NRR ने टीम इंडिया को फंसा दिया, सेमीफाइनल मुश्किल, आखिर इसकी गणित लगती कैसे है?
T20 World Cup: NRR के गणित के लिए सिर्फ वही मैच काउंट होते हैं जहां रिजल्ट निकला हो. यानी, टाई, वॉशआउट, नो रिजल्ट वाले मैच इसमें नहीं जोड़े जाते. जैसे इस वर्ल्ड कप में न्यूजीलैंड और पाकिस्तान का पहला सुपर 8 मैच बारिश की वजह से नहीं हो पाया था.

T20 World Cup में ‘हिस्ट्री रिपीट करने और हिस्ट्री डिफीट’ करने वाली टैगलाइन खूब चल रही है. लेकिन इंडियन टीम सेमीफाइनल (Team India Semifinal) में पहुंचेगी या नहीं, ये सवाल सबसे बड़ा है. साउथ अफ्रीका और वेस्ट इंडीज तो ‘मेन इन ब्लू’ के रास्ते में खड़े ही हैं, इंडियन टीम के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया है- NRR यानी नेट रन रेट.
इस क्रिकेट प्रेमी देश में NRR नाम की बला से तो हम परिचित हैं ही. नाम तो सुन ही रखा है. लेकिन ये नहीं पता है कि इसकी गणित कैसे लगाते हैं. माने ये कैलकुलेट कैसे होता है? गोया कोई कठिन फॉर्मुला हो NRR. लेकिन थोड़ा ध्यान लगाया जाए तो NRR को समझना इतना भी कठिन नहीं है.
NRR आखिर है क्या?आसान भाषा में समझाएं तो कमाई और खर्च का हिसाब-किताब है NRR. अगर आपने 200 रुपये कमाए, और 100 खर्च दिए तो आपके पास 100 रुपये ही बचेंगे. कुछ इसी तरह ही नेट रन रेट भी निकाला जाता है.
फॉर्मुले के तौर पर बताएं तो NRR = (टीम ने जितने रन बनाए, उसका औसत प्रति ओवर) – (टीम ने जितने रन दिए है, उसका औसत प्रति ओवर).
मतलब, आप किसी मैच में जितना तेजी से रन बनाते हो और जितना कम रन दूसरी टीम को बनाने देते हो, NRR उतना ही अच्छा होगा. +1.50 मतलब आपकी टीम काफी धांसू खेली है. -0.50 मतलब, मामला थोड़ा गड़बड़ा गया.
T20 वर्ल्ड कप में पहला सुपर 8 मैच हारने के बाद टीम इंडिया का NRR -3.800 हो गया. भारतीय टीम साउथ अफ्रीका से 76 रनों से हारी थी. वहीं, वेस्टइंडीज ने 107 रनों से जिम्बाब्वे को हराया. उनका NRR +5.350 का हो गया है. यानी, भारत नेट रन रेट में वेस्टइंडीज से 9.15 पॉइंट पीछे है. और यही वजह है कि इंडियन फैंस की चिंताएं बढ़ गई हैं.
मान लीजिए कि ODI टूर्नामेंट में चार मैचों में किसी टीम ने कुल मिलाकर 1000 रन बनाए.
कुल ओवर खेले - 200
तो रन बनाने का रेट- 1000 ÷ 200 = 5.00 रन प्रति ओवर
अब दूसरी तरफ है बॉलिंग. अगर टीम ने बॉलिंग में टोटल 800 रन दे दिए. यानी दूसरी टीम ने उसके खिलाफ इतने रन बनाए.
कुल ओवर डाले- 200 ओवर (या उससे कम ही, पर माने वो 200 ही जाएंगे)
तो रन देने का रेट = 800 ÷ 200 = 4.00 रन प्रति ओवर
अब NRR = 5.00 - 4.00 = +1.00
T20 वर्ल्ड कप के सुपर 8 के पहले मैच में साउथ अफ्रीका ने भारत के खिलाफ 20 ओवर में 187 रन बनाए थे. तो अफ्रीका का रन रेट हुआ 187 ÷ 20 = 9.35.
188 रन चेज करते हुए इंडियन टीम 18.5 ओवरों में 111 रन पर ऑलआउट हो गई. तो ये माना जाएगा कि अफ्रीका ने 20 ओवर (ये 18.5 नहीं माने जाएंगे) में 111 रन दिए. रन रेट होगा 111 ÷ 20 = 5.55.
साउथ अफ्रीका का NRR होगा 9.35 - 5.55 = 3.800
वहीं, भारत का NRR होगा = -3.800
मतलब जितना बड़ा प्लस होगा, उतना अच्छा. नेगेटिव आया तो समझो मुसीबत में है टीम. जैसे इस वक्त भारतीय टीम है.
अब असली ट्विस्ट, ऑल आउट होने पर क्या होता है? ये सबसे बड़ा कन्फ्यूजन वाला पॉइंट है.
अगर कोई टीम 40 ओवर में ऑल आउट हो गई, लेकिन मैच 50 ओवर का था. तो NRR कैलकुलेशन में टीम के रन रेट को 50 ओवर से ही निकाला जाएगा. मतलब, टीम के रन कम ओवर में बने, लेकिन कैलकुलेशन में ओवर ज्यादा गिने जाएंगे. तो बात साफ है कि टीम का रन रेट कम हो जाएगा. इसीलिए एक्सपर्ट्स अक्सर कहते हैं कि बड़े टूर्नामेंट में मैच को क्लोज ले जाओ. जितना कोई टीम टारगेट के पास जाएगी. उतना ही उसके NRR पर कम फर्क पड़ेगा.
वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे वाले मैच का उदाहरण ही ले लीजिए. वेस्टइंडीज की टीम ने 20 ओवर में 254 रन बनाए, इसके बाद जिम्बाब्वे के 9 विकेट 103 रन पर ही गिर गए थे. आखिर में ब्रेड इवांस ने आकर 21 गेंद में 43 रनों की पारी खेली. जिससे टीम का स्कोर 147 रन पहुंचा.
अगर जिम्बाब्वे की टीम 103 पर ही ऑलआउट हो गई होती. तो 44 रन और कम बने होते. ऐसे में वेस्टइंडीज का NRR +5.350 से बढ़कर +7.550 हो जाता. और जिम्बाब्वे का -7.550, जो अभी -5.350 है. माने, इवांस की पारी ने जिम्बाब्वे का NRR 2.200 और बेहतर ही किया है.
यहां कुछ और जरूरी बातें भी हैं. NRR के गणित के लिए सिर्फ वही मैच काउंट होते हैं जहां रिजल्ट निकला हो. यानी, टाई, वॉशआउट, नो रिजल्ट वाले मैच इसमें नहीं जोड़े जाते. जैसे इस वर्ल्ड कप में न्यूजीलैंड और पाकिस्तान का पहला सुपर 8 मैच बारिश की वजह से नहीं हो पाया था. इस केस में दोनों टीमों को 1-1 पॉइंट तो दे दिया गया था. लेकिन NRR दोनों का 0-0 ही है.
एक और बात. जिन मैचों का रिजल्ट DLS मेथड से निकलता है, उनके अपने अलग रूल्स हैं. लेकिन बेसिक तिया-पांचा यही रहता है.
कुल मिलाकर, NRR इसलिए ताकि जो टीम बड़े अंतर से मैच जीते, उसे उस परफॉर्मेंस का फायदा मिले. वरना, कोई 1 रन से जीत-जीत के भी टॉप पर आ जाएगा. माने, मार्जिन का उस टीम को कोई फायदा नहीं मिलेगा.
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