रणजी ट्रॉफी के बाद दलीप ट्रॉफी में भी दानिश मालेवर का कमाल, डेब्यू मैच में ही जड़ा दोहरा शतक
दानिश मालेवर ने महज 220 गेंदों में अपना दोहरा शतक पूरा किया. इसमें 36 चौके और एक छक्का शामिल था. 203 रन बनाकर वो रिटायर आउट हो गए. दानिश ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट की महज 16 पारियों में अपने 1000 रन पूरे कर लिए हैं.

सेंट्रल जोन के युवा बल्लेबाज दानिश मालेवर (Danish Malewar) ने दलीप ट्रॉफी (Duleep Trophy) में एतिहासिक दोहरा शतक लगा दिया है. दानिश ने नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ मुकाबले के दूसरे ही दिन अपना दोहरा शतक पूरा कर लिया. वो विदर्भ (Vidarbh) के पहले ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने दलीप ट्रॉफी में दोहरा शतक लगाया है. 21 साल के दानिश का दलीप ट्रॉफी में ये डेब्यू मैच था.
दानिश ने महज 220 गेंदों में अपना दोहरा शतक पूरा किया. इसमें 36 चौके और एक छक्का शामिल था. 203 रन बनाकर वो रिटायर आउट हो गए. दानिश ने महज 16 पारियों में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अपने 1000 रन पूरे कर लिए हैं. दानिश की पारी की मदद से सेंट्रल जोन ने 532 रन बनाकर पारी घोषित की. दानिश के अलावा टीम के कप्तान रजत पाटीदार ने भी अहम भूमिका निभाई. उन्होंने 96 गेंदों में 125 रन बनाए. पाटीदार की पारी में 21 चौके और तीन छक्के शामिल थे. यश राठौड़ ने 87 रन का योगदान दिया. ओपनर आर्यन जुयाल 60 रन बनाकर रिटायर हर्ट हो गए. नॉर्थईस्ट की ओर से आकाश चौधरी ने दो और फेरिजम जोतिन ने एक विकेट लिया. दानिस के कारण टीम मजबूत स्थिति में है.
मालेवर का शानदार क्रिकेटअगर मालेवर की बात करें तो इस खिलाड़ी का घरेलू क्रिकेट करियर बहुत बड़ा नहीं है. 2024 के रणजी सीजन में फर्स्ट क्लास डेब्यू किया. उन्होंने विदर्भ के लिए कई खास पारी खेली. मुंबई के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने पहली पारी में 79 और दूसरी पारी में 29 रन बनाए थे. विदर्भ ने ये मैच 80 रन से जीता था. इसके बाद केरल के खिलाफ फाइनल में उन्होंने पहली पारी में 153 और दूसरी पारी में 73 रन बनाकर टीम को खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई. इस सीजन में उन्होंने 52 की औसत से 783 रन बनाए. वहीं अपने फर्स्ट क्लास करियर में उन्होंने कुल मिलाकर 10 मैच खेले हैं. इसमें उन्होंने 55 के औसत से 986 रन बनाए हैं. उनके नाम चार शतक और दो अर्धशतक थे. अब इस लिस्ट में एक दोहरा शतक भी शामिल हो गया है.
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मालेवर को मिला पिता का साथमालेवर के पिता विष्णु क्रिकेट फैन थे. उन्होंने हमेशा से यही सोचा था कि अगर उनका बेटा हुआ तो वो उसे क्रिकेटर बनाएंगे. विष्णु की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. दानिश ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि महज सात साल की उम्र में पिता ने उन्हें अकेडमी में डाल दिया था. जब वो जूनियर क्रिकेट खेलते थे तो लोग उन्हें इस्तेमाल किए हुए बैट, पैट और ग्लव्स दे देते थे. अंडर-19 टीम का हिस्सा बनने के बाद दानिश को आर्थिक मदद मिलनी लगी और चीजें उनके लिए थोड़ी आसान हुई.
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