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बच्चा मां का दूध नहीं पी रहा तो इसके पीछे के कारण जान लें

कई बार नवजात बच्चे मां का दूध नहीं पी पाते हैं. ऐसा कई वजहों से हो सकता है. जैसे- मां ने बच्चे को अपने स्तन से कैसे अटैच कराया है. अगर मां झुककर बैठी है तो हो सकता है कि शिशु दूध न पी पाए.

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सरवत
| अदिति अग्निहोत्री
16 मई 2024 (पब्लिश्ड: 06:08 PM IST)
What to do if baby is not breastfeeding
बच्चे को दूध पिलाते समय मां पीछे सहारा लेकर बैठे.
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मां का दूध बच्चे के लिए बेहद ज़रूरी होता है. ये तो आपने सबसे सुना ही होगा. इसलिए डॉक्टर ब्रेस्टफ्रीडिंग पर ज़ोर देते हैं. लेकिन, कई बार बच्चा मां का दूध पी नहीं पाता. ये नई मांओं के लिए बहुत टेंशन वाली बात है.  

सीमा कानपुर की रहने वाली हैं. दो महीने पहले उनकी डिलीवरी हुई है. वो बच्चे को अपना दूध पिलाने की पूरी कोशिश करती हैं. मगर, बच्चा दूध पी ही नहीं पा रहा. रोना शुरू कर देता है. सीमा चाहती हैं कि हम अपने शो पर इस बारे में बात करें. क्योंकि ये कई महिलाओं की समस्या है. तो, आज हम डॉक्टर से जानेंगे कि कई नवजात बच्चे मां का दूध क्यों नहीं पी पाते हैं? ये चिंता की बात कब बन सकती है? और, बच्चे को सही से दूध पिलाने के लिए किन बातों का ध्यान रखें? 

कई नवजात बच्चे मां का दूध क्यों नहीं पी पाते हैं?

ये हमें बताया डॉ. रतन गुप्ता ने. 

डॉ. रतन गुप्ता, प्रोफेसर पीडियाट्रिक्स, वीएमएमसी एंड सफदरजंग हॉस्पिटल

इसमें सबसे महत्वपूर्ण है कि मां ने बच्चे को अपने स्तन से कैसे अटैच कराया है. उसका लगाव कैसा है. अगर मां झुककर बैठी है तो शिशु के मुंह में सिर्फ निप्पल जाएगा. निप्पल में दूध नहीं होता है. एल्वियोली में होता है. बच्चा निप्पल को तेज़ी से चूसेगा. इससे निप्पल की स्किन फटने लगती है. बच्चे को दूध नहीं मिलेगा.

एक और भ्रामक बात है कि शुरू के दो-तीन दिनों तक आने वाला पीला गाढ़ा दूध, जो बहुत महत्वपूर्ण होता है, थोड़ी मात्रा में बनता है. लोगों को लगता है कि दूध बहुत कम बन रहा है. मां का दूध कम नहीं पड़ता. बहुत थोड़ी मात्रा से ही बच्चे की ज़रूरत पूरी हो जाती है. अगर बच्चे को हम बोतल से दूध पिला रहे हैं. शहद दे रहे हैं. कुछ और पेय पदार्थ दे रहे हैं तो बच्चा मां से अटैच नहीं होगा. मां का दूध नहीं पिएगा. जब हम बोतल से दूध पिलाना शुरू कर देते हैं तो इसमें बच्चे के मुंह में दूध टपकता है.

वहीं जब बच्चा मां का दूध पीता है तो उसे चूसना पड़ता है. जैसे ही हम बच्चे को बोतल से दूध पिलाने लगते हैं, तो उसे मां का दूध पीने में परेशानी होने लगती है इसलिए महत्वपूर्ण बात ये है कि बच्चे को मां बार-बार स्तनपान कराए. 24 घंटे में कम से कम 10 से 12 बार. रात में एक से दो बार ज़रूर कराए. ऐसी कई परिस्थितियां होती हैं, जिसमें बच्चा स्तन को चूस नहीं पाता है. जैसे अगर बच्चा समय से पहले हो गया है. बच्चे का वज़न बहुत कम है. या बच्चा बहुत समय तक बीमार रहा है और नर्सरी में रहा है. फिर भी हमें बच्चे को मां का दूध ही देना है. 

अगर शिशु की ठुड्डी मां के ब्रेस्ट को छू रही है तो अटैचमेंट सही है
ये चिंता की बात कब बन सकती है?

जो शिशु पहले से मां का दूध पी रहे थे. फिर अचानक एक दिन वो अटैच नहीं हो रहे हैं. वो दूध नहीं पी रहे हैं. बच्चा शिथिल पड़ रहा है. ये एक गंभीर संक्रमण का लक्षण हो सकता है. ऐसी स्थिति में बच्चे को किसी शिशु रोग विशेषज्ञ को ज़रूर दिखाएं.

बच्चे को सही से दूध पिलाने के लिए किन बातों का ध्यान रखें?

सबसे महत्वपूर्ण बात हमें समझनी है कि मां बच्चे को कैसे अटैच कराए. मां झुककर नहीं बैठे, पीछे सहारा लेकर बैठे. चार बहुत सामान्य-सी बातें हैं. बच्चे को सीधा रखें, सामने रखें, समीप रखें, सहारा दें. अगर इन चार बातों को ध्यान रखा जाए तो स्वस्थ शिशु का मां के स्तन से सही अटैचमेंट होगा और बच्चा अच्छे से दूध पिएगा. इसकी बहुत सरल सी पहचान है. अगर शिशु की ठुड्डी मां के ब्रेस्ट को छू रही है तो अटैचमेंट सही है. अगर अटैचमेंट सही है तो बच्चा दूध पिएगा.

एक बहुत ही असामान्य स्थिति आती है. मां बहुत बीमार है या मां उपलब्ध नहीं है. तब हमें बच्चे को फॉर्मूला मिल्क या डेयरी मिल्क देना चाहिए. वो भी बोतल से नहीं देना चाहिए. कटोरी-चम्मच से देना चाहिए. सबसे बेहतर तो यही है कि बच्चे को कम से कम 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध ही दिया जाए. पानी, घुट्टी और बोतल से दूध न दें. 6 महीने के बाद बच्चे को ऊपरी आहार देना शुरू कर दें, लेकिन मां को स्तनपान लगभग दो साल तक कराना चाहिए. 

अगर बच्चा मां का दूध नहीं पी रहा है. तो, ये टिप्स फॉलो करके देखें. दीवार या बेड का टेक लेकर बैठें. ध्यान दें कि बच्चे की ठुड्डी ब्रेस्ट को छू रही हो. अगर ये सब करने के बाद भी बच्चा दूध नहीं पी पा रहा है तो डॉक्टर को दिखाएं. हो सकता है समस्या कुछ और हो. इसलिए देर न करें.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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