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हिजाब विवाद पर कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले पर मुस्लिम महिला एक्टिविस्ट्स ने क्या कहा?

याचिकाकर्ताओं ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है.

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कर्नाटक हाईकोर्ट ने हिजाब को इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं माना है.
कर्नाटक में हिजाब विवाद काफी दिनों तक गर्माया रहा.
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OddNaari
15 मार्च 2022 (अपडेटेड: 15 मार्च 2022, 04:55 PM IST)
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मुस्लिम महिलाओं द्वारा हिजाब पहनना इस्लाम में अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है. हिजाब विवाद पर अपना फैसला सुनाते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ऋतु राज अवस्थी ने ये बात कही. कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि छात्राएं यूनिफॉर्म पहनने से मना नहीं कर सकती हैं. हाईकोर्ट ने क्लासरूम के अंदर हिजाब पहनने की मांग वाली सारी याचिकाएं खारिज कर दी हैं. कोर्ट ने अपने फैसले में ये भी लिखा कि संविधान में पर्दा प्रथा के जो नुकसान बताए गए हैं वो हिजाब, घूंघट और नकाब पर भी बराबर तौर पर लागू होते हैं. कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा कि किसी भी समाज और धर्म की आड़ में पर्दा प्रथा संविधान के मूलभूत समानता के सिद्धांत के खिलाफ है. कर्नाटक हाईकोर्ट के इस फैसले पर बवाल हुआ. AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने ट्विटर पर इस फैसले को लेकर असंतोष जाहिर किया. उन्होंने लिखा कि वो फैसले से असहमत हैं और असहमत होना उनका अधिकार है. उन्होंने लिखा,
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इस फैसले को लेकर हमारे साथी निखिल ने लेखिका और एक्टिविस्ट शीबा असलम फेहमी से बात की. उन्होंने कहा,
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ऑल इंडिया वुमन मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सदस्य शाइस्ता अंबर ने भी फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा,
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इस फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी है. फैसले के बाद बेलगाम, बेंगलुरु ग्रामीण, कलबुर्गी, कोप्पल और चिकमगंलूर जैसे जिलों में भी धारा 144 लगा दी गई. प्रशासन अलर्ट पर है.

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