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ज्यादा ठंड लग रही है तो, एक थायरॉइड की जांच जरूर करा लें

ज्यादातर मामलों में हाइपोथायरायडिज्म एक ऑटोइम्यून बीमारी होती है. ये बीमारी महिलाओं को ज्यादा होती है और उम्र बढ़ने के साथ-साथ इसके मामले बढ़ जाते हैं.

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1 फ़रवरी 2024 (अपडेटेड: 1 फ़रवरी 2024, 05:06 PM IST)
Hypothyroidism
शरीर में टी 3 और टी 4 हॉर्मोन की कमी से भी ज्यादा ठंड लगती है (सांकेतिक फोटो)
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ठंड का मौसम है, ऐसे में सभी लोग खुद को गर्म रखने के लिए गर्म कपड़े लादे रहते हैं. लेकिन कई बार आपने अपने परिवार के कुछ लोगों या दोस्तों को ये कहते हुए सुना होगा कि ढेर सारे गर्म कपड़े पहनने के बाद भी उन्हें ठंड लग रही है. या उनके हाथ-पैर काफी ठंडे हैं. और अक्सर ऐसा कहने वालों में महिलाएं की संख्या ज्यादा होती है. आज हम इसके बारे में इसलिए बात कर रहे हैं क्योंकि हमारे व्यूअर सुरजीत ने हमें मेल लिखकर इसी से जुड़ा सवाल पूछा है. सुरजीत का कहना है कि उनकी मां को बाकी लोगों से ज्यादा ठंड लगती है. उन्हें लगा कि शायद कमजोरी की वजह से ऐसा हो रहा है, इसलिए वो डॉक्टर के पास गए. डॉक्टर ने कुछ टेस्ट्स किए और बताया कि सुरजीत की माता जी की थायरॉइड ग्रंथि कम काम कर रही है. इस वजह से उन्हें हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) की बीमारी हो गई है, और इसी वजह से उन्हें ज्यादा ठंड भी लग रही है. तो चलिए डॉक्टर से जानते हैं कि हाइपोथायरायडिज्म की वजह से ठंड ज्यादा क्यों लगती है?

थायरॉइड की बीमारी क्या होती है?

ये हमें बताया डॉक्टर हिमिका चावला ने.

(डॉक्टर हिमिका चावला, सीनियर कंसल्टेंट, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, पीएसआरआई हॉस्पिटल, दिल्ली)

थायरॉइड शरीर के अंदर मौजूद एक ग्रंथि है. ये गले के अगले हिस्से में स्थित होती है और इसका आकार तितली के जैसा होता है. थायरॉइड का काम होता है टी3 और टी4 हॉर्मोन बनाना. ये दोनों हॉर्मोन शरीर के मेटाबोलिज़्म को दुरुस्त रखते हैं. इसके अलावा ये दोनों हॉर्मोन हड्डियों, मांसपेशियों, दिल और रिप्रोडक्टिव अंगों को चलाने में मदद करते हैं. थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं में हाइपरथॉयराइडिज्म (Hyperthyroidism) और हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) हो सकते हैं.

हाइपोथायरायडिज्म में शरीर के अंदर टी3 और टी4 हॉर्मोन कम बनते हैं. वहीं हाइपरथॉयराइडिज्म में शरीर के अंदर टी3 और टी4 हॉर्मोन जरूरत से ज्यादा बनते हैं. इन दोनों बीमारियों में से हाइपरथॉयराइडिज्म के मरीज ज्यादा हैं.

सर्दियों में थायरॉइड की बीमारी क्यों बढ़ जाती है?

