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'खिलाड़ियों के साथ काफी बुरा...' डी विलियर्स ने ब्रॉन्को टेस्ट को लेकर क्या कह डाला?

टीम इंडिया के स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच एड्र‍ियन ली रॉक्स (Adrian Le Roux) के सुझाव पर ब्रॉन्को टेस्ट (Bronco Test) शुरू हो चुका है. अब इसको लेकर दिग्गज क्रिकेटर एबी डिविलियर्स (AB De villers) की प्रतिक्रिया सामने आई है.

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28 अगस्त 2025 (अपडेटेड: 28 अगस्त 2025, 02:58 PM IST)
ABD, Branco Test, India
डी विलियर्स ने ब्रैंको टेस्ट को लेकर बड़ी बात कह दी (फोटो: AP)
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इंडियन क्रिकेटर्स को अब फिटनेस साबित करने के लिए सिर्फ यो-यो टेस्ट ही नहीं बल्कि ब्रॉन्को टेस्ट से भी गुजर रहे हैं. हाल ही में एक रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया था. जिसके मुताबिक टीम के स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच एड्र‍ियन ली रॉक्स (Adrian Le Roux) के सुझाव पर ब्रॉन्को टेस्ट (Bronco Test) शुरू हुआ है. अब इसको लेकर दिग्गज क्रिकेटर एबी डिविलियर्स (AB De villers) की प्रतिक्रिया सामने आई है.

डीविलियर्स के मुताबिक शुरुआत में नाम सुनकर वो इस टेस्ट के बारे में कुछ भी नहीं समझ पाए थे. उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, 

जब टीम ने मुझे इसके बारे में बताया तो मैंने कहा, 'ये Bronco Test क्या होता है?' लेकिन जब उन्होंने मुझे समझाया तो मुझे तुरंत समझ आ गया. मैं तो ये टेस्ट सोलह साल की उम्र से करता आ रहा हूं. यहां साउथ अफ्रीका में हम इसे स्प्रिंट रिपीट एबिलिटी टेस्ट (Sprint Repeat Ability Test) कहते हैं.

ये भी पढ़ें: अब सिर्फ यो-यो टेस्ट से नहीं चलेगा काम, अब प्लेयर्स को मुश्किल 'ब्रॉन्को टेस्ट' से भी गुजरना होगा

डीविलियर्स ने आगे कहा कि ये ड्रिल कई बार उन्हें हांफने पर मजबूर कर देती थी, खासकर मुश्किल हालात में. एबी डिविलियर्स ने कहा,

 ये सबसे खराब एक्सरसाइज में से एक है जो आप कर सकते हो. मुझे बहुत अच्छे से याद है साउथ अफ्रीका की ठंडी सुबहों में इसे करना काफी मुश्किल होता था. मैंने प्रिटोरिया यूनिवर्सिटी और SuperSport Park में ये टेस्ट दिया है. वहां ऑक्सीजन बहुत कम होता है. जो कि समुद्र लेवल से कुल 1500 मीटर ऊपर है. ऐसे में टेस्ट के दौरान ऑक्सीजन की कमी और फेफड़ों में जलन साफ महसूस होती थी.

अश्विन ने भी चेताया

वहीं, रविचंद्रन अश्विन ने भी इस टेस्ट को लेकर टीम मैनेजमेंट को चेतावनी दी और ट्रेनिंग के तरीकों में अचानक बदलाव से सावधान रहने को कहा. अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, 

जब ट्रेनर बदलते हैं तो टेस्टिंग मेकैनिज्म भी बदल जाता है... खिलाड़ियों को इसमें काफी मुश्किलें आती हैं. कई मामलों में इससे चोट लगने का खतरा भी रहता है.

क्या होता है ब्रॉन्को टेस्ट?

ब्रॉन्को टेस्ट मूल रूप से रग्बी प्लेयर्स के लिए होता है. इसमें एक प्लेयर को एक बार में पहले 20 मीटर की छोटी दौड़ लगानी होती है, इसके बाद 40 मीटर और फिर 60 मीटर की. जब प्लेयर इसे पूरा कर लेता है तो इसे वन सेट यानी एक सेट माना जाता है. एक प्लेयर को ऐसे 5 सेट्स लगाने होते हैं, वो भी बिना रुके. यानी बिना रुके एक प्लेयर को इस तरह कुल 1200 मीटर दौड़ना होता है. इस टेस्ट को पूरा करने के लिए एक प्लेयर के पास कुल 6 मिनट का समय होता है.  रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि टीम के कुछ टॉप प्लेयर्स ने बीसीसीआई (BCCI) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, बेंगलुरु (COE) में ब्रॉन्को टेस्ट दे भी दिया है. BCCI पहले ही यो-यो टेस्ट कराती है. इसमें टॉप क्र‍िकेटर्स के लिए 2 किलोमीटर की टाइम ट्रायल होती है.

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