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रोनाल्डो को खारिज़ नहीं करते, वो अब भी दुनिया के बेस्ट फिनिशर हैं!

FIFA World Cup 2026 : पुर्तगाल ने उज्बेकिस्तान के ख‍िलाफ 5-0 से मैच जीत लिया. इस मुकाबले में Cristiano Ronaldo ने दो गोल किए. इसी के साथ उन्होंने सभी लोगों को जवाब दे दिया, जिन्होंने उन्हें कांगो के ख‍िलाफ मैच के बाद खारिज कर दिया था.

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24 जून 2026 (पब्लिश्ड: 06:13 PM IST)
FIFA World Cup 2026, Cristiano Ronaldo
क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने उज़्बेकिस्तान के खि‍लाफ दो गोल मारे. (फोटो-AFP)
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‘मेसी, मेसी, मेसी…’. 5 दिन पहले ये नारे पुर्तगाल के कांगो के ख‍िलाफ मैच के दौरान लग रहे थे. 41 साल के दुनिया के सबसे बेहतरीन गोल स्कोरर को मैच के बीच में बू किया जा रहा था. उन्हें खारिज़ किया जा रहा था. पूर्व फुटबॉलर्स मेसी के कसीदे पढ़ रहे थे. वहीं, क्रिस्टियानो रोनाल्डो का नाम ऐसे ले रहे थे, जैसे चिमटे से भी नहीं उठाना चाहते हों. दुनिया का सबसे बढ़‍िया फिनिशर. क्या खुद फिनिश हो गया है? ये सवाल पहली बार नहीं उठ रहे थे. पहले भी उठे थे. 5 दिन पहले फिर दोहराए गए.

मसला था मेसी ने हैट्रिक कर दिया. रोनाल्डो एक गोल नहीं कर पाए. वैसे जब भी रोनाल्डो को पिछले दो दशक में खारिज़ किया गया. वो उठे, और उन्होंने बता दिया कि वो क्या बला हैं. 23 जून को ह्यूस्टन में उज़्बेकिस्तान के ख‍िलाफ भी कुछ ऐसा ही हुआ. चौथे मिनट में नुनो मेंडिस ने रोनाल्डो को एक लड्डू परोसी. वर्ल्ड कप में 10 मैच से एक अदद गोल की तलाश कर रहे रोनाल्डो को सिर्फ एक टच लगानी थी. गेंद नेट्स में होती. लेकिन, रोनाल्डो गेंद को टच नहीं कर पाए. गेंद बाहर चली गई. कॉमेंटेटर्स फिर वही राग अलापने लगे. पहले वाले रोनाल्डो होते तो ये गोल होता. 

रोनाल्डो को कर दिया था खारिज़

लेकिन, ठहरिये जनाब! ‘शेर’ 41 साल का जरूर हो चुका है. गोल मारना भूला नहीं है. कॉमेंटेटर्स की बातें पूरी भी नहीं हुई थीं, जब रोनाल्डो ने अपनी पिंक बूट से इतिहास रच‍ दिया. छठे मिनट में जोआओ कैंसेलो ने रोनाल्डो को गोल के ठीक सामने पास दिया. उज़्बेक के सेंटर बैक अब्दुल्ला अब्दुल्लाएव वहीं थे. मिडफील्डर ओडिलजोन खामरोबेकोव भी उनके बगल में ही थे. लेकिन, दोनों जब तक रिएक्ट करते 41 साल के रोनाल्डो ने बिजली सी फुर्ती दिखाई. गेंद हवा में थी. अमूमन ऐसी बॉल को कंट्रोल करना बहुत मुश्किल होता है. लेकिन, रोनाल्डो ने न सिर्फ सही से कनेक्ट किया. गोलकीपर अब्दुवोख‍िद नेमातोव जब तक हरकत करते, गेंद गोली की तरह नेट्स में समा गई.

रोनाल्डो इसी के साथ 6 वर्ल्ड कप में स्कोर करने वाले पहले प्लेयर बन गए. इस गोल ने पूरे स्टेडियम को जगा दिया. 41 साल का उनका हीरो. इतिहास रच चुका था. रोनाल्डो की आंखों में इस गोल का जितना उत्साह था. उससे कहीं ज़्यादा गुस्सा था. गुस्सा उन लोगों पर, जिन्होंने एक मैच पहले उन्हें खारिज़ कर दिया था. गुस्सा उन फैंस पर, जो अपने हीरो पर भरोसा खो रहे थे. रोनाल्डो दहाड़े. दर्शक दीर्घा की तरफ दौड़े और फिर किया अपना आइकॉनिक Siuuuuuu… सेलिब्रेशन.

