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बच्चा ना होने पर दूसरे की बच्ची किडनैप की, 9 साल बाद अपने परिवार से ऐसे मिली लड़की

किडनैप होने के बाद अपने असली घर से बस 500 मीटर दूर रह रही थी लड़की.

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6 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 6 अगस्त 2022, 07:13 PM IST)
Pooja Gaur, Rajendra Dhondu Bhosle, Misiing girl no. 166
पूजा का मिसिंग गर्ल पोस्टर और 9 साल बाद पूजा अपनी मां के साथ (बायीं फोटो-ट्विटर, दायीं फोटो-हिंदुस्तान टाइम्स)
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तारीख थी 22 जनवरी 2013. मुंबई में स्कूल जाते समय एक सात साल की बच्ची को किसी ने किडनैप कर लिया. घरवालों ने बहुत ढूंढा. पुलिस में FIR दर्ज करवाई. पुलिस ने दिन-रात एक कर दिए, लेकिन बच्ची नहीं मिली. लापता लड़की की पहचान मिसिंग गर्ल 166 (Missing girl no. 166) बनकर रह गई. लेकिन 4 अगस्त 2022 रात 8 बजकर 20 मिनट पर ये लापता लड़की अपने परिवार से मिली. बच्ची को अपने परिवार से अलग हुए 9 साल हो गए थे, तब  वो 7 साल की थी और अब 16 साल की हो गई. मिसिंग गर्ल 166 का नाम पूजा गौड़ है (Pooja Gaur). पूजा मुंबई के अंधेरी वेस्ट इलाके में अपने घर से 500 मीटर दूर ही रह रही थी. 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 22 जनवरी 2013 को पूजा अपने भाई के साथ स्कूल जा रही थी. पॉकेट मनी को लेकर भाई बहन में झगड़ा हुआ. इसी बात का फायदा आरोपी जोसफ डिसूजा ने उठाया और स्कूल के बाहर से बच्ची को किडनैप कर लिया. क्योंकि डिसूजा और उसकी पत्नी सोनी को बच्चा नहीं हो रहा था. पूजा के घर नहीं आने के बाद घरवालों ने FIR दर्ज करवाई. मामला मीडिया में आया. पुलिस ने छानबीन शुरू की. पूजा को खोजने के लिए कई कैंपेन भी चलाए गए. ये सब देखकर डर के मारे डिसूजा और सोनी ने पूजा को कर्नाटक के रायचूर हॉस्टल में भेज दिया.

मिसिंग गर्ल 166 पूजा गौड़  का पोस्टर 

खबर के मुताबिक, 2016 में डिसूजा और सोनी को बच्चा हुआ. लेकिन दो बच्चों का खर्चा उनसे उठाया नहीं जा रहा था. इसलिए उन्होंने पूजा को वापस बुला लिया. अपना घर बदल लिया और मुंबई के अंधेरी वेस्ट के गिल्बर्ट हिल इलाके में रहने लगे. संयोग से ये पूजा के असली घर का ही इलाका था. डिसूजा ने पूजा को किसी से बात करने के लिए मना कर दिया और बेबी सिटिंग के काम में लगा दिया.

मिली जानकारी के मुताबिक, पूजा कई सालों से बेबी सिटिंग का काम कर रही थी. वो जहां काम करने जाती थी, उसने वहां के लोगों को बताया,

"मम्मी (सोनी) मेरे साथ मारपीट करती है और पापा (डिसूजा) शराब के नशे में मुझे कहते हैं कि 2013 में मुझे कहीं से उठाकर लेकर आए हैं. इस बात से मुझे समझ आया कि ये मेरे माता-पिता नहीं है. लेकिन मुझे उनसे डर लगता है. इसलिए मुझे समझ नहीं आया यहां से कहां जाऊं?"

ये सब सुनकर उन लोगों ने पूजा की मदद की. गूगल पर पूजा मिसिंग गर्ल का नाम डालकर सर्च किया. सर्च करने पर पूजा से जुड़े कैंपेन और आर्टिकल्स सामने आ गए. खबर के मुताबिक पूजा के अंकल (जिनके घर पूजा बेबी सिटर का काम कर रही थी) ने बताया, 

"आर्टिकल्स में अपनी फोटो देखने के बाद पूजा को सब याद आ गया. अपना घर, अपने मां-बाप सब. मिसिंग पोस्टर पर पांच नंबर लिखे थे. जिनमें से चार पर फोन नहीं लगा. एक पर लगा और वो पूजा का पड़ोसी रफीक था. रफीक को पूजा की बात पर यकीन नहीं हुआ. उसने पूजा की पहले फोटो मांगी और फिर वीडियो कॉल कर पूजा का स्क्रीनशॉट लिया. और पूजा के घरवालों को दिखाया. जब उन्होंने पूजा का फोटो देखा, तो उन्हें यकीन नहीं हुआ. फिर उन्होंने पुलिस को बताया और जांच पड़ताल के बाद वो 4 अगस्त को पूजा से 9 साल बाद मिले."

‘इंसानियत से रिटायर नहीं हुआ’

पूजा के घरवालों ने पूजा की मिसिंग रिपोर्ट DN नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाई थी. और ये मामला असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर राजेंद्र धोंडू भोसले के पास आया. क्योंकि वो 2008-2015 के बीच लापता हुई बच्चियों को ढूंढ रहे थे. उन्होंने रिटायर होने तक 165 लड़कियों को ढूंढ लिया था. लेकिन 166वीं पूजा को नहीं ढूंढ पाए थे. भोसले ने अपने रिटायरमेंट के सात साल बाद तक पूजा को ढूंढा. खबर के मुताबिक पूजा के मिलने के बाद भोसले ने कहा, 

"आप एक पुलिसवाले के रूप में रिटायर हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत में रिटायरमेंट नाम का कुछ नहीं होता है. इंसानियत तब तक रहेगी, जब तक आप जिंदा रहोगे. बेटी को खोने का दर्द आपको समझना होगा. और जो इस दर्द को महसूस नहीं कर सकता है, वो मनुष्य नहीं हो सकता है."

रिटायर्ड ASI राजेंद्र धोंडू भोसले (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

मिली जानकारी के मुताबिक डिसूजा और सोनी के खिलाफ IPC की धारा 363 (किडनैपिंग), 365 (किडनैपिंग का इरादा), 368 (गलत तरीके से कैद में रखना), 370 (मानव तस्करी) और 374 (जबरन मजदूरी करवाना) के तहत FIR दर्ज की गई है. और 10 अगस्त तक पुलिस कस्टडी में भेजा गया है. उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है, क्योंकि उनकी छह साल की बच्ची का ध्यान रखने के लिए कोई नहीं है.

फिलहाल पूजा के मेडिकल टेस्ट हो रहे हैं, और उसे चाइल्ड वेलफेयर कमिटी के पास भेजा गया है. उसके बाद उसे परिवार के पास भेजा जाएगा. पुलिस की एक टीम जांच के लिए कर्नाटक भी भेजी गई है. 

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