेज गेंद पर खूब रन बनाते हैं. मैं उन्हें हिटिंग जोन से दूर बॉलिंग करने का प्रयास कर रहा था."

आजकल T20 में बल्लेबाजों के पास बेहतरीन बैट और अच्छी कंडीशंस हैं. पर इस वर्ल्ड कप में पेस बॉलर्स ने पुरानी लेकिन कारगर ऑफ-कटर से वापसी की. ये दिखाया कि साधारण वैरिएशन भी मैच विनर बन सकता है.

वीडियो: फाइनल में भारत की जीत के बाद बुमराह का जश्न, क्या कहा उन्होंने?

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