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बच्चों और पॉर्न वेबसाइट से जुड़ी ये बातें आंखें खोलने वाली हैं

‘उन्होंने हमारे दुखों से पैसा बनाया, वो ऐसा ही करते रहे हैं.’

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20 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 20 दिसंबर 2020, 02:52 PM IST)
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पॉर्न हब. मुझे यकीन है कि ये नाम आपके लिए नया नहीं होगा. फिर भी बता दूं कि ये एक पॉर्नोग्राफिक वेबसाइट है. जहां पर अडल्ट वीडियो डाले जाते हैं. भारत में ये और इस तरह की कई वेबसाइट्स बैन हैं. लेकिन देखने वाले इसे खोलने के नए-नए जुगाड़ खोज ही लेते हैं.

आज पॉर्न हब की बात क्यों? दरअसल, कुछ वक्त पहले ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में एक आर्टिकल छपा था. इसमें निकोलस क्रिस्टॉफ ने पॉर्न हब की बखिया उधेड़ कर रख दी थी. उस आर्टिकल को पढ़ने के बाद हमने भारत के संदर्भ में थोड़ी खोजबीन की. तो आज हम निकोलस क्रिस्टॉफ के आर्टिकल पर बात करेंगे, पॉर्न हब पर बात करेंगे, उन बच्चों पर बात करेंगे जिनकी तस्वीरों और वीडियो के पॉर्न हब पर आते ही उनकी दुनिया बदल गई और आखिर में बात करेंगे भारत में स्थिति पर.

‘द चिल्ड्रन ऑफ पॉर्न हब’

निकोलस क्रिस्टॉफ. पुलित्ज़र अवॉर्डी जर्नलिस्ट हैं. ‘द चिल्ड्रन ऑफ पॉर्न हब’ टाइटल से छपे अपने आर्टिकल में वो लिखते हैं कि पॉर्न हब डार्क वेब के जरिए बच्चों के यौन शोषण के वीडियो हासिल कर रहा है. और पैसा कमाने के लिए उन्हें अपनी वेबसाइट पर डाल रहा है.

फैक्ट्स की बात करें, तोः

- पॉर्न हब के पास इतने पैसे हैं कि वो टाइम्स स्क्वायर में अपने लिए एक बिलबोर्ड ख़रीद कर अपना प्रचार करता है.

- हर महीने 3.5 बिलियन लोग यह वेबसाइट देखते हैं. इसके व्यूज़ नेटफ्लिक्स के व्यूज़ से बहुत ज्यादा हैं.

यानी एक चर्चित वीडियो स्ट्रीमिंग ऐप से ज्यादा रीच वाली इस वेबसाइट पर बच्चों से रेप के वीडियो मौजूद हैं. लड़कियों, बच्चियों की नग्न तस्वीरें हैं. बच्चों से रेप को बढ़ावा देने वाले हिंसक वीडियो हैं, जो क्रूरता की हदें पार करते नज़र आते हैं. पॉर्न हब पर 'यंग पॉर्न', 'वेरी यंग टीन' ये सब ढूंढने पर ऐसे 920 मिलियन (92 करोड़) वीडियो मिल जाते हैं, जो बच्चों की नग्न तस्वीरें या उनके बलात्कार के वीडियो होते हैं.

कुछ बच्चों की आपबीती

इस आर्टिकल में निकोलस ने सेरेना के. फ्लैटिस की कहानी बताई. ये कहानी पढ़कर आप समझेंगे कि आपकी तस्वीर या वीडियो किसी पॉर्नोग्राफिक वेबसाइट पर डाल दिया जाए तो आपकी ज़िंदगी कितनी खराब हो सकती है.

सेरेना बताती हैं कि वह जब 14 साल की थीं, तब उनके एक दोस्त ने उनका एक वीडियो अपने बाकी दोस्तों को भेज दिया. किसी ने वो वीडियो पॉर्न हब पर डाल दिया. उन्होंने वो वीडियो हटाने/हटवाने की कोशिश की, पर सफलता नहीं मिली. दोस्त, आसपास के लोग उस वीडियो के चलते उसे जज करने लगे, ताने देने लगे. सेरेना ने स्कूल छोड़ दिया. दो बार अपनी जान लेने की कोशिश की. ड्रग्स लेना शुरू कर दिया, अपना घर छोड़ना पड़ा. आज वो अपने तीन कुत्तों के साथ एक कार में ही रहती हैं. उनका कोई परमानेंट ठौर-ठिकाना नहीं है. सेरेना वेटनरी डॉक्टर बनना चाहती थीं, पर इसके लिए अब न उनके पास हिम्मत बची है और न कोई साधन.

वहीं, निकोलस ने टेलर नाम की एक लड़की से इस पर बात की. 14 की उम्र में उस लड़की के साथ भी वही हुआ था जो सेरेना के साथ हुआ. छह साल बीत चुके हैं और टेलर का वीडियो अब भी बीच-बीच में पॉर्न हब पर ऊपर कर दिया जाता है. वो कहती हैं,

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आंकड़े चौंकाने वाले हैं

नैशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लोइटेड चिल्ड्रन. NCMEC. ये संस्था गायब हुए और प्रताड़ना से गुज़र चुके बच्चों के लिए काम करती है. अमेरिका में है. निकोलस ने इस संस्था से उन सभी शिकायतों की संख्या मांगी जो बच्चों के यौन शोषण या रेप से जुड़े वीडियो के ख़िलाफ़ किए गए हों. 2015 में ऐसे 6.5 मिलियन (65 लाख), 2017 में ऐसे 20.6 मिलियन (दो करोड़) और 2019 में 69.2 मिलियन (छह करोड़ 92 लाख) हो चुकी है.