ठंड के मौसम में तापमान कम होने के कारण शरीर को खुद को गर्म रखने के लिए ज्यादा एनर्जी की जरूरत पड़ती है. इस वजह से शरीर का मेटाबोलिज़्म भी बढ़ जाता है. चूंकि टी3 और टी4 हॉर्मोन शरीर के मेटाबोलिज़्म से जुड़े हैं, ऐसे में टी3 और टी4 हॉर्मोन की जरूरत बढ़ जाती है. जिन मरीजों में टी3 और टी4 हॉर्मोन कम बन रहे हैं, सर्दियों में उनमें हाइपोथायरायडिज्म की समस्या बढ़ जाती है. वहीं सर्दियों में हाइपोथायरायडिज्म के मरीजों की दवा की डोज भी बढ़ा दी जाती है, ताकि शरीर को गर्म रखने के लिए सर्दियों में टी3 और टी4 हॉर्मोन का प्रोडक्शन बढ़ाया जा सके.

किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है?

ज्यादातर मामलों में हाइपोथायरायडिज्म एक ऑटोइम्यून बीमारी होती है. ये बीमारी महिलाओं को ज्यादा होती है और उम्र बढ़ने के साथ-साथ इसके मामले बढ़ जाते हैं. 50 की उम्र से ऊपर करीब 15 से 20 प्रतिशत महिलाओं को हाइपोथायरायडिज्म की बीमारी हो सकती हैं. इसके अलावा जिन लोगों के परिवार में हाइपोथायरायडिज्म के मरीज हैं, उन्हें भी ये बीमारी हो सकती है. मोटापे और डायबिटीज के मरीजों को भी हाइपोथायरायडिज्म होने का खतरा होता है.

लक्षण

हाइपोथायरायडिज्म में शरीर में टी3 और टी4 हॉर्मोन कम मात्रा में बनता है. ये दोनों ही हॉर्मोन मेटाबोलिज़्म को चलाते हैं, इसलिए इनके कम होने से पूरे शरीर पर असर पड़ता है. शरीर का मेटाबोलिज़्म और दूसरे अंग धीमे काम करते हैं. ऐसे मरीज अक्सर थका हुआ महसूस करते हैं, उनकी सांस फूलती है. उन्हें ठंड भी ज्यादा लगती है. क्योंकि टी3 और टी4 हॉर्मोन शरीर में गर्मी भी पैदा करता है, इसके कम होने से हाथ-पैर ठंडे महसूस होते हैं. स्किन रूखी हो सकती है, बाल झड़ सकते हैं. टी3 और टी4 हॉर्मोन रिप्रोडक्टिव अंगों को भी प्रभावित करते हैं, इनके कम होने से महिलाओं को पीरियड्स में दिक्कत होती है. साथ ही इनफर्टिलिटी की समस्या भी हो सकती है. कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ सकता है.

ऐसा भी हो सकता है कि किसी मरीज में हाइपोथायरायडिज्म के कोई लक्षण दिखे ही न. ऐसे मरीजों में इस बीमारी का पता सिर्फ जांच होने पर ही चलता है.

बचाव और इलाज

इस बीमारी से पूरी तरह नहीं बचा जा सकता क्योंकि ये एक ऑटोइम्यून बीमारी है. हेल्दी खाना खाएं, प्रॉसेस्ड चीज़ों से दूर रहें. वजन को बढ़ने से रोकें और रोजाना एक्सरसाइज़ करने से थायरॉइड ग्रन्थि ठीक से काम करती है. इसे हाइपोथायरायडिज्म होने की संभावना कम हो जाती है. और अगर हाइपोथायरायडिज्म हो चुका है तो लाइफस्टाइल में ये बदलाव करने से इलाज में मदद मिलती है. हाइपोथायरायडिज्म की पहचान होना जरूरी है, बीमारी का पता चलने के बाद इसका इलाज किया जा सकता है. हाइपोथायरायडिज्म के मरीज में थायरॉक्सिन हॉर्मोन की कमी होती है, इसके इलाज में मरीज को ये हॉर्मोन दवाइयों के जरिए दिया जाता है. अगर मरीज को थायरॉक्सिन की सही डोज़ मिली तो इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है और सभी लक्षण भी चले जाते हैं. 

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. ‘दी लल्लनटॉप ’आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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