उनके इस सेलिब्रेशन में भी गुस्सा था. उनकी आंखें कह रही थीं, कहां गए वो जो मुझे खारिज़ कर चुके थे. वो कहां गए, जो पिछले मैच में ‘मेसी, मेसी, मेसी…’ के नारे लगाकर चिढ़ा रहे थे. वैसे ये कहानी नई नहीं है. 20 साल पहले 2006 में पहली बार वो रेड एंड ग्रीन जर्सी पहनकर वर्ल्ड कप में खेलने उतरे थे. तब से ये खेल उनके साथ खेला जा रहा है. लोग उन्हें कमतर आंकने की गलती करते हैं. हर बार रोनाल्डो कुछ ऐसा खास कर जाते हैं, सब गलत साबित हो जाते हैं.

जब रोनाल्डो ने पूरी टीम को छका दिया 

गलती किससे नहीं होती. मेसी ने भी एक दिन पहले ही पेनल्टी मिस कर दी थी. रोनाल्डो भी पहले मैच में थोड़े ऑफ कलर थे. मेसी और रोनाल्डो जैसे प्लेयर्स की एक खासियत है. वो 20 साल से ऐसा खेल ही खेल रहे हैं कि उम्मीदें उनसे गलती न करने की ही होती हैं. चौथे मिनट में भी वही हुआ था. रोनाल्डो एक महीन टच लगाने से चूक गए थे. लेकिन, लीजेंड्स की यही खासियत होती है. वो वापसी करते हैं. और जब करते हैं क्या कमाल करते हैं.

रोनाल्डो ने भी उज्बेकिस्तान के ख‍िलाफ ऐसी ही वापसी की. छठे मिनट में गोल तो पुर्तगाल की टीम पिछले मैच में भी कर गई थी. लेकिन, इसके बाद एक गोल कंसीड कर ड्रॉ खेल गए थे. इस बार पुर्तगाल पूरा मन बनाकर आई थी. ड्रॉ नहीं, गोल फेस्ट बनाना है. उन्होंने किया भी कुछ ऐसा ही.

17वें मिनट में पेड्रो नेटो ‘डी’ के ठीक बाहर फ्री किक जीतते हैं. पूरी टीम ऐसे दिखाती है, जैसे अटैंप्ट रोनाल्डो ही लेंगे. वो गोलपोस्ट को स्कैन भी करते हैं. उन्हें देख उज़्बेकिस्तान की टीम चकमा भी खा जाती है. रोनाल्डो मूव बनाते हैं. देखकर यही लगता है अटैम्प्ट वही लेंगे. वो क्या जानें भला. ब्रूनो और रोनाल्डो के बीच क्या ख‍िचड़ी पक गई है.

रोनाल्डो के लिए दीवार तैयार की जाती है. अभेद किला, जिसे क्रिस्टियानो भेद न पाएं. मगर इन सब मूवमेंट के बीच एक प्लेयर अपना टारगेट फिक्स कर रहा होता है. नुनो मेंडिस. रोनाल्डो दौड़कर बॉल के ऊपर से निकल जाते हैं. दीवार बनाए खड़े सभी प्लेयर्स छलांग भी लगा देते हैं. लेकिन, दूसरी तरफ से दौड़कर आ रहे नुनो गेंद को सीधा नेट्स में पहुंचा देते हैं.

ये भी पढ़ें : GOAT डिबेट फिर कभी, फिलहाल लियोनल मेसी का जादू एंजॉय करिए!

रोनाल्डो को सेल्फिश कैसे बोल देते हैं? 

सेट पीस की मास्टरक्लास का अंदाजा आप इसी से लगाइए. गोलकीपर नेमातोव जब तक इस स्ट्रैटजी को समझ पाते, गेंद नेट्स में होती है. अब स्कोर लाइन होता है पुर्तगाल 2, उज़्बेकिस्तान 0. रोनाल्डो को सेल्फिश बोलने वालों के लिए ये जवाब था. वो टीम प्लेयर हैं. बेहतरीन टीम प्लेयर हैं. अगर आप पिछले मैच में जाओ नेवेस के गोल का आकलन करेंगे तो यही पाएंगे कि उस गोल का श्रेय आपको कागज पर नेवेस को दिखेगा. असिस्ट पेड्रो नेटो के नाम दिखेगा. लेकिन, जिस तरह 3 डिफेंडर्स को रोनाल्डो अपने पास खींचते हैं. वो रूम नेवेस के लिए क्रिएट भी उसी कारण होता है.

