फ्रेंच ओपन 2026 : एलेक्जेंडर ज्वेरेव ने जीता पहला ग्रैंडस्लैम खिताब, रोमांचक फाइनल में कोबोली को हराया
Roland Garros 2026 : जर्मनी के Alexander Zverev ने अपना पहला ग्रैंडस्लैम जीत लिया. फ्रेंच ओपन के मेंस सिंगल्स के रोमांचक फाइनल मुकाबले में उन्होंने इटली के Flavio Cobolli को 5 सेट तक चले मुकाबले में हराया.

‘विक्ट्री बिलॉन्ग्स टू द मोस्ट टेनेशियस’. यानी 'जीत सबसे दृढ़ निश्चयी की होती है'. ये मोटो है टेनिस के चारों ग्रैंडस्लैम में से एक, फ्रेंच ओपन का. 7 जून 2026. जर्मनी के वर्ल्ड नंबर 3 एलेक्जेंडर ज्वेरेव ने ऐसा ही दृढ़ निश्चय फिलिप चैटरियर कोर्ट पर भी दिखाया. निश्चय एक बेटे का, जिसके पिता एलेक्जेंडर ज्वेरेव सीनियर 29 साल से उसके पीछे लगे हैं कि बेटा एक दिन ग्रैंडस्लैम जीतेगा.
3 बार पहले ही ग्रैंडस्लैम फाइनल में जगह बनाई. लेकिन, ट्रॉफी कभी हाथ नहीं लगी. हमेशा रनर्स अप बनकर लौटना पड़ा. इस निश्चय के साथ कि इस बार नहीं हुआ तो क्या? अगली बार पक्का ट्रॉफी जीतकर रहूंगा. ऐसा ही एक निश्चय रोलां गैरो 2024 के फाइनल में भी ज्वेरेव जूनियर ने किया था. वर्ल्ड नंबर वन यानिक सिनर से हारने के बाद. अब जाकर वो निश्चय पूरा हुआ है.
फ्रेंच ओपन 2026 के मेंस सिंगल्स के फाइनल में जर्मनी के इस स्टार टेनिस प्लेयर ने अपना पहला ग्रैंडस्लैम खिताब जीत लिया. पिछले कुछ साल से टेनिस जगत को इस दिन का इंतजार था. 4 घंटे से ज्यादा देर तक चले रोमांचक फाइनल मुकाबले में उन्होंने इटली के फ्लावियो कोबोली को हराया. 5 सेट तक चले मुकाबले में ज्वेरेव ने 6-1, 4-6, 6-4, 7-6(5), 6-1 से जीत दर्ज की.
3 हार्टब्रेक झेल चुके थे ज्वेरेवज्वेरेव ने पहली बार 2020 में यूएस ओपन के फाइनल में जगह बनाई थी. तब उन्हें डोमिनिक थिएम ने हराकर खिताब जीत लिया था. इसके बाद, उन्हें किसी ग्रैंडस्लैम के फाइनल में पहुंचने में 4 साल लग गए. 2024 में वो फ्रेंच ओपन के फाइनल में पहुंचे. इस बार अल्कराज़ ने उनका सपना तोड़ दिया. वहीं, 2025 के ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में सिनर के हाथों उन्हें शिकस्त मिली.
3 हार्टब्रेक झेल चुके ज्वेरेव के लिए इस बार अपना सपना पूरा करने का सबसे बढ़िया मौका था. लगातार दो बार के चैंपियन कार्लोस अल्कराज चोट के कारण बाहर थे. वर्ल्ड नंबर 1 सिनर दूसरे राउंड में ही बाहर हो गए थे. और 24 बार के ग्रैंडस्लैम विनर जोकोविच तीसरे राउंड से आगे नहीं बढ़ सके. फाइनल में चुनौती थी इटली के फ्लावियो कोबोली की.
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कोबोली ने भी दिखाया दमये मुकाबला जितना एकतरफा होने की दर्शक उम्मीद लगा रहे थे. वैसा बिल्कल नहीं हुआ. भले ही सेमीफाइनल में कोबोली को वॉकओवर मिला हो. फाइनल में उन्होंने ऐसा खेल दिखाया, सब दंग रह गए. ये उनका पहला ग्रैंडस्लैम फाइनल था. लेकिन, इसका दबाव उन्होंने कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया.
शुरुआती सेट 6-1 से हारने के बाद कोबोली ने जबरदस्त वापसी करते हुए दूसरा और चौथा सेट अपने नाम कर लिया. चौथा सेट टाईब्रेकर में पहुंचा. लेकिन, अंतत: उसे 7-5 से अपने नाम कर लिया. अंतिम सेट में उनपर थकान हावी हो गया. वरना जिस तरह उन्होंने बीच के सेट में खेल दिखाया. ये कहना मुश्किल था कि अंत में विजेता कौन होगा.
इमोशनल हो गए थे ज्वेरेवज्वेरेव के लिए ये जीत कितनी मायने रखती है. ये उनके इमोशंस में भी नज़र आया. कोच पिता हों और प्रेरणा भाई तो मुश्किल समय को पीछे छोड़ने की हिम्मत मिल ही जाती है. 6 साल से पहले ग्रैंडस्लैम की उनकी खोज. न जाने कितनी इंजरी. अब जाकर रोलां गैरो में पूरी हो गई है. पिछले दो साल से चारों ग्रैंडस्लैम सिनर और अल्कराज़ के नाम ही रह रहा था. अब ज्वेरेव ने भी अपने नाम एक ग्रैंडस्लैम कर लिया है. ऐसे में ये देखने लायक होगा कि वर्ल्ड नंबर 1, 2 और 3 के बीच की ये राइवलरी अब आगे क्या मोड़ लेती है.
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