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'बस चले तो मां-बाप को जेल में डाल दूं,' घर छोड़ने वाली लड़कियों पर रामपुर SP का बुरा बयान!

SP बोले, "पैदा करके किसके भरोसे छोड़ दिया है भाई!"

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29 जून 2022 (अपडेटेड: 29 जून 2022, 02:26 PM IST)
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ये बयान ट्विटर पर ख़ूब वायरल हो रहा है (फ़ोटो - वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट)
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उत्तर प्रदेश के रामपुर में पुलिस ने सद्भावना संगोष्ठी आयोजित की थी. 28 जून को. जिले के सारे धर्म गुरू, पुलिस अधिकारियों, ग्राम प्रधानों, पार्षदों, प्रतिष्ठित व्यापारियों और पत्रकारों को बुलाया गया था. इसी गोष्ठी में बोलते हुए रामपुर के SP अशोक कुमार ने एक विवादित बयान दे डाला.

अपने वक्तव्य में SP ने कहा कि उनका बस चले तो वो ऐसे लोगों को जेल में डाल दें जो बेटी के भाग जाने की शिकायत लेकर आते हैं. ये भी कहा कि इससे बेहतर है कि कम बच्चे पैदा करें, जिनकी अच्छी परवरिश कर सकें.

विवादित भाषण में क्या बोल गए SP?

आज तक से जुड़े आमिर ख़ान की रिपोर्ट के मुताबिक़, SP अशोक कुमार ने अपने वक्तव्य की शुरूआत में कहा कि हम जनता की सुरक्षा के लिए हैं. जनता हमारी है और जनता में सुरक्षा की भावना जगाने के लिए और उन्हें सुरक्षित महसूस कराने के लिए इस संगोष्ठी का आयोजन किया गया है. इसके बाद एक केस का ज़िक्र करते हुए SP ने एक 'महिला विरोधी' बयान दे दिया. वायरल क्लिप में SP ने कहा,

"..अभी बड़ा तमाशा हुआ सिविल लाइंस में. कोई मुस्लिम लड़की थी, किसी हिंदू लड़की के साथ जा रही थी या कोई हिंदू लड़की थी, किसी मुस्लिम लड़के के साथ जा रही थी.. तो आप लोग देखिए अपने परिवार में ऐसा क्यों हो रहा है?

मैं तो उन मां-बाप को जेल भेजना चाहूंगा जो यह शिकायत लेकर आए कि मेरी लड़की चली गई है. समझ रहे हैं? पैदा करके छोड़ दिया है! किसके भरोसे छोड़ दिया है भई?"

सामने बैठी जनता ने ताली बजाई. तो SP साहब आगे बोले,

"अगर अच्छा लगे तो यह भी सुन लीजिए, कि भाई एक-दो बच्चे बहुत हैं. जिनकी परवरिश कर सको. अच्छे से. न आप उनको तालीम दे पाओगे, न अच्छी सुविधा. मैं धर्म से ऊपर उठ कर ये बात कह रहा हूं."

पुलिस अधिक्षक ने 'अगर कोई पुलिसकर्मी आप से बड़ा है, तो उसे सम्मान दीजिए' और 'मुचुअल मान-सम्मान से संबंध बेहतर होंगे' टाइप बातें भी कीं. लेकिन बातों में ये बात सबसे ज़्यादा वायरल हुई. ट्विटर पर भी लोगों ने वीडियो पर ख़ूब कॉमेंट्स किए. कुछ लोग एसपी अशोक कुमार से सहमति जता रहे हैं, वहीं ज्यादातर का कहना है कि वो गलत कह रहे हैं.

एसपी के विरोध में लिखने वालों का मानना है कि एक लड़की के बालिग हो जाने के बाद उसके पास अपना जीवनसाथी चुनने का अधिकार है. अगर वो उस साथी के लिए अपने माता-पिता का घर छोड़ती है तो ये उसका फैसला है. पुलिस की जिम्मेदारी है कि वो उस लड़की को और उसके साथी को सुरक्षा दे. वहीं कुछ का कहना है कि लड़की अकेले घर नहीं छोड़ती, उसके साथ एक लड़का भी घर छोड़ता है, लेकिन इसके बाद भी पुलिस कप्तान मॉरल पुलिसिंग लड़की और उसके परिवार पर ही कर रहे हैं. पुलिस का काम पुलिसिंग है, मॉरल पुलिसिंग नहीं.

बयान की वायरल होने के बाद अब SP साहब का स्पष्टीकरण भी आया है. एक प्रेस विज्ञप्ति है, जिसमें ऊपर लिखा है 'खंडन'. उन्होंने कहा है कि उनकी ऐसी कोई मंशा नहीं थी. वह पीड़ितों को अपना परिवार मानकर पूरी वैधानिक और प्रशासनिक मदद करते हैं और करते रहेंगे. उन्होंने लिखा,

"उक्त वक्तव्य का केवल इतना है कि हमारे जीवन की आपाधापी में जाने अनजाने हमारा परिवार और बच्चे उपेक्षित हो जाते हैं, जिनसे यह समस्या बढ़ रही है. हम अभिभावक के रूप में अपने बच्चों के संस्कार को प्राथमिकता के आधार पर मजबूत करें. वक्तव्य से किसी बंधु को पीड़ा हुई तो मैं खेद भी प्रकट करता हूं."

इस मसले पर SP रामपुर का पक्ष जानने के लिए हमने उन्हें फोन किया. उनके सरकारी नंबर पर, लेकिन उनका नंबर बंद था. इसलिए उनसे बात नहीं हो पाई. 

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