पॉर्न हब कहता है कि कदम उठा रहा है, पर दिक्कत कहां आ रही है?

भारत समेत कई देशों में पॉर्न हब पर बैन लगा हुआ है. पॉर्न हब कहता रहा है कि वो बच्चों को यौन शोषण को रोकने की दिशा में ज़रूरी कदम उठा रहा है. लेकिन इसमें एक बड़ा पेच फंसा हुआ है. अपने आर्टिकल के लिए निकोलस ने पॉर्न हब के एक मॉडरेटर से बात की. मॉडरेटर यानी वो लोग जो वेबसाइट में अपलोड होने वाले वीडियो की जांच करते हैं. उसने बताया-

- वीडियो अपलोड होने के हिसाब से मॉडरेटर काफ़ी कम होते हैं. ऐसे में उन्हें वीडियो को फ़ास्ट फॉरवर्ड कर के देखना होता है, इससे लोगों की उम्र का अंदाज़ लगा पाना मुश्किल होता है.

- शिकायत हाने के बाद पॉर्न हब ने कुछ शब्दों को सर्च इंजन से हटा दिया. जैसे 'रेप, 'प्रीटीन', 'पीडोफिलिया'. ये शब्द सर्च करने पर साइट पर कोई वीडियो सामने नहीं आता. न ही इन शब्दों को टैग करके कोई वीडियो वेबसाइट पर डाला जा सकता है. लेकिन Rape की जगह Rep, Raep जैसे शब्दों के साथ उस तरह के वीडियो अब भी डाले और सर्च किए जा सकते हैं. यानी पॉर्न हब ने जो कदम उठाए वो बेकार साबित हुए.

अब भारत की बात

भारत में स्थिति और भी भयावह नज़र आती है. NCMEC के मुताबिक, बच्चों के शोषण, बलात्कार के वीडियो सबसे ज्यादा भारत से अपलोड होते हैं. 2020 के सिर्फ़ 5 महीनों में ही 25,000 से ज़्यादा ऐसे वीडियो या फ़ोटो भारत से अपलोड किए जा चुके हैं.

यह भी सामने आया है कि जिन बच्चों के साथ ऐसा होता है उनमें से 70 प्रतिशत के गुनहगार उसके घर-परिवार जान-पहचान के ही लोग होते हैं. दिल्ली इस रैकेट में सबसे आगे है, उसके बाद महाराष्ट्र और फिर गुजरात.

तो फिर आख़िर समस्या का हल क्या है?

निकोलस ने कई लोगों से इस बारे में बात की. इससे तीन रास्ते सामने आएः

- इन वेबसाइट पर वीडियो डालने की अनुमति सिर्फ़ वेरिफाइड यूज़र्स को ही हो.

- वीडियो को डाउनलोड करने का ऑप्शन हटा देना चाहिए. क्योंकि कई बार वीडियो के हटा लेने के बाद भी वह बार-बार अपलोड किए जाते हैं और यह डाउनलोड होने की वजह से ही होता है.

- मॉडरेर्टर्स की संख्या जो वीडियो को परख पाएं, वो बढ़ा दिए जाएं.

इस साल फरवरी में सोनाली आचार्जी का एक आर्टिकल इंडिया टुडे में छपा था. इसके मुताबिक, भारत में कम उम्र के बच्चों से ऑनलाइन दोस्ती करके, उनका भरोसा जीतकर कुछ लोग उनके वीडियो या तस्वीरें मंगा रहे हैं या रिकॉर्ड कर रहे हैं. और उन्हें अपलोड कर रहे हैं.

भारत में सिर्फ़ बच्चे ही नहीं, 18 साल पार कर चुके लोगों को भी अपने शरीर और उस से जुड़े हक़ के बारे में पता ही नहीं होता. ऐसे में सेक्स एजुकेशन का सरकार द्वारा बंद कर दिया जाना और भी ज़्यादा ख़तरनाक साबित हो रहा है.

इस रिपोर्ट में सोनाली ने प्रधानमंत्री कार्यालय के चीफ़ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफ़िसर को कोट किया था. उन्होंने कहा था,

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अंत में पढ़ें मंगलेश डबराल की कविता. बच्चों के नाम एक ख़त. मंगलेश हाल ही में इस दुनिया से विदा हुए हैं. ये कविता पढ़ें और समझें कि चंद लोगों के अपने हित के लिए किए गए भयावह काम से किस तरह बच्चों का बचपन छिन जाता है. उनसे मासूम बने रहने का हक़ छीन लिया जाता है.

बच्चों के नाम एक ख़त- मंगलेश डबराल

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ये आर्टिकल हमारे साथ इंटर्नशिप कर रही कनुप्रिया ने लिखा है.


वीडियो देखें : पॉर्न वेबसाइट को किस बात का डर लगा कि 90 लाख वीडियो उड़ा दिए?    

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