1982 का 'डिस्ग्रेस ऑफ गिजॉन', जिसने FIFA को नियम बदलने पर मजबूर कर दिया
1982 वर्ल्ड कप में अल्जीरिया की आगे की राह ऑस्ट्रिया और वेस्ट जर्मनी के बीच मैच पर टिकी थी. मैच में अगर वेस्ट जर्मनी की टीम 1-0 से जीतती, तो ऑस्ट्रिया और वेस्ट जर्मनी दोनों टीमें अगले राउंड के लिए क्वालीफाई कर लेती. ऐसे में अल्जीरिया बाहर हो जाती. और हुआ भी कुछ ऐसा ही. लेकिन अजीब ढंग से.

FIFA World Cup 2026 में 28 जून को अल्जीरिया और ऑस्ट्रिया की टीमें आमने सामने होंगी. केन्सस सिटी में होने वाला आखिरी ग्रुप मैच दोनों टीमों के लिए राउंड ऑफ 32 का रास्ता तय करेगा. इस मैच से ये भी तय होगा कि कौन सी टीम राउंड ऑफ 16 में किससे भिड़ सकती है. इन सब के बीच 44 साल पहले हुए एक मैच की चर्चा जोरों पर है. जिसे फुटबॉल इतिहास में ‘डिसग्रेस ऑफ गिजॉन’ (Disgrace of Gijon) के नाम से जाना जाता है.
दरअसल, 1982 के वर्ल्ड कप में अल्जीरिया की टीम पहली बार क्वालीफाई की थी. टूर्नामेंट के शुरू में ही उत्तरी अफ्रीका की इस टीम ने सबको चौंका दिया. पहले मैच में उन्होंने मजबूत वेस्ट जर्मनी को 2-1 से हराया. पूरी दुनिया हैरान रह गई. अल्जीरिया के खिलाड़ी और फैंस खुशी से झूम उठे थे.
उस समय वर्ल्ड कप में 24 टीमें थीं. हर ग्रुप में 4. ग्रुप से टॉप-2 टीमें अगले राउंड में जाती थीं. अल्जीरिया की टीम ऑस्ट्रिया के खिलाफ अपना दूसरा मैच हार गई. लेकिन चिली के खिलाफ टीम ने 3-2 से अगला मैच अपने नाम किया. तीन मैचों में उनके 4 पॉइंट्स थे. आखिरी मैच ऑस्ट्रिया और वेस्ट जर्मनी के बीच होना था. जो अल्जीरिया की आगे की राह तय करता.
क्या हुआ था गिजॉन में?स्पेन का गिजॉन शहर ये मैच होस्ट कर रहा था. इस मैच में अगर वेस्ट जर्मनी की टीम 1-0 से जीतती, तो ऑस्ट्रिया और वेस्ट जर्मनी दोनों टीमें अगले राउंड के लिए क्वालीफाई कर लेती. ऐसे में अल्जीरिया बाहर हो जाती. और हुआ भी कुछ ऐसा ही. लेकिन अजीब ढंग से.
मैच शुरू हुए सिर्फ 10 मिनट हुए थे कि होर्स्ट ह्रुबेश ने वेस्ट जर्मनी को 1-0 की लीड दिला दी. इसके बाद जो हुआ, वो फुटबॉल के लिए कलंक बन गया. दोनों टीमें गेंद को सिर्फ पास करते रहे. कोई अटैक नहीं. कोई टैकल नहीं. कोई गोल करने की कोशिश नहीं. दोनों टीमोें के प्लेयर्स बस ग्राउंड पर समय बिता रहे थे.