खैर उज़्बेकिस्तान वाले मैच पर लौटते हैं. 39वां म‍िनट. ब्रूनो गेंद को लेकर अकेले आगे बढ़ते हैं. एक तरफ होते हैं फेलिक्स, दूसरी तरफ रोनाल्डो. वो चुनते हैं अपने कप्तान को. रोनाल्डो क्यों दो दशकों से दुनिया के बेस्ट फिनिशर हैं? उस एक मूव को देखकर नज़र आ जाता है. फर्नांडिस का असिस्ट जब तक रुस्तम एंटीसिपेट करते, रोनाल्डो गोली की तरह उनकी ब्लाइंड साइड से निकल जाते हैं. बेचारे नेमाटोव. उनके रिएक्ट करने से पहले गेंद नेट्स के अंदर होता है. पहले हाफ में पुर्तगाल 3 गोल की बढ़त बना लेती है.    

क्यों नहीं हो सकी रोनाल्डो की हैट्रिक?

अब एक पूरा हाफ, सिर्फ एक गोल. रोनाल्डो के लिए हैट्रिक उतना मुश्किल नहीं था. लेकिन, फिर भी वो हैट्रिक नहीं कर पाए. कई लोग कहेंगे कि मौके बहुत थे. एकाध तो ऐसे मौके बने थे कि लगा गोल हो ही गया. लेकिन, अगले दो गोल में रोनाल्डो के नाम एक नहीं रहा. ऐसा नहीं था पुर्तगाल के मिडफील्डर्स ने मौके नहीं बनाए थे. लेकिन, कई बार ओवरअटैम्प्ट ही चीज़ें खराब कर देती हैं. मैच के दौरान भी ऐसा ही हो रहा था.

दूसरे हाफ में पूरी टीम का एक ही टारगेट था. रोनाल्डो की हैट्रिक. न कि पुर्तगाल के लिए गोल. यही कारण है चौथा गोल गोलकीपर नेमाटोव का सेल्फ गोल रहा. वहीं, 5वां सुपर सब राफेल लियाओ के नाम रहा. हालांकि, लियाओ के नाम भी गोल इसलिए आया कि सेमेडो का पास, जो रोनाल्डो के लिए था. उज्बेकिस्तान के डिफेंडर से डिफलेक्ट होकर लियाओ के पास चला गया. उनके पास गोल करने के लिए खाली गोल पोस्ट था. उन्होंने बॉल को सीधा नेट में पहुंचा दिया. वरना ये मूव भी उन सारे मूव्स की तरह बेकार हो जाता, जो सिर्फ इसलिए बेकार हो गया क्योंकि पूरी टीम रोनाल्डो की हैट्रिक कराने के लिए खेल रही थी. उज्बेकिस्तान के डिफेेंडर्स भी ये समझ गए थे कि पुर्तगाल के प्लेयर्स क्या कर रहे हैं.

पुर्तगाल की असली चुनौती कोलंबिया

रोनाल्डो 20 साल से राज इसलिए नहीं कर रहे कि टीम उनकी मदद कर रही है. वो इसलिए टॉप पर हैं, क्योंकि वो खास हैं. वो सही समय पर सही जगह पहुंचना जानते हैं. अगर पूरी पुर्तगाल की टीम अंतिम हाफ में गोल करने पर ध्यान लगाती तो शायद वाे हैट्रिक भी आ जाता. खैर उनकी हैट्रिक से बड़ी है पुर्तगाल की जीत. टीम बहुत दमदार है. बेंच स्ट्रेंथ भी तगड़ी है. लेकिन, ग्रुप स्टेज की असली परीक्षा अभी बाकी है. टीम को अब अगले मैच में कोलंबिया से खेलना है. कोलंबिया लगातार दो मैच जीतकर अंतिम 32 में जगह बना चुकी है. अब ये देखने लायक होगा कि रोनाल्डो की अगुवाई वाली टीम अगले मुकाबले में क्या जादू बिखेरती है. 

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