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बेन स्टोक्स: वर्ल्ड कप हराया, दारू पीकर दंगा किया, फिर 2 साल बाद टीम को कप जितवा दिया

जानिए स्टोक्स की पूरी कहानी, कैसे उन्होंने अपने कोच को ग़लत साबित कर दिया.

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4 जून 2020 (अपडेटेड: 4 जून 2020, 05:43 AM IST)
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Ben Stokes, एक बिगड़ैल बच्चा जो इंग्लैंड का हीरो बना
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कौन कहता है कि टेस्ट क्रिकेट बोरिंग हो चुका है? एशेज यानी कि राख. इसी राख भरी ट्रॉफी के लिए भिड़ने वाले दो देश - ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड. रोमांच की नई परिभाषाएं गढ़ रहे हैं. इंग्लैंड में हुई 2019 एशेज सीरीज याद करिए. सांसों की रफ्तार को क्षितिज तक पहुंचाने वाले मुकाबले. तीसरा टेस्ट मुकाबला रोमांच का परचम था. मैच के चौथे दिन ही नतीजा आ गया. इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को 1 विकेट के अंतर से शिकस्त दे दी है. 5 मैचों की सीरीज 1-1 से बराबर हो गई.
इस एशेज सीरीज का तीसरा मैच जबरदस्त रोमांचक रहा. पहली पारी में 67 रनों के स्कोर पर सिमटने वाली इंग्लैंड ने मैच खत्म होते-होते पासा उल्टा कर दिया. तीसरे टेस्ट को इंग्लैंड ने 1 विकेट से जीत लिया है. चौथी पारी में इंग्लैंड को जीतने के लिए 359 रनों का लक्ष्य मिला था. लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने 286 के स्कोर पर 9 विकेट गंवा दिए थे. लेकिन एक तरफ बेन स्टोक्स अपना पैर जमाए खड़े थे. अंतिम विकेट के लिए नाबाद 76 रन जुड़े. इसमें से जैक लीच के सिर्फ 1 रन थे. बाकी रन बेन स्टोक्स के बल्ले से निकले थे. इंग्लैंड की इस असाधारण जीत के नायक बेन स्टोक्स 135 रन बनाकर नाबाद रहे. उन्हें मैन ऑफ द मैच के खिताब से नवाजा गया.
ये वही बेन स्टोक्स हैं जिन्होंने डेढ़ महीने पहले इंग्लैंड को पहली बार वर्ल्ड कप चैंपियन बनाया था. वर्ल्ड कप फाइनल के नायक बेन स्टोक्स. जानिए उनकी पूरी कहानी:

आप सबसे बेहतर तभी हो सकते हैं जब आपके अंदर विजेता बनने का इरादा हो और आपने असफल होने का खौफ भुला दिया हो. - बेन स्टोक्स की बाईं बांह पर गुदे टैटू पर यही लिखा है.

और बेन स्टोक्स विजेता की तरह ही खेले. पूरे वर्ल्ड कप के दौरान. जब भी टीम फिसली, स्टोक्स ने अपना हाथ दिया. इंग्लैंड के वर्ल्ड कप विजय के सफर को उन्होंने अपने कंधों पर ढोया. और मंज़िल तक लेकर गए. वर्ल्ड कप में कुल 465 रन बनाए और 7 विकेट लिए. फाइनल में हार रही टीम को जीत के बराबर लाकर खड़ा कर दिया. जब टीम के हाथों में वर्ल्ड कप की ट्रॉफी आई. उनके चेहरे पर पसरा सुकून इस वर्ल्ड कप में मेजबान टीम का कुल हासिल था.
ben stokes wife claire
फोटो सोर्स: रॉयटर्स

फाइनल जीतने के बाद बेन स्टोक्स की वाइफ क्लारा रैटक्लिफ जिस अंदाज से मिलीं, वह तस्वीर बेहद प्यारी थी. क्लारा पेशे से स्कूल टीचर हैं. 2011 में पहली बार मिले. 2013 में वे पहली बार माता-पिता बने. यह अनुभव उनके लिए बिलकुल नया था. उन्हें जीवन में पहली बार जिम्मेदारी का अहसास हो रहा था. 2017 में दोनों ने शादी कर ली. बेन मानते हैं कि क्लारा और उसके परिवार ने उन्हें कमजोर पलों में ताकत दी. उनकी कामयाबी में एक हिस्सा उनका भी है.
ऐसे पहुंचे इंग्लैंड
4 जून 1991 को न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में पैदा हुए बेन स्टोक्स. 28 साल बाद वर्ल्ड कप के फाइनल में उसी देश के खिलाफ खेलने उतरे. और, उस मुकाबले में मैन ऑफ द मैच भी बने. दुनिया ऐसी ही है. विचित्रताओं से भरी.
फाइनल मैच के बाद स्टोक्स के माता-पिता ने एक इंटरव्यू दिया. वे अब भी न्यूजीलैंड में रहते हैं. वर्ल्ड कप फाइनल में वे न्यूजींलैंड को सपोर्ट कर रहे थे. लेकिन अपने बेटे के खेल से काफी खुश हैं. स्टोक्स की मां डेबोरा पूरे मैच के दौरान अपने कंबल से बाहर नहीं निकली.
ben stokes parent
फोटो सोर्स: रॉयटर्स

