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ऑक्सफर्ड से पढ़ी इस लड़की के नाना की कहानी आपका दिन बना देगी

पुणे की रहने वाली जुही कोरे ने अपनी कहानी लिंक्डइन पर शेयर की है.

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juhi kore
फोटो - लिंक्ड-इन
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सोम शेखर
8 सितंबर 2022 (अपडेटेड: 8 सितंबर 2022, 07:49 PM IST)
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ये लिखा है जूही कोरे ने. जूही ऑक्सफ़ोर्ड ग्रेजुएट हैं. कमपैरेटिव सोशल-पॉलिटिक्स की पढ़ाई की है. लिंक्ड-इन पर एक पोस्ट डाला, जिसमें ये कहानी सुनाई. अपने नाना की कहानी. 40 के दशक में पिछड़ी जाति के परिवार के संघर्ष से लेकर सपने सच होने तक की कहानी. सोशल मीडिया पर ये पोस्ट वायरल है. पोस्ट पर हज़ार से ज्यादा कमेंट्स, 31 हज़ार लाइक्स और 200 के करीब शेयर्स हैं. 

आगे की कहानी सुनकर आप भी कहेंगे, 'भई, बाह!'

क्या थी उस बच्चे की कहानी, जिसे पढ़ने नहीं मिला.

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जूही ने लिखा कि वो बच्चा हारा नहीं. चूंकि खेत के काम से पैसे तो निकलते नहीं थे, तो उसने अपने जैसे ही 'जातबाहरों' (अनुसुचित जाति) से ही किताबें ले लीं. गांव के इकलौते लैम्प-पोस्ट के नीचे पढ़े. साथ पढ़ने वाले अगड़ी जातियों के लड़के बुली करते थे. अगड़ी जातियों के टीचर्स भेदभाव करते थे. क्लास के बाहर बैठाया जाता था. इसके बावजूद न केवल वो बच्चा पास हुआ, बल्कि उसने खुद को परेशान करने वाले लड़कों से ज्यादा नंबर हासिल किए.

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जुही कोरे के लिंक्ड इन पोस्ट का स्क्रीनशॉट

जैसा हर हीरो के सफ़र में होता है, इस सफ़र में भी एक गुरु था. वो उनके स्कूल का प्रिंसिपल था. एक आदमी जिसने इस बच्चे की क़ाबीलियत पहचानी और कुछ सालों के बाद, जब उसने बच्चे की प्रोग्रेस देखी, तो उसकी स्कूली पढ़ाई और रहने-खाने का ख़र्च उठा लिया. आगे जूही लिखती हैं,

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जूही ने बताया कि एक साल पहले वो गुज़र गए और इस वजह से उनके कॉन्वोकेशन में नहीं थे. जूही ने आख़िर में लिखा कि केवल दो पीढ़ियों में उन्होंने क्लास के अंदर न बैठने से लेकर अपनी पोती के सबसे अच्छी यूनिवर्सिटी में पढ़ने तक, सब देख लिया.

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