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'मेरी ये आंख तुम्हारे लिए भी भीगती है मेरे हमवतन !'

एक कविता रोज़ में आज अमितोष नागपाल की कविता 'मेरे हमवतन'.

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7 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 7 जनवरी 2020, 06:45 AM IST)
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अमितोष नागपाल हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री का हिस्सा हैं. नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा से पढ़ाई की है. एक्टिंग कैरियर की बात करें तो दबंग, रंगरेज़, आरक्षण, बेशरम जैसी फ़िल्में उनके खाते में हैं.

हरियाणा के हिसार में पैदा हुए अमितोष एक्टिंग के उस्ताद तो हैं ही, उनकी कलम की धार भी कम नहीं. ओये लक्की लक्की ओये के गाने उनकी कलम से निकले हैं. गुलाब गैंग और हिंदी मीडियम के डायलॉग उन्होंने लिखे हैं. देश के मौजूदा हालात पर उनकी तरफ से कुछ जरूरी लफ्ज़ नमूदार हुए हैं. हम आपके लिए वो हिस्सा लेकर आए हैं. अभी के वक्त की सबसे जरूरी नब्ज़ पकड़ी गई है. पढ़िए और सोचिए.

मेरे हमवतन

सवाल बस इतना बचा है... कि रक्त से सने चेहरे को देख कर तुम्हारी आंख भीगती है या तुम उसके मार खाने की वजह को साबित करने के लिए तर्क खोजने लगते हो...

तुम मरहम लगाने दौड़ते हो या जख़्मी की जात पूछने लगते हो... तुम्हे अब के हालातों पर गुस्सा आता है या इतिहास से जोड़के देखने पर तुम्हे सब सही लगने लगता है...

जिसकी आंख भीगी है जो मरहम लगाने दौड़ रहा है जिसे गुस्सा आ रहा है उसके पास अभी इस देश को देने के लिए बहुत कुछ है... और ज़िन्दगी जीने के लिए भी

और तुम जिसे पिटने वाले की गलती समझाना अच्छा लगता है, मार खाते लोगों पे ठहाके लगाना अच्छा लगता है, इतिहास से जोड़के हालात पे मुस्कुराना अच्छा लगता है,

तुमने इस लड़ाई में सबसे ज़्यादा खोया है... तुमने खो दिया है वो सब जो ज़िंदा कहलाने के लिए ज़रूरी है, तुम्हारी हंसी इस देश का सबसे उदास चेहरा है.

मेरी ये आंख तुम्हारे लिए भी भीगती है मेरे हमवतन !


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