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ठंड के मौसम में बार-बार ज़ुकाम होता है तो तुरंत ये काम करें

ऐसा क्यों होता है, डॉक्टर बता रहे हैं.

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ये इन्फेक्शन संक्रमण से ज़्यादा फैलता है इसलिए संक्रमित व्यक्ति से दूर रहिए!
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सरवत
15 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 15 दिसंबर 2020, 03:47 PM IST)
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यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.
रितेश, ज़ीनत, निहारिका, वसुंधरा, कमलेश और पारीख. ये कुछ उन लोगों के नाम हैं जो Lallantop के व्यूअर्स हैं और जिन्होनें हमें मेल किया. एक कॉमन परेशानी के साथ. क्या? इन सबका सवाल था कि हमें ठंड के मौसम में बार-बार ज़ुकाम क्यों हो जाता है? ऊपर से कोरोना का समय चल रहा है. जिसके लक्षण भी खांसी-ज़ुकाम है. तो अगर कोरोना नहीं भी है और सर्दी , ज़ुकाम हो गया तो डर के मारे जान निकल जाती है. तो ये सारे लोग चाहते हैं कि हम उन्हें ज़ुकाम से बचे रहने का उपाय बताएं. तो चलिए कॉमन कोल्ड के बारे में कुछ बेसिक जानकारी मालूम कर लेते हैं. साथ ही ये भी पता करते हैं कि ये दिक्कत ठंड में क्यों बढ़ जाती है?
क्यों होता है खांसी, ज़ुकाम?
ये हमें बताया डॉक्टर राजीव ने.
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डॉक्टर राजीव कुमार, एमडी मेडिसिन, हिंडाल्को

-सर्दी, ज़ुकाम एक वायरस इन्फेक्शन है ज़्यादातर ये वायरस से ही होता है.
-कुछ केसेज़ में बैक्टीरिया से भी हो सकता है.
सर्दी ज़ुकाम के लक्षण हैं:
-नाक बंद होना
-नाक से पानी आना
-छींकें आना
-गला खराब होना
-हल्की खांसी भी हो सकती है
-Rhinovirus के कारण सर्दी, ज़ुकाम होता है
-दूसरे कई वायरस सर्दी ज़ुकाम के लक्षण लेकर आ सकते हैं
-सर्दी, ज़ुकाम में नाक और नाक के आसपास के एरिया में इन्फेक्शन होता है
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सर्दी, ज़ुकाम एक वायरस इन्फेक्शन है

-अगर ये इन्फेक्शन बढ़ जाए तो ये गले और सांस की नलियों तक फैल सकता है
-कुछ केसेज़ में दूसरों के संपर्क में आने से फैलता है
-अगर किसी को संक्रमण है और वो खांसता या छींकता है तो उससे ड्रॉपलेट्स निकलती हैं जो हवा में जाती है, जब कोई इंसान हवा में फैली हुई ड्रॉपलेट्स को सांस के ज़रिए अंदर लेता है तो उसको भी इन्फेक्शन हो सकता है.
-छींकने या खांसने के बाद अगर संक्रमित व्यक्ति कोई चीज़ छूता है और वही चीज़ कोई और छू ले तो भी इन्फेक्शन फैल सकता है
ठंड में क्यों बढ़ जाता है खांसी, ज़ुकाम
-सर्दियों में हम एक-दूसरे के ज़्यादा पास रहते हैं, घरों में ज़्यादा रहते हैं
-एक ब्लैंकेट कई लोग इस्तेमाल करते हैं, कपड़े भी हम ज़्यादा जल्दी नहीं धोते
- ज़्यादातर लोग पंखे और खिड़कियां बंद रखते हैं जिस कारण ये वायरस हवा में ज़्यादा देर तक रहता है
-ठंड के मौसम में नाक के अंदर की नसें सिकुड़ी हुई रहती हैं, इस वजह से प्रॉपर ब्लड सप्लाई नहीं हो पाता.
-सर्दियों के मौसम में ज़्यादा धूप नहीं मिल पाती. जिस कारण शरीर में विटामिन-डी कम बनता है
-विटामिन-डी एक इम्युनिटी बूस्टर है. अगर वो शरीर में कम बनता है तो इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा होता है
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अगर ये इन्फेक्शन बढ़ जाए तो ये गले और सांस की नलियों तक फैल सकता है

कारण आपको पता चल गए. अब सबसे ज़्यादा पूछा गया सवाल. इससे बचें कैसे और इसका इलाज क्या है?
बचाव
-ये इन्फेक्शन संक्रमण से ज़्यादा फैलता है इसलिए संक्रमित व्यक्ति से दूर रहिए, भीड़ से बचें
-घर पर कई लोग इकट्ठे हैं तो हल्की दूरी बनाए रखें
-सर्दियों में धूप और खुली हवा ज़रूर लें
-खिड़कियां खोलनी चाहिए ताकि ताज़ी हवा आए
-हाथ बार-बार धोइए
-फ़ेस मास्क का इस्तेमाल करें
-गर्म कपड़े पहनें. अगर गर्म कपड़े नहीं पहनेंगे तो ब्लड वेसल्स जकड़ी रहेंगी
-कोशिश करें कपड़े बार-बार धोकर ही पहनें
-सर्दियों में एक ही कपड़ा हम कई-कई दिनों तक पहने रहते हैं. इससे इन्फेक्शन फैलने का ख़तरा बढ़ जाता है
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कंबल, रजाई साफ़ रखें

-ज़्यादा लोग एक ही रजाई इस्तेमाल न करें
इलाज
-अगर ज़्यादा लक्षण आ रहे हैं जैसे तेज़ बुखार आ रहा है, गले में ज़्यादा ख़राश है, गला बंद हो रहा है, नाक जाम हो रही है, नाक बह रही है, छींके बहुत ज़्यादा हैं, या खांसी बहुत ज़्यादा है तो मरीज़ सिंपटोमैटिक इलाज ले सकते हैं
-डॉक्टर से संपर्क करें. वो आपके लक्षणों के हिसाब से आपको दवाई देंगे
-एंटी-एलर्जी दवाइयां काफ़ी मदद करती हैं
-अगर खांसी है तो कफ़ सिरप ले सकते हैं
-नाक बंद है तो नेज़ल ड्रॉप्स या नेज़ल स्प्रे ले सकते हैं
-ज़्यादातर एंटीबायोटिक की ज़रूरत नहीं पड़ती है
-अगर डॉक्टर जांच में पाते हैं आपको बैक्टीरियल इन्फेक्शन हुआ है तो हो सकता है आपको एंटीबायोटिक दी जाए
डॉक्टर साहब ने जो टिप्स बताईं हैं उन्हें कहीं नोट डाउन कर लीजिए. बहुत काम आने वाली हैं. इस मौसम में अपना ख़ूब ख़याल रखिए .


वीडियो
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