जर्मन खेल मैगजीन Kicker ने इस मैच को लेकर लिखा,
"20 मिनट बाद कोई भी अटैक नहीं कर रहा था. ऑस्ट्रियाई खिलाड़ी आगे बढ़ने की कोशिश भी नहीं कर रहे थे. कोई भी सीरियस फुटबॉल खेलना नहीं चाह रहा था. सिर्फ गेंद इधर-उधर धकेली जा रही थी."
फ्रेंच अखबार L’Equipe ने तो इस मैच पर भयंकर गुस्सा निकाला. अखबार ने लिखा,
"दोनों टीमों के 22 खिलाड़ियों को रेड कार्ड दिखाना चाहिए था."
स्टेडियम में बैठे स्पेनिश दर्शक सफेद स्कार्फ लहरा-लहराकर विरोध जता रहे थे. ऑस्ट्रियन टीवी पर कमेंटेटर रॉबर्ट सीगर ने दर्शकों से कहा, "इसे बंद कर दो!"
अल्जीरिया के महान खिलाड़ी रबाह मद्जेर (पूर्व अफ्रीकन फुटबॉलर ऑफ द ईयर) ने बाद में बताया,
"हमें कुछ अंदेशा तो था, लेकिन फिर भी हम सब बहुत गुस्सा, हैरान और दुखी थे. दो बड़े फुटबॉल देशों ने मिलकर एक छोटे से देश अल्जीरिया को, जो पहली बार विश्व कप खेल रहा था, बाहर करने की साजिश रची. ये बहुत शर्मनाक था."
हालांकि, जर्मन डिफेंडर पॉल ब्राइटनर ने इसे सही ठहराया. उन्होंने कहा,
"अगर पब्लिक ये नहीं समझती कि क्वालीफाई करना ही सबसे जरूरी था, तो पब्लिक मूर्ख है."

FIFA ने भी ये कह दिया कि दोनों टीमें नियमों के दायरे में थीं. और अल्जीरिया का विरोध खारिज कर दिया गया.
अल्जीरिया बाहर, जर्मनी अगले राउंड मेंइसके बाद वेस्ट जर्मनी की टीम सेकंड राउंड में इंग्लैंड और होस्ट स्पेन को पीछे छोड़कर सेमीफाइनल में पहुंच गई. वहां फ्रांस को पेनल्टी शूटआउट में हराया, लेकिन फाइनल में इटली से हार गई. ऑस्ट्रिया की टीम सेकंड ग्रुप में फ्रांस के पीछे रही.
अल्जीरिया के खिलाड़ी और देश के लोग इस हार से काफी निराश थे. मद्जेर कहते हैं,
"बाद में कई लोगों ने माफी मांगी. ये अच्छा है कि वो अपनी गलती मान रहे थे, लेकिन हमारे लिए कुछ नहीं बदला."

‘डिसग्रेस ऑफ गिजॉन’ के बाद FIFA ने एक बड़ा बदलाव किया. अब वर्ल्ड कप के ग्रुप स्टेज में आखिरी मैच एक साथ खेले जाते हैं. ताकि किसी टीम को आगे के सिनारियो के बारे में कोई अंदाजा न लगे. माने, ये न पता हो कि उसे कितना गोल चाहिए या कितने गो से हार-जीत तय करनी है. इससे मैच फिक्स करने या साजिश रचने की गुंजाइश भी कम हो गई.
2026 में ट्रिकी सिचुएशन2026 में अल्जीरिया और ऑस्ट्रिया फिर आमने-सामने हैं. अल्जीरिया के पास रियाद महरेज जैसे अनुभवी खिलाड़ी हैं. लेकिन फिर भी ये मैच दोनों टीमों के लिए ट्रिकी होने वाला है. इस वक्त दोनों के पास 3-3 पॉइंट्स हैं. अब ये देखना इंटरेस्टिंग होगा कि कौन सी टीम ये मैच जीतना चाहती है. क्योंकि जीतने वाली टीम ग्रुप में दूसरे नंबर पर फिनिश करेगी. और राउंड ऑफ 32 में उसका मैच स्पेन के खिलाफ होगा.
यानी, स्पेन जैसी टीम से नॉकआउट मैच खेलना अपने आप बड़ी बात है. कोई भी टीम विनिसियस जूनियर, नेमार जूनियर, और कून्हा जैसे प्लेयर्स के सामने एक्सपोज हो सकती है.
फुटबॉल में कई बार साजिशें, पैसा और राजनीति खेल को खराब करती रही है. लेकिन ‘डिसग्रेस ऑफ गिजॉन’ आज भी वर्ल्ड कप के सबसे शर्मनाक पलों में गिना जाता है. ये याद दिलाता है कि फेयर प्ले, स्पिरिट और सम्मान कितना जरूरी है.
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