पिता गेरार्ड मजाकिया लहजे में कहते हैं,
"शायद इस वक्त मैं न्यूजीलैंड में सबसे नापसंद किया जाने वाला पिता हूं."
बेन 2003 में 12 साल के थे. तब उनके पिता इंग्लैंड चले आए थे. गेरार्ड को इंग्लैंड में वर्किंगटन रग्बी क्लब का हेड कोच बनाया गया था. 20 साल पहले वे उसी क्लब के लिए रग्बी खेलते थे. एक मैच खेलने के दौरान उनकी बीच वाली उंगली की हड्डी उखड़ गई. गेरार्ड पूरा सीजन दो उंगलियों को टेप से बांधकर खेलते रहे. डॉक्टर ने सर्जरी की सलाह दी. पैसों की तंगी थी. सर्जरी करवाने के बदले उन्होंने अपनी उंगली कटवा दी. लेकिन खेलना नहीं छोड़ा. बेन को वह जीवटता, जुझारूपन विरासत में मिला है. बेन अपने पिता का वह बलिदान आज तक भूले नहीं हैं.
जब रात भर जेल में बंद रहे
बेन ने इंग्लैंड में ही क्रिकेट सीखना शुरू किया. वे प्रैक्टिस सेशन में सबसे अंत तक रुकते थे. जब अंधेरा बढ़ जाता, कोच उनके लिए अपनी कार की लाइट ऑन कर देते थे. बेन को प्रैक्टिस के लिए एक्सट्रा टाइम मिल जाता था. आज बेन एक कम्पलीट क्रिकेटर हैं. इंसान के तौर पर भी. ये परिपक्वता लंबे समय के बाद आई है. कभी उनके पीने की लत ने उनका करियर बर्बादी की दहलीज पर ला दिया था. गुस्सा हमेशा उनकी नाक पर रहता था.
13 साल की उम्र में उन्होंने गुस्से में दरवाजे पर मुक्का मारकर अपना हाथ जख्मी कर लिया था. 2011 में पुलिस नाके पर बदसलूकी करते हुए पकड़े गए. रात भर हवालात में रहना पड़ा. बेन स्टोक्स उस रात को अपने जीवन की सबसे बदसूरत रात मानते हैं. सुबह जब उनकी नींद खुली तो उन्हें कैदियों वाली थाली में खाना दिया गया. बेन ने बाद में उन लम्हों को याद करते हुए बताया कि उस वक्त उन्हें हॉलीवुड फिल्म ‘शॉशंक रिडेम्पशन’ की याद आ गई थी.
ben stokes
फोटो सोर्स: एपी

क्रिकेट करियर
बेन 2009 में 18 की उम्र में डरहम क्रिकेट एकेडमी के लिए चुने गए. उसी साल अंडर-19 वर्ल्ड कप में इंडिया के खिलाफ शतक लगाया. 2011 में उन्हें इंग्लैंड की तरफ से खेलने का मौका मिला. आयरलैंड के खिलाफ. पहले मैच में वे सिर्फ 3 रन बना पाए. हालांकि फिर वो जम गए. अब तक 63 टेस्ट में 4056 रन और 147 विकेट जबकि 95 वनडे में 2682 रन के साथ-साथ 70 विकेट हासिल कर चुके हैं. टेस्ट और वनडे के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडरों की रैंकिंग में टॉप -5 में बेन स्टोक्स का नाम आता है. टेस्ट में सबसे तेज 250 रन बनाने का रिकॉर्ड स्टोक्स के नाम पर ही है. 196 गेंदों पर. साउथ अफ्रीका के खिलाफ उन्हीं के घर केपटाउन में. विजडन क्रिकेट का धार्मिक ग्रंथ है. उसने इस पारी के बारे में लिखा- 'एक रक्तरंजित आक्रमण'.
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फोटो सोर्स: रॉयटर्स

