मनिका बत्रा के लिए दरवाजे बंद, यू-टर्न नहीं लेगा टेबल टेनिस फेडरेशन!
कॉमनवेल्थ गेम्स की चैंपियन रही मनिका बत्रा ने कहा था कि टीटीएफआई ने उन्हें एशियन गेम्स की टीम से बाहर रखने का ठोस कारण नहीं बताया है.

स्टार खिलाड़ी मनिका बत्रा के लिए टेबल टेनिस फेडरेशन के दरवाजे अभी भी बंद हैं. फेडरेशन उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स जाने के लिए अपने नियमों में ढील देने को राजी नहीं है. फेडरेशन ने अपने सेलेक्शन प्रोसेस का बचाव किया है. उनके मुताबिक, जो टीम चुनी गई है उसमें कई बदलाव नहीं होगा.
मनिका बत्रा को कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए टीम में शामिल नहीं किया गया है. उन्होंने फेडरेशन के सेलेक्शन क्राइटेरिया पर सवाल उठाते हुए सफाई मांगी थी. फेडरेशन से जुड़े सूत्र ने बताया कि मनिका के नाम पर चर्चा हुई थी. IOA ने जो टाइमलाइन और सेलेक्शन पॉलिसी बनाई, उसके तहत ही फैसला किया गया.
फेडरेशन ने किया सेलेक्शन क्राइटेरिया का बचावफेडरेशन के सेलेक्शन क्राइटेरिया के मुताबिक, नेशनल रैंकिंग के 50%, इंटरनेशनल रैंकिंग के 40% और सेलेक्टर्स के 10% पॉइंट्स को मिलाकर खिलाड़ियों का चयन किया गया है. मनिका ने इस दौरान घरेलू टूर्नामेंट्स में हिस्सा नहीं लिया और इसी कारण उनकी नेशनल रैंकिंग को जोड़ा नहीं गया. अगर वह 9 जून तक इंटरनेशनल रैंकिंग में टॉप 50 में होतीं तो उन्हें डायरेक्ट मौका मिल जाता. हालांकि, वह 51वें स्थान पर थीं.
इन नियमों को ध्यान में रखते हुए ही सेलेक्शन पैनल में महिला टीम में पहले चार स्पॉट के लिए सभी एकमत थे. 5वीं जगह के लिए वोटिंग की गई थी. सुर्तिथा मुर्खजी और स्वातिका घोष के लिए पैनल ने वोट किया. सुर्तिथा को आठ वोट मिले और उन्हें टीम में जगह मिली. मनिका बत्रा को रिजर्व टीम में रखा गया है.
यह भी पढ़ें- ओलंपिक एथलीट्स को अब मिलेगा पैसा, IOC ने 130 साल पुरानी परंपरा तोड़ी
कानूनी राह के लिए तैयार हैं मनिकाइससे पहले, मनिका ने कहा था कि पिछले कुछ दिनों से उन्होंने कई लोगों को यह कहते सुना है कि मनिका एशियन गेम्स की टीम में जगह पाने की कोशिश कर रही हैं. विशेष रियायत की गुहार लगा रही है. मनिका ने यह स्पष्ट किया कि वह चयन के लिए गुहार नहीं लगा रही हैं. वह किसी से भी फैसले को पलटने की अपील नहीं कर रही है. वह सिर्फ जवाब मांग रही हैं.
कॉमनवेल्थ गेम्स की चैंपियन रहीं मनिका ने कहा था कि टीटीएफआई ने उन्हें टीम से बाहर रखने का ठोस कारण नहीं बताया है. अगर उन्हें टीम से बाहर रखने के कारण का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता तो उनके पास कानूनी कार्रवाई करने का विकल्प भी है. उनके मुताबिक, खिलाड़ियों को यह जानने का अधिकार है कि फैसले कौन कर रहा है तथा उनकी योग्यता क्या है? सेलेक्शन पॉलिसी के कितने सदस्यों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है.
वीडियो: भारत में जन्मे निखिल चौधरी ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए खेलेंगे?

