'अक्षर से बेहतर बदोनी... क्या बकवास है'? श्रीकांत ने गंभीर को घेर लिया
भारतीय ऑलराउंडर Washington Sundar अपनी पसली के दर्द के कारण टीम इंडिया से बाहर हो गए हैं. उनकी जगह मैनेजमेंट ने दिल्ली के कप्तान रहे Ayush Badoni को टीम में मौका दिया है.

ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर (Washington Sundar) न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से बाहर हो गए हैं. उनकी जगह टीम मैनेजमेंट ने युवा खिलाड़ी आयुष बदोनी (Ayush Badoni) को टीम में जगह दी है. उन्हें सुंदर का लाइक-टू-लाइक रिप्लेसमेंट बताया जा रहा है. हालांकि, पूर्व खिलाड़ी क्रिस श्रीकांत को यह सब बकवास लग रहा है. उन्हें लगता है कि अक्षर पटेल और ऋतुराज गायकवाड़ जैसे खिलाड़ी इस जगह के ज्यादा बड़े हकदार थे.
श्रीकांत ने उठाए सवालश्रीकांत ने सवाल उठाए कि बदोनी को टीम में जगह केवल इसलिए मिली क्योंकि जब गंभीर लखनऊ सुपर जायंट्स के मेंटॉर थे, आयुष उस टीम का हिस्सा थे. श्रीकांत ने कहा,
अक्षर पटेल, बदोनी, नीतीश रेड्डी और ऋतुराज गायकवाड़ में से किन दो को टीम में होना ही चाहिए? बदोनी लखनऊ सुपर जायंट्स में खेले थे और वहां गौतम गंभीर उनके मेंटॉर थे. मुझे इसके अलावा कोई और कारण नजर नहीं आता. और क्या हो सकता है? किस आधार पर?
श्रीकांत ने इस फैसले को बकवास बताया है. उन्होंने कहा कि आईपीएल के प्रदर्शन के दम पर किसी भी खिलाड़ी को वनडे में जगह देना सही नहीं है. उन्होंने कहा,
सितांशु कोटक ने बताई वजहआयुष बदोनी के इस प्रदर्शन को देखते हुए, कोई उम्मीद नहीं. आईपीएल में उनका रिकॉर्ड कैसा है? आईपीएल और वनडे क्रिकेट अलग-अलग हैं. उन्होंने कुछ खास कमाल नहीं किया है. वो ऐसे खिलाड़ी नहीं हैं जो मैच का रुख बदल सकें. क्या वो छठे नंबर पर आकर छक्के भी मार सकते हैं? समझ नहीं आता. ये सब क्या बकवास है? उन्हें बॉलिंग ऑलराउंडर कैसे माना जा सकता है? अगर ऑलराउंडर की जरूरत है तो अक्षर पटेल को क्यों नहीं लाते? वो तो हर फॉर्मेट में बेहतरीन ऑलराउंडर हैं.
बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने मैच से पहले हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयुष बदोनी के सेलेक्शन का कारण बताया था. उन्होंने कहा,
वह खेल रहे हैं, वह प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने इंडिया ए के लिए कुछ वनडे मैच खेले हैं और अच्छा प्रदर्शन किया है. बेशक, टीम का चयन सेलेक्टर्स करते हैं. जब वॉशिंगटन बाहर होते हैं, तो आप आमतौर पर केवल पांच गेंदबाजों के साथ नहीं जा सकते. उदाहरण के लिए, पिछले मैच में, अगर हमारे पास केवल पांच गेंदबाज होते और वॉशिंगटन चौथे या पांचवें ओवर में चोटिल हो जाते, तो वे ओवर कौन गेंदबाजी करता? इसलिए हर टीम एक छठा गेंदबाजी विकल्प रखना चाहेगी. कभी-कभी, अगर वह वॉशिंगटन जैसा ऑलराउंडर होता है, तो वह उतना ही अच्छा गेंदबाज होता है; कभी-कभी वह एक बल्लेबाज हो सकता है जो गेंदबाजी भी कर सकता है.
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अब जरा आयुष के आंकड़े भी देख लीजिए. बदोनी का फर्स्ट क्लास क्रिकेट में बल्लेबाजी औसत 57.96 है. लेकिन, लिस्ट ए क्रिकेट में उनका प्रदर्शन उतना शानदार नहीं है. उन्होंने लिस्ट ए के 27 मैचों में औसतन 36.47 रन बनाए हैं. हालांकि, इस दौरान उन्होंने 18 विकेट भी लिए हैं. विजय हजारे ट्रॉफी में बल्ले से तीन पारियों में उन्होंने सिर्फ 1, 12 और नाबाद 3 रन बनाए हैं. लेकिन, तीन मैचों में चार विकेट भी लिए हैं. सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में भी उन्होंने 30 से कम के औसत से रन बनाए थे. वहीं, 2025-26 के रणजी सीजन में उन्होंने 218 रन बनाए. यानी यह तो साफ नजर आ रहा है कि बदोनी का सेलेक्शन केवल बल्लेबाजी पर नहीं हुआ है.
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