कोच को कहा- आपको गलत साबित कर दूंगा
फरवरी 2013 में वे इंग्लैंड लायंस की तरफ से ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गए. देर रात तक ड्रामा करने की वजह से ऑस्ट्रेलिया से वापस भेज दिया गया था. उनका एक साथी खिलाड़ी मैट कोल्स भी इस ड्रामे में शामिल था. उसे भी बेन के साथ इंग्लैंड भेज दिया गया.
कोच एंडी फ्लावर ने गुस्से में कहा था,
“मुझे नहीं लगता कि तुम इंग्लैंड के लिए खेलना चाहते हो. तुम सिर्फ अपने दोस्तों के साथ नौटंकी ही कर सकते हो.”
बेन ने अपनी उंगली कोच की तरफ तान कर जवाब दिया,
“मैं आपको गलत साबित कर दूंगा.”
मार्च 2014 में बेन ने एक बार फिर अपनी कलाई घायल कर ली. खराब फॉर्म से नाराज होकर उन्होंने ड्रेसिंग रूम में लॉकर पर जोर से हाथ मार दिया. 10 मिनट तक उन्हें चोट का अहसास नहीं हुआ. जब अहसास हुआ, तो हाथों पर टेप बांधकर नॉर्मल हो गए. मानो कुछ हुआ ही ना हो. बेन स्टोक्स पीने के शौकीन हैं. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि 20 पेग लगाने के बाद उन्हें गिनती याद नहीं रहती. यही आदत एक बार उनका करियर खत्म करने ही वाली थी.
सीरीज के दौरान फिर शराब पीकर मारपीट की
अगस्त-सितंबर 2017 में वेस्ट इंडीज की टीम इंग्लैंड दौरे पर आई थी. वनडे सीरीज का तीसरा मुकाबला ब्रिस्टल में था. तारीख थी 24 सितंबर. इंग्लैंड ने मैच 124 रनों के बड़े अंतर से जीता था. स्टोक्स ने 73 रनों की पारी खेली थी. उस जीत का नशा कहें या अपनी परफॉरमेंस का घमंड, स्टोक्स उस रात पहुंचे एम्बार्गो नाईटक्लब. लगभग 10 पेग लगाने के बाद स्टोक्स बाहर निकले.
रात का तीसरा पहर शुरू हो रहा था. क्लब के बाहर खड़े दो लोगों से उनकी कहासुनी शुरू हुई. धीरे-धीरे कहासुनी लात-घूसे तक पहुंच गई. जमकर मारपीट हुई. पुलिस उठाकर ले गई. यह सब कुछ एक इंटरनैशनल सीरीज के बीच में हो रहा था. अगली सुबह उन्हें जब छोड़ा गया, स्टोक्स ने टीम के मैनेजर एंड्र्यू स्ट्रॉस से माफी मांगी. वर्ल्ड कप फाइनल के बाद स्ट्रॉस ने स्वीकारा कि उस घटना ने बेन स्टोक्स को पूरी तरह बदलकर रख दिया. स्टोक्स को उस सीरीज के बाकी के दो मैचों में खेलने नहीं दिया गया. उनके आगे के करियर पर ताला लगने की नौबत आ चुकी थी. अगस्त 2018 में उस केस में बेन स्टोक्स को बरी कर दिया गया.
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फोटो सोर्स: एपी

विलेन स्टोक्स
टी20 वर्ल्ड कप 2016 का फाइनल. इंग्लैंड और वेस्ट इंडीज के बीच. मैदान था ईडेन गार्डेन्स का और तारीख थी 3 अप्रैल. टॉस जीता डेरेन सैमी ने और बैटिंग के लिए बुलाया इंग्लैंड को. इंग्लैंड के 156 के जवाब में वेस्ट इंडीज 19 ओवर के बाद 6 विकेट खोकर 137 रन बना सकी थी. आखिरी ओवर में इंग्लैंड को 18 रन बचाने थे. कप्तान मॉर्गन ने गेंद स्टोक्स को थमाई. पहली ही गेंद पर ब्रेथवेट ने छक्का मार दिया.
कप्तान की घबराहट बढ़ी. स्टोक्स की समझाइश हुई. मगर अगली गेंद भी बिना टप्पा खाए बाउंड्री पार पहुंच चुकी थी. अगली दो गेंदों पर भी ब्रेथवेट बेरहम साबित हुए. इंग्लैंड के मुंह तक पहुंचा वर्ल्ड कप का कौर किसी ने एक झटके में छीन लिया. 4 गेंदों पर लगातार 4 छक्के खाकर बेन स्टोक्स अपने देश में खलनायक बन चुके थे. तब टीम के कोच ट्रेवर बेलिस ने उनका बचाव करते हुए कहा था कि स्टोक्स टीम की दिल और जान हैं. एक ओवर उनके टैलेंट का आधार नहीं हो सकता.

ग्रीक कहानियों में फीनिक्स नाम की चिड़िया का जिक्र आता है. कहावत है कि वह अपने पूर्वज की राख से जन्म लेती है. मिटते-मिटते साकार हो जाने की लालसा. बेन की देह पर एक टैटू उस चिड़िया का भी है. वे हीरो बनने के सफर में कई बार जीरो बने. लेकिन ऊपर उठने की लालसा नहीं छोड़ी. उन्होंने बार-बार नीचे गिरकर ज्यादा ऊंची उड़ान भरी. यह उड़ान इतनी ऊंची है, जहां तक पहुंचने के लिए बेन से काफी बेहतर बनकर दिखाना होगा. खिलाड़ी के तौर पर भी और इंसान के तौर पर भी. क्योंकि हर एक चिड़िया को फीनिक्स का नसीब हासिल नहीं होता.




वीडियो: बेन स्टोक्स की हवा में कलाबाजी का काल्पनिकता से कोई वास्ता नहीं है

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